6 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

करूर भगदड़ केस: सुप्रीम कोर्ट डीएमके की याचिका पर मंगलवार को करेगा सुनवाई, मंत्री आधव अर्जुन पर FIR की मांग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
करूर भगदड़ केस: सुप्रीम कोर्ट डीएमके की याचिका पर मंगलवार को करेगा सुनवाई, मंत्री आधव अर्जुन पर FIR की मांग

सारांश

करूर भगदड़ — जिसमें 41 लोग मारे गए थे — अब सर्वोच्च न्यायालय में नई बहस का केंद्र बन गई है। DMK ने मंत्री आधव अर्जुन पर FIR और TVK मंत्रियों के बयानों पर रोक की मांग की है, यह आरोप लगाते हुए कि उनके बयान CBI जांच को प्रभावित कर सकते हैं।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 6 जुलाई को DMK की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई पर सहमति जताई।
याचिका DMK संगठन सचिव आर.एस.
भारती ने दायर की है।
मांग: तमिलनाडु के मंत्री आधव अर्जुन पर FIR और TVK मंत्रियों के सार्वजनिक बयानों पर रोक।
27 सितंबर 2025 की करूर भगदड़ में 41 मौतें और 142 घायल ; जांच CBI को सौंपी गई।
जांच की निगरानी जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता वाली समिति कर रही है।
DMK का आरोप — मंत्री के 2 जुलाई के भाषण से CBI जांच की निष्पक्षता खतरे में।

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार, 6 जुलाई को करूर भगदड़ मामले में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) की ओर से दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई। यह याचिका DMK के संगठन सचिव आर.एस. भारती ने दायर की है, जिसमें तमिलनाडु के मंत्री आधव अर्जुन के विरुद्ध FIR दर्ज करने और CBI जांच पूरी होने तक TVK मंत्रियों को सार्वजनिक बयान देने से रोकने की मांग की गई है।

मुख्य घटनाक्रम

यह याचिका 27 सितंबर 2025 को हुई करूर भगदड़ से जुड़ी लंबित न्यायिक कार्यवाही में दायर की गई है। उस घटना में TVK की एक रैली के दौरान 41 लोगों की मौत हो गई थी और 142 अन्य घायल हुए थे। सर्वोच्च न्यायालय पहले ही इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप चुका है और सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता वाली एक समिति इस जांच की निगरानी कर रही है।

याचिका में क्या मांगा गया है

DMK की याचिका में मुख्य रूप से दो मांगें हैं — पहली, मंत्री आधव अर्जुन के विरुद्ध FIR दर्ज की जाए, जो इस मामले में आरोपी भी हैं; दूसरी, TVK से जुड़े मंत्रियों को कोर्ट की निगरानी में चल रही CBI जांच पूरी होने तक करूर भगदड़ पर सार्वजनिक बयान देने से प्रतिबंधित किया जाए।

याचिका में 2 जुलाई को दिए गए मंत्री आधव अर्जुन के एक भाषण का हवाला दिया गया है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा कि 'हिसाब बराबर करना है' और करूर त्रासदी के लिए पिछली DMK सरकार को जिम्मेदार ठहराया। याचिका के अनुसार, इस भाषण का उद्देश्य CBI जांच में बाधा डालना और जनता के बीच DMK नेतृत्व को दोषी दर्शाना था।

जांच की निष्पक्षता पर चिंता

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के करूर दौरे की योजना बनाई जा रही थी, ताकि भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवारों को सरकारी लाभ दिए जा सकें। DMK ने स्पष्ट किया कि पीड़ित परिवारों को कल्याणकारी सहायता देने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है, परंतु चूँकि ये परिवार CBI जांच में अहम गवाह हैं, इसलिए मामले से जुड़े लोगों का उनसे सीधा संपर्क जांच की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगा सकता है।

सर्वोच्च न्यायालय की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने यह जांच CBI को तब सौंपी थी, जब उसने मामले को संभालने के तरीके पर चिंता जताई और मद्रास उच्च न्यायालय में चल रही कार्यवाही में अनियमितताओं का संज्ञान लिया था। यह मामला न केवल न्यायिक निगरानी, बल्कि तमिलनाडु की राजनीतिक सत्ता में हुए बदलाव के बाद DMK और TVK के बीच गहरे होते टकराव का भी प्रतिबिंब है।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय में मंगलवार को होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि DMK की याचिका पर अंतरिम राहत दी जाती है या नहीं। न्यायालय का रुख यह भी संकेत देगा कि CBI जांच की निगरानी में कोई नया निर्देश जारी होता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यदि सिद्ध होता है, तो यह न्यायिक प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप का गंभीर उदाहरण होगा। सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में चल रही CBI जांच के बावजूद सत्तारूढ़ दल के मंत्रियों द्वारा सार्वजनिक बयानबाजी यह सवाल उठाती है कि क्या संस्थागत निगरानी राजनीतिक दबाव के सामने पर्याप्त है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है, वह यह है कि पीड़ित परिवार — जो जांच के अहम गवाह हैं — इस राजनीतिक शतरंज में सबसे कमजोर मोहरे बने हुए हैं।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

करूर भगदड़ क्या थी और इसमें कितने लोग मारे गए?
27 सितंबर 2025 को तमिलनाडु के करूर में TVK की एक रैली के दौरान भगदड़ मच गई थी, जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई और 142 अन्य घायल हुए। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले की जांच CBI को सौंपी है।
DMK ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका क्यों दायर की?
DMK का आरोप है कि तमिलनाडु के मंत्री आधव अर्जुन के सार्वजनिक बयान और मुख्यमंत्री के पीड़ित परिवारों से मिलने की संभावित योजना CBI जांच की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती है। याचिका में आधव अर्जुन पर FIR और TVK मंत्रियों के बयानों पर रोक की मांग की गई है।
मंत्री आधव अर्जुन के किस बयान पर विवाद है?
2 जुलाई को दिए एक भाषण में मंत्री आधव अर्जुन ने कथित तौर पर कहा कि 'हिसाब बराबर करना है' और करूर त्रासदी के लिए पिछली DMK सरकार को जिम्मेदार ठहराया। DMK के अनुसार, यह बयान CBI जांच में बाधा डालने और जनमत को प्रभावित करने का प्रयास था।
करूर भगदड़ की जांच कौन कर रहा है और इसकी निगरानी कौन करता है?
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर CBI इस मामले की जांच कर रही है। जांच की निगरानी सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता वाली एक समिति कर रही है। सर्वोच्च न्यायालय ने मद्रास उच्च न्यायालय में कार्यवाही में अनियमितताओं का संज्ञान लेने के बाद यह कदम उठाया था।
सुप्रीम कोर्ट की मंगलवार की सुनवाई में क्या तय होगा?
मंगलवार की सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय यह तय करेगा कि DMK की याचिका पर अंतरिम राहत दी जाए या नहीं — यानी मंत्री आधव अर्जुन के बयानों पर तत्काल रोक लगाई जाए या नहीं। न्यायालय CBI जांच की निगरानी को लेकर भी नए निर्देश जारी कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले