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करूर भगदड़: सुप्रीम कोर्ट ने DMK की याचिका ठुकराई, TVK नेताओं पर रोक की मांग खारिज

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करूर भगदड़: सुप्रीम कोर्ट ने DMK की याचिका ठुकराई, TVK नेताओं पर रोक की मांग खारिज

सारांश

करूर भगदड़ में 41 मौतों के बाद DMK ने TVK नेताओं की बयानबाजी रोकने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया — लेकिन अदालत ने साफ संकेत दिया कि वह याचिका खारिज करेगी। फटकार के बाद DMK को याचिका वापस लेनी पड़ी। CBI जाँच जारी है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 7 जुलाई 2026 को DMK की याचिका पर विचार करने से इनकार किया।
याचिका में मुख्यमंत्री सी.
जोसेफ विजय और मंत्री आधव अर्जुना को सार्वजनिक बयान देने से रोकने की माँग थी।
न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने खारिज करने का संकेत दिया; DMK ने याचिका वापस ली।
याचिका DMK संगठन सचिव आरएस भारती ने दायर की थी।
27 सितंबर 2025 की करूर भगदड़ में 41 मौतें और 142 घायल ; जाँच CBI के पास अदालत की निगरानी में।

सर्वोच्च न्यायालय ने 7 जुलाई 2026 को करूर भगदड़ मामले में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) की उस याचिका पर विचार करने से स्पष्ट इनकार कर दिया, जिसमें सत्तारूढ़ तमिलनाडु वेत्री कड़गम (TVK) के शीर्ष नेताओं को सार्वजनिक बयान देने से रोकने की माँग की गई थी। अदालत ने संकेत दिया कि वह याचिका खारिज करने के पक्ष में है, जिसके बाद DMK ने इसे स्वयं वापस ले लिया।

अदालत का रुख और सुनवाई का घटनाक्रम

न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने सुनवाई के दौरान सीधे शब्दों में कहा, 'इस याचिका पर यहाँ जोर न देना ही बेहतर होगा। हम इसे खारिज करने के पक्ष में हैं।' इस तीखी टिप्पणी के बाद DMK की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने याचिका वापस लेने की अनुमति माँगी और कहा कि पार्टी कानून के तहत उपलब्ध अन्य उपायों का सहारा लेगी। सर्वोच्च न्यायालय ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए याचिका को वापस लिया हुआ मानकर खारिज कर दिया।

DMK की याचिका में क्या था

यह याचिका DMK के संगठन सचिव आरएस भारती ने दायर की थी। याचिका में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और मंत्री आधव अर्जुना सहित TVK के नेताओं को अदालत की निगरानी में चल रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जाँच पूरी होने तक सार्वजनिक बयान देने से रोकने का निर्देश माँगा गया था। साथ ही, भारती ने करूर भगदड़ मामले की सुनवाई में पक्षकार बनने की अनुमति भी माँगी थी।

याचिका में 2 जुलाई को आधव अर्जुना के एक भाषण का उल्लेख किया गया, जिसमें कथित तौर पर उन्होंने कहा था कि 'एक हिसाब बराबर करना है' और करूर हादसे के लिए पिछली DMK सरकार को जिम्मेदार ठहराया था। DMK का तर्क था कि ऐसे बयान CBI जाँच की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकते हैं।

गवाहों के प्रभावित होने की आशंका

DMK ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री विजय का करूर जाकर मृतकों के परिजनों को सरकारी सहायता, अनुकंपा नियुक्तियाँ और अन्य लाभ देने का प्रस्तावित कार्यक्रम जाँच की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करता है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि उसे पीड़ित परिवारों को राहत देने पर आपत्ति नहीं है, किंतु चूँकि ये परिवार मामले के महत्वपूर्ण गवाह हैं, इसलिए मामले से जुड़े लोगों का उनसे सीधा संपर्क जाँच की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है।

करूर भगदड़: पृष्ठभूमि

27 सितंबर 2025 को करूर में TVK की एक राजनीतिक रैली के दौरान मची भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई थी और 142 लोग घायल हुए थे। यह तमिलनाडु की राजनीतिक स्मृति में दर्ज सबसे दर्दनाक भगदड़ों में से एक है। इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले की जाँच तमिलनाडु पुलिस से लेकर CBI को सौंपी थी, जो अदालत की निगरानी में जारी है।

आगे की राह

याचिका वापसी के साथ DMK अब कानून के तहत उपलब्ध अन्य विकल्पों की तलाश करेगी। गौरतलब है कि यह मामला राज्य की दो प्रमुख राजनीतिक शक्तियों — सत्तारूढ़ TVK और विपक्षी DMK — के बीच गहरे टकराव का प्रतीक बन चुका है। CBI जाँच की दिशा और अदालत की अगली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे अदालत को राजनीतिक भाषण पर रोक लगाने वाले मंच के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश जैसी दिखीं — और पीठ ने इसे तत्काल भाँप लिया। असली सवाल यह है कि क्या CBI जाँच की निष्पक्षता को लेकर DMK की चिंताएँ वैध हैं, या यह सत्तारूढ़ TVK को घेरने की राजनीतिक रणनीति है। आधव अर्जुना का 'हिसाब बराबर करने' वाला बयान और पीड़ित परिवारों को सीधे लाभ देने की प्रक्रिया — दोनों पर स्वतंत्र कानूनी विश्लेषकों की भी नज़र होनी चाहिए। अदालत की निगरानी में चल रही जाँच की विश्वसनीयता तभी बनेगी जब राजनीतिक हस्तक्षेप के हर आरोप की पारदर्शी जाँच हो।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

करूर भगदड़ मामले में DMK की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला किया?
सर्वोच्च न्यायालय ने 7 जुलाई 2026 को DMK की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया और संकेत दिया कि वह इसे खारिज करेगा। इसके बाद DMK ने स्वयं याचिका वापस ले ली।
DMK ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका क्यों दायर की थी?
DMK ने माँग की थी कि TVK नेताओं — मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और मंत्री आधव अर्जुना — को CBI जाँच पूरी होने तक करूर भगदड़ मामले पर सार्वजनिक बयान देने से रोका जाए। पार्टी का तर्क था कि ऐसे बयान गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।
करूर भगदड़ में कितने लोगों की जान गई थी?
27 सितंबर 2025 को करूर में TVK की राजनीतिक रैली के दौरान मची भगदड़ में 41 लोगों की मौत हुई थी और 142 लोग घायल हुए थे। सर्वोच्च न्यायालय ने बाद में जाँच तमिलनाडु पुलिस से लेकर CBI को सौंपी।
आधव अर्जुना के किस बयान पर DMK ने आपत्ति जताई?
DMK ने 2 जुलाई को दिए आधव अर्जुना के उस भाषण पर आपत्ति जताई, जिसमें कथित तौर पर उन्होंने कहा था कि 'एक हिसाब बराबर करना है' और करूर हादसे के लिए पिछली DMK सरकार को जिम्मेदार ठहराया था। DMK का कहना था कि यह बयान CBI जाँच की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है।
करूर भगदड़ की CBI जाँच अब किस स्थिति में है?
CBI जाँच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में जारी है। DMK की याचिका वापसी के बाद पार्टी ने कहा कि वह कानून के तहत उपलब्ध अन्य विकल्पों का सहारा लेगी। अदालत की अगली सुनवाई पर सभी पक्षों की नज़र है।
राष्ट्र प्रेस
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