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नाटो समिट 2025: ट्रंप अंकारा रवाना, सहयोगियों पर रक्षा खर्च 5% तक बढ़ाने का दबाव

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नाटो समिट 2025: ट्रंप अंकारा रवाना, सहयोगियों पर रक्षा खर्च 5% तक बढ़ाने का दबाव

सारांश

ट्रंप का अंकारा दौरा महज़ एक समिट नहीं — यह नाटो को अमेरिका-निर्भर गठबंधन से आत्मनिर्भर गठबंधन में बदलने की खुली कोशिश है। $139 बिलियन के वादे और 5% रक्षा खर्च की माँग के साथ, यह समिट यूरोपीय सुरक्षा की ज़िम्मेदारी का बड़ा पुनर्वितरण तय करेगी।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सोमवार शाम व्हाइट हाउस से अंकारा के लिए रवाना हुए, जहाँ नाटो समिट आयोजित होगा।
ट्रंप नाटो सहयोगियों पर रक्षा खर्च GDP का 5% तक बढ़ाने का दबाव बनाएंगे।
नाटो सहयोगियों ने अब तक लगभग $139 बिलियन के अतिरिक्त रक्षा खर्च का वादा किया है, जिसका लगभग आधा अमेरिकी उपकरणों पर खर्च होगा।
पोलैंड , नॉर्डिक और बाल्टिक देश रक्षा खर्च बढ़ाने में अग्रणी; जर्मनी 2029 तक लक्ष्य पर पहुँचने की राह पर।
ट्रंप बुधवार को यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की और सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा से द्विपक्षीय बैठक करेंगे।
अमेरिकी प्रशासन इस समिट को नाटो को 'आत्मनिर्भरता मॉडल' की ओर ले जाने के ऐतिहासिक कदम के रूप में देख रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सोमवार शाम (अमेरिकी समय) व्हाइट हाउस से अंकारा के लिए रवाना हो गए, जहाँ इस सप्ताह नाटो समिट का आयोजन होना है। इस समिट में ट्रंप नाटो सहयोगियों पर रक्षा खर्च बढ़ाने, बोझ के न्यायसंगत बँटवारे और रक्षा औद्योगिक सहयोग को मज़बूत करने के लिए दबाव बनाएंगे।

अंकारा में कार्यक्रम की रूपरेखा

ट्रंप मंगलवार दोपहर तुर्किए की राजधानी पहुँचेंगे, जहाँ तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन उनका स्वागत करेंगे। इससे पहले एक राजकीय आगमन समारोह और ऑनर गार्ड रिव्यू आयोजित होगा, उसके बाद दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी।

मंगलवार शाम को ट्रंप नाटो नेताओं के सामाजिक रात्रिभोज में शामिल होंगे। बुधवार को आधिकारिक स्वागत और पारिवारिक फोटो के बाद वे नाटो नेताओं के कार्यकारी सत्र में भाग लेंगे।

बुधवार को ही ट्रंप यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की और सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वे बुधवार शाम व्हाइट हाउस लौटेंगे।

रक्षा खर्च पर अमेरिका का रुख

नाटो में अमेरिकी राजदूत मैथ्यू जी. व्हिटेकर ने इस यात्रा से पहले कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप उम्मीद करते हैं कि सभी सहयोगी तुरंत आगे आएंगे और न केवल 5 फीसदी के सतत रास्ते पर चलेंगे, बल्कि एक बेहद खतरनाक दुनिया में जल्द से जल्द 5 फीसदी तक पहुँचेंगे।"

व्हिटेकर के अनुसार, नाटो सहयोगियों ने अब तक लगभग $139 बिलियन के अतिरिक्त रक्षा खर्च का वादा किया है, जिसमें से लगभग आधा अमेरिका निर्मित उपकरण, हथियार और गोला-बारूद पर खर्च किया जाएगा। उन्होंने कहा, "यह एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन कुछ साथी दूसरों की तुलना में ज़्यादा कर रहे हैं।"

व्हिटेकर ने पोलैंड, नॉर्डिक देशों और बाल्टिक देशों को इस प्रयास में अग्रणी बताया। उन्होंने यह भी कहा कि जर्मनी 2029 तक लक्ष्य तक पहुँचने की राह पर है, हालाँकि सभी सहयोगियों को रक्षा खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि दिखानी होगी।

गठबंधन में बोझ-बँटवारे की नई रणनीति

व्हिटेकर ने स्पष्ट किया कि अटलांटिक के दोनों किनारों पर रक्षा उत्पादन बढ़ाना नाटो के नए क्षमता लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य यूरोप की पारंपरिक रक्षा का बोझ यूरोपीय सहयोगियों पर डालना है। अमेरिका नाटो का एक गर्वित सदस्य बना हुआ है।"

यह ऐसे समय में आया है जब वाशिंगटन एकमात्र वैश्विक महाशक्ति के रूप में दुनिया के अन्य हिस्सों में भी अपनी ज़िम्मेदारियों को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है।

समिट का व्यापक महत्व

अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी केली ने मीडिया को बताया कि सरकार इस समिट को नाटो को नया रूप देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम मान रही है। केली ने कहा, "इस राष्ट्रपति के नेतृत्व में, अमेरिका ने नाटो के ढाँचे में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव शुरू किया है — गठबंधन अमेरिका पर निर्भरता के मॉडल से वास्तविक बोझ-साझेदारी और आत्मनिर्भरता के मॉडल की ओर बढ़ रहा है।"

गौरतलब है कि यह समिट ऐसे समय में हो रहा है जब यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया की उथल-पुथल के बीच नाटो की एकजुटता और खर्च-क्षमता दोनों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा है। अंकारा से लौटने के बाद ट्रंप की अगली नीतिगत कार्रवाइयाँ तय करेंगी कि यह समिट महज़ एक कूटनीतिक औपचारिकता थी या नाटो के भविष्य की दिशा में असली मोड़।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार दाँव ऊँचे हैं। $139 बिलियन के वादे प्रभावशाली लगते हैं, पर असली सवाल यह है कि इनमें से कितने बाध्यकारी प्रतिबद्धताएँ हैं और कितने महज़ राजनीतिक घोषणाएँ। यूरोपीय सुरक्षा की ज़िम्मेदारी यूरोपीय देशों पर डालने की बात सैद्धांतिक रूप से उचित है, लेकिन जर्मनी जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था का 2029 तक का लक्ष्य बताता है कि बदलाव धीमा होगा। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि अंकारा में ज़ेलेंस्की और अल-शरा दोनों से मुलाकात — एक साथ — यूक्रेन और पश्चिम एशिया नीति में किसी बड़े समन्वय का संकेत हो सकती है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नाटो समिट 2025 अंकारा में कब और क्यों हो रहा है?
नाटो समिट इस सप्ताह तुर्किए की राजधानी अंकारा में आयोजित हो रहा है। यह समिट रक्षा खर्च, बोझ-बँटवारे और रक्षा औद्योगिक सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर सहयोगी देशों के बीच सहमति बनाने के लिए बुलाई गई है।
ट्रंप नाटो सहयोगियों से रक्षा खर्च पर क्या माँग कर रहे हैं?
ट्रंप चाहते हैं कि सभी नाटो सहयोगी अपने GDP का 5% रक्षा पर खर्च करें और जल्द से जल्द इस लक्ष्य तक पहुँचें। नाटो में अमेरिकी राजदूत मैथ्यू जी. व्हिटेकर के अनुसार, सहयोगियों ने अब तक लगभग $139 बिलियन के अतिरिक्त रक्षा खर्च का वादा किया है।
ट्रंप अंकारा में किन नेताओं से मिलेंगे?
ट्रंप तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके अलावा बुधवार को यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की और सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा से भी अलग-अलग बैठकें होंगी।
कौन से नाटो देश रक्षा खर्च बढ़ाने में सबसे आगे हैं?
व्हिटेकर के अनुसार, पोलैंड, नॉर्डिक देश और बाल्टिक देश रक्षा खर्च बढ़ाने में सबसे अग्रणी हैं। जर्मनी 2029 तक निर्धारित लक्ष्य तक पहुँचने की राह पर बताया गया है।
अमेरिका नाटो में अपनी भूमिका को कैसे बदलना चाहता है?
अमेरिकी प्रशासन नाटो को अमेरिका-निर्भर मॉडल से बोझ-साझेदारी और आत्मनिर्भरता के मॉडल की ओर ले जाना चाहता है। यूरोप की पारंपरिक रक्षा की ज़िम्मेदारी यूरोपीय सहयोगियों पर डालने की नीति को इस समिट में औपचारिक रूप दिए जाने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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