नाटो समिट 2025: ट्रंप अंकारा रवाना, सहयोगियों पर रक्षा खर्च 5% तक बढ़ाने का दबाव
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सोमवार शाम (अमेरिकी समय) व्हाइट हाउस से अंकारा के लिए रवाना हो गए, जहाँ इस सप्ताह नाटो समिट का आयोजन होना है। इस समिट में ट्रंप नाटो सहयोगियों पर रक्षा खर्च बढ़ाने, बोझ के न्यायसंगत बँटवारे और रक्षा औद्योगिक सहयोग को मज़बूत करने के लिए दबाव बनाएंगे।
अंकारा में कार्यक्रम की रूपरेखा
ट्रंप मंगलवार दोपहर तुर्किए की राजधानी पहुँचेंगे, जहाँ तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन उनका स्वागत करेंगे। इससे पहले एक राजकीय आगमन समारोह और ऑनर गार्ड रिव्यू आयोजित होगा, उसके बाद दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी।
मंगलवार शाम को ट्रंप नाटो नेताओं के सामाजिक रात्रिभोज में शामिल होंगे। बुधवार को आधिकारिक स्वागत और पारिवारिक फोटो के बाद वे नाटो नेताओं के कार्यकारी सत्र में भाग लेंगे।
बुधवार को ही ट्रंप यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की और सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वे बुधवार शाम व्हाइट हाउस लौटेंगे।
रक्षा खर्च पर अमेरिका का रुख
नाटो में अमेरिकी राजदूत मैथ्यू जी. व्हिटेकर ने इस यात्रा से पहले कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप उम्मीद करते हैं कि सभी सहयोगी तुरंत आगे आएंगे और न केवल 5 फीसदी के सतत रास्ते पर चलेंगे, बल्कि एक बेहद खतरनाक दुनिया में जल्द से जल्द 5 फीसदी तक पहुँचेंगे।"
व्हिटेकर के अनुसार, नाटो सहयोगियों ने अब तक लगभग $139 बिलियन के अतिरिक्त रक्षा खर्च का वादा किया है, जिसमें से लगभग आधा अमेरिका निर्मित उपकरण, हथियार और गोला-बारूद पर खर्च किया जाएगा। उन्होंने कहा, "यह एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन कुछ साथी दूसरों की तुलना में ज़्यादा कर रहे हैं।"
व्हिटेकर ने पोलैंड, नॉर्डिक देशों और बाल्टिक देशों को इस प्रयास में अग्रणी बताया। उन्होंने यह भी कहा कि जर्मनी 2029 तक लक्ष्य तक पहुँचने की राह पर है, हालाँकि सभी सहयोगियों को रक्षा खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि दिखानी होगी।
गठबंधन में बोझ-बँटवारे की नई रणनीति
व्हिटेकर ने स्पष्ट किया कि अटलांटिक के दोनों किनारों पर रक्षा उत्पादन बढ़ाना नाटो के नए क्षमता लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य यूरोप की पारंपरिक रक्षा का बोझ यूरोपीय सहयोगियों पर डालना है। अमेरिका नाटो का एक गर्वित सदस्य बना हुआ है।"
यह ऐसे समय में आया है जब वाशिंगटन एकमात्र वैश्विक महाशक्ति के रूप में दुनिया के अन्य हिस्सों में भी अपनी ज़िम्मेदारियों को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है।
समिट का व्यापक महत्व
अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी केली ने मीडिया को बताया कि सरकार इस समिट को नाटो को नया रूप देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम मान रही है। केली ने कहा, "इस राष्ट्रपति के नेतृत्व में, अमेरिका ने नाटो के ढाँचे में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव शुरू किया है — गठबंधन अमेरिका पर निर्भरता के मॉडल से वास्तविक बोझ-साझेदारी और आत्मनिर्भरता के मॉडल की ओर बढ़ रहा है।"
गौरतलब है कि यह समिट ऐसे समय में हो रहा है जब यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया की उथल-पुथल के बीच नाटो की एकजुटता और खर्च-क्षमता दोनों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा है। अंकारा से लौटने के बाद ट्रंप की अगली नीतिगत कार्रवाइयाँ तय करेंगी कि यह समिट महज़ एक कूटनीतिक औपचारिकता थी या नाटो के भविष्य की दिशा में असली मोड़।