नाटो प्रमुख मार्क रूटे ने ईरान पर ट्रंप की कार्रवाई को सराहा, बोले- वैश्विक सुरक्षा की ज़िम्मेदारी निभा रहे अमेरिका
सारांश
मुख्य बातें
नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (नाटो) के महासचिव मार्क रूटे ने 25 जून 2025 को वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में ईरान के खिलाफ अमेरिकी नीति और सैन्य कार्रवाई का खुलकर समर्थन किया। रूटे ने कहा कि अमेरिका के इस कदम ने ईरान को परमाणु हथियार क्षमता हासिल करने से रोकने में निर्णायक भूमिका निभाई है और ट्रंप नाटो व ट्रांस-अटलांटिक गठबंधन के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
मुख्य घटनाक्रम
व्हाइट हाउस में बुधवार को आयोजित इस संयुक्त प्रेस वार्ता का संदर्भ अंकारा में 7 से 8 जुलाई को होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन से ठीक पहले का है। रूटे ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'ईरान के मुद्दे पर आप जो कर रहे हैं, वह बेहद महत्वपूर्ण है।' उन्होंने ईरान को एक ऐसा देश बताया जो कथित तौर पर 'अराजकता और आतंकवाद का निर्यात' करता है और जो परमाणु क्षमता हासिल करने के बेहद करीब पहुँच चुका था।
रूटे के अनुसार, यदि ईरान परमाणु हथियार हासिल कर लेता तो यह केवल मध्य पूर्व या इज़रायल के लिए नहीं, बल्कि यूरोप और समूचे विश्व के लिए गंभीर खतरा बन जाता। उन्होंने इस कार्रवाई को किसी क्षेत्रीय राजनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता से जुड़ा कदम करार दिया।
ट्रंप की यूरोपीय सहयोगियों पर आलोचना
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस अवसर पर एक बार फिर कुछ यूरोपीय देशों की आलोचना की। उन्होंने कहा, 'हम निराश हुए। हमें किसी मदद की जरूरत नहीं थी। हमने पहले ही सप्ताह में उन्हें पूरी तरह कमजोर कर दिया था, लेकिन अच्छा होता अगर हमारे सहयोगी कहते कि हम मदद करना चाहते हैं।' ट्रंप का यह बयान गठबंधन के भीतर समन्वय को लेकर उनकी पुरानी शिकायतों की कड़ी है।
रूटे ने ट्रंप की इस निराशा को आंशिक रूप से स्वीकार किया, लेकिन इसे अलग-थलग घटनाएँ बताया। उन्होंने कहा कि कई यूरोपीय देशों ने द्विपक्षीय समझौतों के ज़रिए अमेरिकी अभियानों को सहयोग दिया। रूटे के अनुसार, अभियान के दौरान 4,000 से 5,000 अमेरिकी विमान यूरोपीय एयरबेस से उड़ान भर चुके थे, जो अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक समर्थन साबित हुआ।
रक्षा खर्च और नाटो प्रतिबद्धता
रूटे ने बताया कि यूरोपीय देशों और कनाडा ने पिछले एक वर्ष में अपने रक्षा खर्च में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अमेरिकी रक्षा कंपनियों से यूरोपीय देशों की खरीद और निवेश के कारण अमेरिका में करीब 2 लाख नौकरियों को समर्थन मिल रहा है। 2035 तक जीडीपी का 5 प्रतिशत रक्षा एवं सुरक्षा पर खर्च करने का लक्ष्य ट्रंप की प्रमुख विदेश नीति उपलब्धियों में से एक बताया गया।
गौरतलब है कि नाटो लगातार यह दोहराता रहा है कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे। रूटे ने वाशिंगटन दौरे के दौरान इस रुख को मजबूती से दोहराया और वेस्ट विंग के बाहर पत्रकारों से बातचीत में भी ट्रंप की नाटो के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
यूक्रेन और अंकारा शिखर सम्मेलन
नाटो महासचिव ने यूक्रेन को समर्थन जारी रखने की भी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि पिछले पाँच से छह महीनों में यूक्रेन की स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई है और इसमें अमेरिकी सहायता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अंकारा शिखर सम्मेलन रक्षा खर्च बढ़ाने, रक्षा उत्पादन क्षमता के विस्तार और यूक्रेन को निरंतर समर्थन देने जैसे अहम मुद्दों पर केंद्रित रहेगा। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिमी गठबंधन के भीतर ईरान नीति और रक्षा खर्च को लेकर मतभेद सतह पर आ रहे हैं।