ट्रंप का नाटो सहयोगियों पर गुस्सा: ईरान के खिलाफ समर्थन की कमी को बताया मूर्खता

Click to start listening
ट्रंप का नाटो सहयोगियों पर गुस्सा: ईरान के खिलाफ समर्थन की कमी को बताया मूर्खता

सारांश

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने नाटो सहयोगियों के ईरान के खिलाफ समर्थन न मिलने पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि सिद्धांत में समर्थन देने वाले देश व्यावहारिक रूप से सहयोग नहीं कर रहे हैं।

Key Takeaways

  • ट्रंप ने नाटो सहयोगियों पर गुस्सा जाहिर किया।
  • ईरान के खिलाफ समर्थन की कमी को उन्होंने मूर्खता बताया।
  • उन्हें अमेरिका की सैन्य कार्रवाई पर गर्व है।
  • यूरोपीय सहयोगियों का समर्थन व्यावहारिक रूप से कमजोर है।
  • आयरलैंड के प्रधानमंत्री ने कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया।

वॉशिंगटन, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में यूरोपीय सहयोगियों का समर्थन न मिलने पर अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने नाटो की आलोचना करते हुए कहा कि सहयोगी देशों ने कार्रवाई का समर्थन तो किया, लेकिन योगदान देने में पीछे हट गए।

ओवल ऑफिस में आयरलैंड के प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ निर्णायक कदम उठाया और उसे किसी बाहरी सहायता की आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने कहा, “हमें ज्यादा मदद की आवश्यकता नहीं है, बल्कि किसी मदद की आवश्यकता ही नहीं है, लेकिन उन्हें हमारे साथ होना चाहिए था।”

ट्रंप ने कहा कि नाटो देशों ने सिद्धांत रूप से इस कार्रवाई का समर्थन किया, लेकिन व्यावहारिक रूप से कोई सहयोग नहीं दिया। उन्होंने इसे “मूर्खतापूर्ण” करार दिया।

ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई ने ईरान की सैन्य क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना और वायुसेना लगभग खत्म हो चुकी है और उसका रडार सिस्टम भी नष्ट हो गया है।

उन्होंने यह भी दोहराया कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। ट्रंप के अनुसार, “ईरान एक महीने के भीतर परमाणु हथियार बना सकता था और वह एक बड़ा खतरा था।”

इस बीच, रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि ट्रंप यूरोपीय देशों के रवैये से बेहद नाराज़ हैं। उन्होंने कहा, “मैंने उन्हें कभी इतना गुस्से में नहीं देखा।” ग्राहम ने यूरोपीय सहयोगियों पर होरमुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में योगदान न देने का आरोप लगाया।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी क्षेत्र में खतरे को रेखांकित करते हुए कहा कि अमेरिकी ठिकानों पर मिलिशिया हमले हो रहे हैं और ऐसे समूहों को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना जरूरी है।

वहीं, आयरलैंड के प्रधानमंत्री मिशेल मार्टिन ने तनाव कम करने की कोशिश करते हुए अमेरिका और यूरोप के रिश्तों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि “दोनों पक्षों के बीच संबंध बेहद अहम हैं और हमें फिर से संतुलन बनाना होगा।” मार्टिन ने ईरान को खतरा बताते हुए भी कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया।

Point of View

खासकर जब बात ईरान जैसी चुनौतीपूर्ण स्थिति की हो।
NationPress
20/03/2026

Frequently Asked Questions

ट्रंप ने नाटो को क्यों आलोचना की?
ट्रंप ने नाटो सहयोगियों पर ईरान के खिलाफ समर्थन न देने का आरोप लगाया, जिसे उन्होंने मूर्खता करार दिया।
ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई का उद्देश्य क्या था?
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था।
यूरोपीय सहयोगियों की क्या प्रतिक्रिया रही?
रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने बताया कि ट्रंप यूरोपीय देशों के रवैये से नाराज़ हैं।
Nation Press