ट्रंप का दावा: ईरान बड़ी रियायतें दे रहा, मेरी हर माँग मान रहा — सैन्य विकल्प भी तैयार
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 25 जून 2025 को व्हाइट हाउस में कहा कि ईरान अमेरिका के साथ जारी कूटनीतिक वार्ता में बड़ी रियायतें दे रहा है और उनकी हर माँग मान रहा है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि बातचीत विफल हुई तो अमेरिकी सैन्य बल का उपयोग करने से वे नहीं हिचकेंगे।
ट्रंप के बयान: वार्ता और चेतावनी एक साथ
नाटो के महासचिव मार्क रूटे के साथ ओवल ऑफिस में बैठक के दौरान और रिपब्लिकन सांसदों के साथ लंच से पहले ट्रंप ने मीडिया के सामने कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा, "जंग बहुत अच्छी चल रही है। जैसा कि आप जानते हैं, हम जीत रहे हैं। ईरान बहुत बड़ी रियायतें दे रहा है। देखते हैं क्या होता है, लेकिन यह बहुत दमदार रहा है।"
बैठक के बाद ट्रंप ने कहा, "ईरान बहुत अच्छा बर्ताव कर रहा है। वे मेरी हर बात मान रहे हैं और उन्हें मानना ही होगा। नहीं तो, हम वापस जाकर वही करेंगे जो हमें करना है।" यह बयान कूटनीतिक आशावाद और सैन्य दबाव दोनों को एक साथ दर्शाता है।
होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप की कड़ी लाइन
ट्रंप ने किसी भी ऐसे संभावित समझौते को सिरे से नकार दिया जो ईरान को होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाज़ों पर शुल्क वसूलने की अनुमति दे। उन्होंने कहा, "यह मुझे मंजूर नहीं होगा। मैं इसकी इजाज़त नहीं दूंगा।" गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुज़रता है।
नाटो महासचिव का समर्थन
रूटे ने ट्रंप की ईरान नीति का पुरज़ोर समर्थन किया। उन्होंने कहा, "मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि आप ईरान में जो कर रहे हैं, वह कितना ज़रूरी है। ईरान के पास परमाणु क्षमता होना पूरी दुनिया के लिए — खासकर इस इलाके, इज़रायल और यूरोप के लिए — खतरा होगा। यह मुद्दा सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है।" रूटे ने ईरान को अराजकता और आतंकवाद फैलाने वाला देश बताया और कहा कि वह परमाणु क्षमता हासिल करने के बेहद करीब था।
कांग्रेस के युद्ध प्रस्ताव और मिनाब हमले पर ट्रंप की प्रतिक्रिया
अमेरिकी कांग्रेस में ईरान युद्ध प्रस्ताव पर मतदान के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई तेहरान को भ्रमित करने वाला और अनावश्यक संदेश देती है। उनके अनुसार इसका व्यावहारिक महत्व सीमित है, लेकिन ईरान इसे अलग नज़रिए से देख सकता है।
मिनाब के एक स्कूल पर हुए कथित हमले की जाँच के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, "मुझे नहीं पता कि वे कभी उस समस्या का समाधान करेंगे, यह किसकी गलती थी, क्योंकि हर जगह मिसाइलें दागी जा रही थीं।" वहीं, रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि पेंटागन इस जाँच को बेहद गंभीरता से ले रहा है और नतीजे उचित समय पर जारी किए जाएँगे।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता एक नाज़ुक दौर में है और क्षेत्रीय तनाव उच्च बना हुआ है। ट्रंप के बयान से संकेत मिलता है कि वाशिंगटन कूटनीतिक रास्ते को प्राथमिकता दे रहा है, लेकिन सैन्य दबाव को बातचीत के हथियार के रूप में बनाए रखना चाहता है। आने वाले हफ्तों में वार्ता की दिशा और ईरान की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह कूटनीतिक सफलता बनती है या टकराव की ओर बढ़ती है।