ट्रंप का ऐलान: ईरान से सोमवार को नई वार्ता, खाड़ी देशों की मध्यस्थता से टला सैन्य हमला
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 3 अगस्त 2026 को घोषणा की कि ईरान के साथ औपचारिक वार्ता सोमवार दोपहर से शुरू होगी। यह घोषणा ऐसे समय में आई जब सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर सहित कई खाड़ी देशों ने वाशिंगटन से ईरान पर प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की थी। ट्रंप के अनुसार, प्रस्तावित समझौते की रूपरेखा तैयार कर ली गई है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को तत्काल खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करना शामिल है।
मुख्य घटनाक्रम
जॉइंट बेस एंड्रयूज जाते हुए एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, 'होर्मुज स्ट्रेट को लेकर एक डील हुई है और फिर परमाणु को लेकर एक डील होगी या आप इसे ईरान का परमाणु निरस्त्रीकरण कह सकते हैं।' उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान ने स्वयं अमेरिका से नियोजित हमलों को वापस लेने का अनुरोध किया था।
इससे एक दिन पहले रविवार को ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमला टालने पर सहमति जताई है, क्योंकि तेहरान और कई मध्य-पूर्वी देशों ने इस पर रोक लगाने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा, 'अमेरिका पूरी तरह तैयार तथा हमला करने की स्थिति में है और पूरी ताकत के साथ इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के खिलाफ जाने के लिए तैयार है।'
खाड़ी देशों की भूमिका
अमेरिकी अधिकारी सूत्रों के अनुसार, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद ने शनिवार को फोन पर ट्रंप से बात की और ईरान के खिलाफ प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को लेकर चिंता जताई तथा स्पष्टीकरण माँगा।
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान, कतर, UAE, तुर्किए और अन्य देशों ने भी अमेरिका और ईरान दोनों से तनाव कम करने और आगे किसी सशस्त्र संघर्ष से बचने की अपील की है। यह व्यापक क्षेत्रीय सहमति इस संकट की गंभीरता को रेखांकित करती है।
प्रस्तावित समझौते की रूपरेखा
ट्रंप के अनुसार, प्रस्तावित डील में दो प्रमुख बिंदु हैं — होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत और पूरी तरह खोलना, तथा ईरान के परमाणु खतरे को समाप्त करना। उन्होंने कहा, 'इस अपील के आधार पर, मैं दुनिया के भविष्य के लिए और एक सफल व खुशहाल ईरान के बने रहने के लिए, हमला रोकने पर सहमत हो गया हूँ, बशर्ते हम जल्दी से कोई डील कर सकें।'
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इज़रायल ने कूटनीतिक रास्ता अपनाने के इस फैसले का समर्थन किया है। हालाँकि, गौरतलब है कि ट्रंप ने प्रस्तावित समझौते की विस्तृत टाइमलाइन नहीं बताई, और न ही ईरान या इज़रायल की ओर से इन दावों की आधिकारिक पुष्टि सामने आई है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर है और होर्मुज स्ट्रेट — जिससे दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल आपूर्ति पर निर्भर है — के बंद होने की आशंका वैश्विक ऊर्जा बाजारों को अस्थिर कर रही थी। कूटनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, खाड़ी देशों की सामूहिक अपील असाधारण है और यह दर्शाती है कि क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर सहयोगी देश भी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के प्रति सतर्क थे।
आगे क्या होगा
सोमवार दोपहर से शुरू होने वाली वार्ता की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान परमाणु निरस्त्रीकरण की शर्तों पर कितना लचीलापन दिखाता है। कथित तौर पर समझौते का ढाँचा तो तैयार है, लेकिन विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। यह वार्ता आने वाले हफ्तों में मध्य-पूर्व की भू-राजनीतिक दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।