ट्रंप का नाटो पर फूटा गुस्सा: ईरान अभियान में बड़े सहयोगियों ने नहीं दिया साथ, रूटे ने किया बचाव
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 8 जुलाई 2026 को अंकारा में नाटो शिखर बैठक से पहले कई प्रमुख यूरोपीय सहयोगी देशों पर यह आरोप लगाया कि उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान में समर्थन देने से इनकार कर दिया। ट्रंप ने नाटो महासचिव मार्क रूटे के साथ बातचीत में साफ कहा कि गठबंधन इस 'महत्वपूर्ण परीक्षा' में खरा नहीं उतरा।
ट्रंप की नाराज़गी: किन देशों पर उठाए सवाल
ट्रंप ने बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन और इटली के नेताओं से बात की, लेकिन किसी ने भी उनकी उम्मीद के मुताबिक समर्थन नहीं दिया। उन्होंने कहा, 'मैं नाटो से खुश नहीं हूँ, क्योंकि जब हमें आतंकवाद के सबसे बड़े समर्थक देश ईरान के खिलाफ मदद चाहिए थी, तो उन्होंने हमारी मदद नहीं की।' ट्रंप ने स्पेन को लेकर भी तीखी टिप्पणी की और उसे 'एक बेकार मामला' करार दिया — हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने स्पेन से संपर्क नहीं किया था।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका को वास्तव में सैन्य सहायता की आवश्यकता नहीं थी, बल्कि उन्होंने जानबूझकर यह देखना चाहा कि सहयोगी देश किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं। उनके अनुसार केवल नाटो के कुछ छोटे सदस्य देशों ने समर्थन की इच्छा दिखाई।
रूटे का पलटवार: 5,000 उड़ानों का दिया हवाला
नाटो महासचिव मार्क रूटे ने गठबंधन का बचाव करते हुए कहा कि यूरोपीय सहयोगियों ने अमेरिकी अभियान में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। रूटे के अनुसार, 'एपिक फ्यूरी' अभियान के समर्थन में यूरोपीय हवाई अड्डों से 5,000 विमान उड़ान भर चुके थे। उन्होंने कहा कि जर्मनी, फ्रांस और कई अन्य देशों ने सैन्य ठिकानों तक पहुँच और अन्य आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराईं।
यह ऐसे समय में आया है जब नाटो पहले से ही रक्षा खर्च के मुद्दे पर ट्रंप के दबाव में है। गौरतलब है कि ट्रंप अपने पहले कार्यकाल से ही नाटो सदस्यों पर 'उचित हिस्सेदारी' न देने का आरोप लगाते रहे हैं।
ट्रंप की आंशिक स्वीकृति
ट्रंप ने अंततः माना कि कुछ हद तक सहायता मिली थी, लेकिन उनका कहना था कि बड़े यूरोपीय सहयोगी देशों ने उनकी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा। ट्रंप और रूटे के बयानों के बीच यह विरोधाभास स्पष्ट रूप से उजागर करता है कि नाटो के भीतर 'सहयोग' की परिभाषा को लेकर गहरे मतभेद बने हुए हैं।
आगे क्या
अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान नीति और गठबंधन के भीतर जिम्मेदारी-साझाकरण के मुद्दे केंद्र में रहने की संभावना है। ट्रंप की इस सार्वजनिक नाराज़गी से यह बैठक कूटनीतिक रूप से और अधिक जटिल हो गई है।