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नाटो शिखर सम्मेलन में ट्रंप का विस्फोट: इटली, जर्मनी, फ्रांस ने ईरान अभियान में साथ छोड़ा

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नाटो शिखर सम्मेलन में ट्रंप का विस्फोट: इटली, जर्मनी, फ्रांस ने ईरान अभियान में साथ छोड़ा

सारांश

अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने इटली, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन पर ईरान अभियान में साथ न देने का आरोप लगाया। खरबों डॉलर खर्च करने के बावजूद सहयोगियों की 'ना' ने गठबंधन की बुनियाद पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्य बातें

डोनाल्ड ट्रंप ने 7 जुलाई 2026 को अंकारा नाटो शिखर सम्मेलन में यूरोपीय सहयोगियों पर कड़ी आलोचना की।
इटली , जर्मनी , फ्रांस और ब्रिटेन ने ईरान में अमेरिकी सैन्य अभियान के दौरान समर्थन देने से इनकार किया।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने नाटो सहयोगियों की सुरक्षा पर खरबों डॉलर खर्च किए, फिर भी जरूरत पर साथ नहीं मिला।
नाटो और यूरोप में अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटाने की संभावना से इनकार नहीं किया — कहा, "देखते हैं।" तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन की तारीफ की; कहा — उनकी वजह से ही शिखर सम्मेलन में आए।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 7 जुलाई 2026 को अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान अपने यूरोपीय सहयोगियों पर कड़ा हमला बोला। ट्रंप ने आरोप लगाया कि इटली, जर्मनी और फ्रांस सहित कई नाटो सदस्य देशों ने ईरान में अमेरिकी सैन्य अभियान के दौरान समर्थन देने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जरूरत पड़ी तो सहयोगी देश अमेरिका के साथ क्यों नहीं खड़े हुए, जबकि अमेरिका ने दशकों तक उनकी सुरक्षा पर खरबों डॉलर खर्च किए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के साथ द्विपक्षीय बैठक से ठीक पहले ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में नाटो की एकजुटता पर गहरी नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा, "मैं नाटो से बहुत निराश हुआ।" नाटो और यूरोप में अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटाने की संभावना पर पूछे गए सवाल के जवाब में ट्रंप का जवाब था — "देखते हैं।"

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उन्होंने ईरान अभियान के दौरान सहयोगियों से मदद नहीं माँगी थी, लेकिन उससे पहले ही कई देशों ने घोषणा कर दी कि वे अमेरिका के साथ नहीं होंगे। उन्होंने कहा, "हमारे साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया गया।"

सहयोगियों पर सीधा आरोप

ट्रंप ने नाम लेकर कहा कि इटली, जर्मनी और फ्रांस — तीनों ने अमेरिकी अभियान में साथ देने से मना किया। उन्होंने यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) का भी विशेष उल्लेख किया और कहा कि वहाँ से भी अपेक्षित समर्थन नहीं मिला।

ट्रंप ने तर्क दिया, "हम हमेशा उनके साथ खड़े रहे हैं। अगर जरूरत पड़ने पर वे हमारे साथ नहीं हैं, तो हम उन पर सैकड़ों अरब डॉलर क्यों खर्च करें?" यह बयान नाटो के भीतर जिम्मेदारी-बँटवारे को लेकर ट्रंप की पुरानी शिकायत का सबसे तीखा सार्वजनिक विस्फोट माना जा रहा है।

तुर्की की तारीफ, यूरोप की आलोचना

यूरोपीय सहयोगियों की आलोचना के बीच ट्रंप ने तुर्की और राष्ट्रपति एर्दोगन की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि यदि यह सम्मेलन तुर्की में नहीं होता और एर्दोगन जैसा "मजबूत और प्रभावशाली नेता" मेज़बान नहीं होता, तो वे शायद इस शिखर सम्मेलन में शामिल ही नहीं होते।

यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब नाटो के भीतर अमेरिका-यूरोप संबंध पहले से ही रक्षा खर्च और रणनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर तनावपूर्ण हैं। गौरतलब है कि ट्रंप के पहले कार्यकाल से ही नाटो के भीतर बोझ-बँटवारे का मुद्दा विवाद का केंद्र रहा है।

नाटो एकजुटता पर असर

आलोचकों का कहना है कि ट्रंप के इस बयान से नाटो की सामूहिक रक्षा की अवधारणा — विशेषकर अनुच्छेद 5 की विश्वसनीयता — पर सवालिया निशान लग सकता है। यूरोपीय देशों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कूटनीतिक हलकों में इस बयान को गठबंधन के लिए गंभीर झटके के रूप में देखा जा रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब यूरोपीय देश अपने रक्षा बजट बढ़ाने के दबाव में हैं और नाटो सदस्यों से GDP का 2% रक्षा पर खर्च करने की माँग जोर पकड़ रही है। आगे के घटनाक्रम पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नाटो की सामूहिक रक्षा की अवधारणा — अनुच्छेद 5 — की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार है। जब अमेरिका का राष्ट्रपति खुद सार्वजनिक मंच पर कहे कि सहयोगी जरूरत पर साथ नहीं देते, तो यह संदेश केवल यूरोप को नहीं, रूस और चीन को भी जाता है। विडंबना यह है कि ट्रंप ने जिस तुर्की की तारीफ की, वह नाटो का वही सदस्य है जो रूसी हथियार प्रणाली S-400 खरीदने के कारण वर्षों से पश्चिमी आलोचना झेल रहा है। गठबंधन के भीतर यह दरार यदि सार्वजनिक बयानबाज़ी से आगे नीति में तब्दील हुई, तो यूरोपीय सुरक्षा ढाँचे के लिए परिणाम दूरगामी होंगे।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नाटो शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने क्या आरोप लगाए?
ट्रंप ने आरोप लगाया कि इटली, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने ईरान में अमेरिकी सैन्य अभियान के दौरान समर्थन देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने नाटो सहयोगियों की सुरक्षा पर खरबों डॉलर खर्च किए, लेकिन जरूरत पड़ने पर वे साथ नहीं आए।
ट्रंप ने नाटो शिखर सम्मेलन में भाग क्यों लिया?
ट्रंप ने स्वयं कहा कि यदि यह सम्मेलन तुर्की में नहीं होता और राष्ट्रपति एर्दोगन मेज़बान नहीं होते, तो वे शायद शामिल नहीं होते। उन्होंने एर्दोगन को 'मजबूत और प्रभावशाली नेता' बताया।
क्या ट्रंप नाटो से अमेरिकी सैनिक हटा सकते हैं?
इस सवाल पर ट्रंप ने 'देखते हैं' कहकर सीधा जवाब देने से परहेज़ किया, जिसे कूटनीतिक हलकों में एक स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
नाटो एकजुटता पर इस विवाद का क्या असर होगा?
आलोचकों का कहना है कि ट्रंप के इस बयान से नाटो के अनुच्छेद 5 — जो सामूहिक रक्षा की गारंटी देता है — की विश्वसनीयता कमज़ोर हो सकती है। यूरोपीय देशों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
ट्रंप और एर्दोगन की बैठक में क्या हुआ?
अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। ट्रंप ने एर्दोगन की भूमिका की प्रशंसा की, हालाँकि बैठक के विस्तृत नतीजे सार्वजनिक नहीं किए गए।
राष्ट्र प्रेस
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