10 अगस्त 2026
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ट्रंप का नाटो सहयोगियों पर बड़ा आरोप: ईरान संघर्ष में इटली, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी ने किया निराश

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ट्रंप का नाटो सहयोगियों पर बड़ा आरोप: ईरान संघर्ष में इटली, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी ने किया निराश

सारांश

ईरान संघर्ष के बाद ट्रंप ने नाटो के सामने खुलकर असंतोष जताया — इटली, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस को नाम लेकर घेरा। उन्होंने कहा: पैसा नहीं, वफादारी चाहिए। अंकारा समिट से ठीक पहले यह बयान गठबंधन की एकता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 25 जून 2026 को व्हाइट हाउस में नाटो महासचिव मार्क रूटे से मुलाकात में ईरान संघर्ष के दौरान इटली, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस पर निराशा जताई।
ट्रंप ने कहा उन्हें सैन्य मदद नहीं, सिर्फ वफादारी चाहिए थी — 'हमारे पास दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है।' रूटे ने बताया कि यूरोपीय एयर बेस से 4,000 से 5,000 अमेरिकी विमानों ने उड़ान भरी — लॉजिस्टिक समर्थन दिया गया था।
ट्रंप ने नाटो सदस्यों पर GDP का 5 फीसदी रक्षा खर्च करने की प्रतिबद्धता पूरी न करने पर दबाव बनाया।
ईरान के साथ बातचीत जारी; ट्रंप ने होर्मुज़ स्ट्रेट पर शिपिंग शुल्क लगाने की किसी भी संभावना को सिरे से नकारा।
नाटो समिट 7-8 जुलाई को अंकारा में; रक्षा खर्च, यूक्रेन और ईरान नीति पर केंद्रित रहेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 25 जून 2026 को व्हाइट हाउस में नाटो महासचिव मार्क रूटे के साथ बैठक के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि ईरान के साथ हालिया सैन्य संघर्ष में इटली, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस सहित कई नाटो सहयोगी अमेरिका की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे। ट्रंप ने ज़ोर देकर कहा कि उन्हें सैन्य सहायता नहीं, बल्कि अपने साझेदारों से वफादारी की दरकार थी — और वह भी नहीं मिली।

मुख्य घटनाक्रम

अंकारा में 7-8 जुलाई को होने वाले नाटो समिट से पहले यह बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ट्रंप ने कहा, 'हमें निराश किया गया। हमें इस मामले में बिल्कुल भी मदद की जरूरत नहीं थी। हमने उन्हें पहले हफ्ते में ही हरा दिया, लेकिन अच्छा होता अगर उन्होंने कहा होता — हम मदद करना चाहेंगे।' उन्होंने नाम लेते हुए कहा कि वे इटली, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस से निराश थे।

रूटे ने आंशिक रूप से ट्रंप की बात स्वीकार की, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि यूरोपीय देशों ने द्विपक्षीय व्यवस्थाओं के ज़रिए लॉजिस्टिक समर्थन दिया था। उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि अमेरिका के लिए यूरोप को पावर प्रोजेक्शन प्लेटफॉर्म के तौर पर इस्तेमाल किए बिना ईरान पर हमला करना बहुत मुश्किल होता।' रूटे ने बताया कि संघर्ष के दौरान यूरोपीय एयर बेस से 4,000 से 5,000 अमेरिकी विमानों ने उड़ान भरी।

रक्षा खर्च पर ट्रंप का दबाव

ट्रंप ने नाटो सदस्यों पर रक्षा खर्च बढ़ाने के लिए भी दबाव बनाया। उन्होंने कहा, 'बड़ा सवाल यह है कि क्या वे 5 फीसदी दे रहे हैं? वे छह महीने पहले 5 फीसदी देने पर सहमत हुए थे और ज्यादातर वे दे नहीं रहे हैं।' रूटे ने इसके जवाब में कहा कि जर्मनी, पोलैंड, डेनमार्क और बाल्टिक देश रक्षा बजट में तेज़ी से बढ़ोतरी कर रहे हैं, और इस प्रगति का श्रेय उन्होंने ट्रंप के नेतृत्व को दिया।

गौरतलब है कि अंकारा नाटो समिट में पिछले साल हुए उस समझौते को लागू करने पर ध्यान केंद्रित रहने की उम्मीद है, जिसके तहत सहयोगी देश 2035 तक GDP का 5 फीसदी रक्षा और सुरक्षा पर खर्च करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

ईरान वार्ता और होर्मुज़ स्ट्रेट

ट्रंप ने बताया कि तेहरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा, 'ईरान के साथ हमारी बातचीत बहुत अच्छी चल रही है।' उन्होंने यह भी कहा कि ईरान बड़ी रियायतें देने को तैयार है। हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि क्या वे ईरान को होर्मुज़ स्ट्रेट पर शिपिंग शुल्क लगाने की अनुमति देंगे, तो उन्होंने स्पष्ट इनकार कर दिया — 'यह मुझे मंजूर नहीं होगा, मैं इसकी इजाजत नहीं दूंगा।'

रूटे ने ईरान संकट से निपटने के ट्रंप के तरीके की सराहना करते हुए कहा, 'ईरान के पास परमाणु क्षमता होना पूरी दुनिया के लिए खतरा होगा।' नाटो नेताओं ने भी यह स्थिति दोहराई है कि ईरान को कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे।

तुर्किए और एफ-35 विमान

अंकारा समिट से पहले ट्रंप ने तुर्किए के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन के बारे में गर्मजोशी से बात की। उन्होंने कहा, 'वह मेरे दोस्त हैं। वह तुर्किए से प्यार करते हैं और बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।' तुर्किए की लंबे समय से लंबित एफ-35 फाइटर जेट की माँग पर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि सरकार यह समीक्षा कर रही है कि क्या सभी कानूनी शर्तें पूरी हुई हैं और अमेरिकी कानून का पालन किया गया है।

यूक्रेन और आगे की राह

यूक्रेन के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की तारीफ करते हुए उन्हें साहसी नेता बताया और कहा कि वे मजबूती से डटे हुए हैं। 7-8 जुलाई को अंकारा में होने वाले नाटो समिट में रक्षा खर्च, यूक्रेन समर्थन और ईरान नीति — तीनों मुद्दों पर गहन विमर्श अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ 'वफादारी' सामूहिक सुरक्षा की जगह ले रही है। विरोधाभास यह है कि रूटे ने खुद माना कि यूरोपीय एयर बेस के बिना ईरान पर हमला संभव नहीं होता — यानी सहयोग हुआ, बस ट्रंप की शर्तों पर नहीं। अंकारा समिट से पहले इस सार्वजनिक झिड़की का असर गठबंधन की आंतरिक एकता पर पड़ सकता है, खासकर तब जब यूक्रेन युद्ध और ईरान वार्ता एक साथ चल रहे हों। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है वह यह है कि ट्रंप का '5 फीसदी GDP' का दबाव और 'वफादारी' की माँग — दोनों मिलकर नाटो को एक लेन-देन वाले रिश्ते में तब्दील कर रहे हैं, जो गठबंधन की मूल भावना से मेल नहीं खाता।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने नाटो सहयोगियों पर क्या आरोप लगाया?
ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ हालिया सैन्य संघर्ष के दौरान इटली, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस सहित अधिकांश नाटो सहयोगियों ने अमेरिका को निराश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें सैन्य मदद नहीं, बल्कि अपने साझेदारों से वफादारी की उम्मीद थी।
नाटो महासचिव मार्क रूटे ने ट्रंप के आरोपों का क्या जवाब दिया?
रूटे ने आंशिक रूप से निराशा की बात स्वीकार की, लेकिन कहा कि यूरोपीय देशों ने द्विपक्षीय व्यवस्थाओं के ज़रिए लॉजिस्टिक समर्थन दिया। उन्होंने बताया कि यूरोपीय एयर बेस से 4,000 से 5,000 अमेरिकी विमानों ने उड़ान भरी और इनके बिना ईरान पर हमला बहुत मुश्किल होता।
अंकारा नाटो समिट कब है और इसमें क्या होगा?
नाटो समिट 7-8 जुलाई 2026 को तुर्किए की राजधानी अंकारा में होगा। इसमें 2035 तक GDP का 5 फीसदी रक्षा खर्च करने की प्रतिबद्धता को लागू करना, यूक्रेन को निरंतर समर्थन और ईरान परमाणु नीति पर विमर्श केंद्रित रहने की उम्मीद है।
ट्रंप ने ईरान के साथ होर्मुज़ स्ट्रेट पर क्या कहा?
ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे ईरान को होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने वाले जहाज़ों पर शुल्क लगाने की अनुमति देने वाले किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।
तुर्किए के एफ-35 विमान अनुरोध पर अमेरिका का क्या रुख है?
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिकी सरकार यह समीक्षा कर रही है कि तुर्किए ने एफ-35 की आपूर्ति से जुड़ी सभी कानूनी शर्तें और अमेरिकी कानून का पालन किया है या नहीं। इसे मूलतः कांग्रेस से जुड़ा मामला बताया गया।
राष्ट्र प्रेस
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