30 जुलाई 2026
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टैस्माक भ्रष्टाचार: डीएमके विधायक सेंथिल बालाजी ने सुप्रीम कोर्ट में दी अग्रिम जमानत अर्जी

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टैस्माक भ्रष्टाचार: डीएमके विधायक सेंथिल बालाजी ने सुप्रीम कोर्ट में दी अग्रिम जमानत अर्जी

सारांश

टैस्माक भ्रष्टाचार मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत ठुकराई, तो DMK विधायक सेंथिल बालाजी उसी दिन सुप्रीम कोर्ट पहुँच गए। CJI सूर्य कांत की पीठ ने शुक्रवार को सुनवाई पर सहमति दी। 2021-2025 के बीच TASMAC में कथित गड़बड़ी का यह मामला तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा कर सकता है।

मुख्य बातें

सेंथिल बालाजी ने 30 जुलाई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की।
मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जीके इलांथिरैयन ने DVAC के TASMAC भ्रष्टाचार मामले में अग्रिम जमानत खारिज कर दी।
DVAC ने 28 जुलाई 2026 को बालाजी और अन्य के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की; मामला 2021-2025 के बीच TASMAC में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने CJI सूर्य कांत की पीठ से तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया, जो शुक्रवार के लिए स्वीकृत हुआ।
बालाजी ने आरोपों को राजनीतिक प्रेरणा से दर्ज बताया और करूर भगदड़ विवाद से इसे जोड़ा।

तमिलनाडु के पूर्व बिजली, निषेध एवं आबकारी मंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) विधायक वी. सेंथिल बालाजी ने 30 जुलाई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया, जब मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन (TASMAC) में कथित बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार से जुड़े डीवीएसी (DVAC) मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। यह मामला 2021 से 2025 के बीच TASMAC के कामकाज में कथित अनियमितताओं से संबंधित है, जब बालाजी राज्य में मंत्री पद पर थे।

सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई की माँग

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष बालाजी की विशेष अनुमति याचिका (SLP) को तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। पीठ ने अनुरोध स्वीकार करते हुए मामले को शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई, इस शर्त के साथ कि यदि कोई प्रक्रियागत कमी हो तो उसे पहले दूर किया जाए।

गौरतलब है कि मद्रास उच्च न्यायालय ने गुरुवार को ही अग्रिम जमानत देने से इनकार किया था, जिसके कुछ ही घंटों बाद बालाजी ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया — यह घटनाक्रम मामले की राजनीतिक और कानूनी संवेदनशीलता को रेखांकित करता है।

मद्रास हाई कोर्ट ने क्यों खारिज की जमानत

न्यायमूर्ति जीके इलांथिरैयन की एकल-न्यायाधीश पीठ ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपों की गंभीर प्रकृति को देखते हुए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। पीठ ने अभियोजन पक्ष की इस दलील पर भी ध्यान दिया कि आरोपियों ने कथित तौर पर अपने आधिकारिक पदों का दुरुपयोग कर आपराधिक साजिश रची और सरकारी खजाने को भारी वित्तीय नुकसान पहुँचाया।

एफआईआर में क्या हैं आरोप

28 जुलाई 2026 को DVAC ने बालाजी और कई अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की। इसमें भारतीय दंड संहिता (IPC), भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएँ लगाई गई हैं। आरोपों में आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर और मनी लॉन्ड्रिंग शामिल हैं।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, बालाजी ने छह अन्य लोगों के साथ मिलकर साजिश रची — इनमें निजी व्यक्ति, डिस्टिलरी व ब्रुअरी कंपनियाँ, ट्रांसपोर्ट ठेकेदार, बॉटलिंग कंपनियाँ और कथित रूप से अज्ञात TASMAC अधिकारी शामिल थे। आरोप है कि इस गठजोड़ ने आधिकारिक प्रक्रियाओं में हेरफेर कर सार्वजनिक धन का गबन किया और अवैध धन को वैध बनाया, जिससे राज्य को भारी नुकसान हुआ।

बालाजी की सफाई: राजनीतिक साजिश का आरोप

मद्रास उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत की माँग करते हुए बालाजी ने सभी आरोपों से इनकार किया। उन्होंने तर्क दिया कि एफआईआर अस्पष्ट और सामान्य आरोपों पर आधारित है और इसमें किसी विशेष टेंडर, अनुबंध या लेनदेन का उल्लेख नहीं है जो उन्हें कथित अपराधों से सीधे जोड़ता हो। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह मामला राजनीतिक प्रेरणा से दर्ज किया गया है और करूर भगदड़ विवाद के बाद सत्ताधारी पक्ष की शत्रुता का नतीजा है।

आगे क्या होगा

अब सभी की नज़रें सर्वोच्च न्यायालय की शुक्रवार की सुनवाई पर टिकी हैं। यदि सर्वोच्च न्यायालय अंतरिम राहत देता है तो बालाजी की तत्काल गिरफ्तारी रुक सकती है; अन्यथा DVAC उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ कर सकती है। यह मामला तमिलनाडु की राजनीति में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि बालाजी DMK के प्रमुख चेहरों में से एक माने जाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और उसी पार्टी के एक प्रमुख विधायक पर 2021-2025 के बीच मंत्री रहते हुए सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचाने के गंभीर आरोप हैं। DVAC जैसी राज्य एजेंसी द्वारा दर्ज एफआईआर की विश्वसनीयता तब और बढ़ जाती है जब उच्च न्यायालय स्वयं हिरासत में पूछताछ को ज़रूरी मानता है। बालाजी का 'राजनीतिक साजिश' का तर्क सुनवाई योग्य है, लेकिन इसका परीक्षण साक्ष्य की कसौटी पर होगा — न कि बयानबाज़ी पर।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टैस्माक भ्रष्टाचार मामले में सेंथिल बालाजी पर क्या आरोप हैं?
DVAC ने 28 जुलाई 2026 को दर्ज एफआईआर में बालाजी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 2021-2025 के बीच TASMAC मंत्री रहते हुए आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर और मनी लॉन्ड्रिंग के ज़रिये राज्य के खजाने को भारी नुकसान पहुँचाया। एफआईआर में IPC, भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएँ शामिल हैं।
मद्रास हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत क्यों खारिज की?
न्यायमूर्ति जीके इलांथिरैयन की एकल पीठ ने कहा कि आरोपों की गंभीर प्रकृति को देखते हुए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। अदालत ने अभियोजन पक्ष की इस दलील को भी स्वीकार किया कि आरोपियों ने कथित तौर पर आधिकारिक पदों का दुरुपयोग कर सार्वजनिक धन का गबन किया।
सुप्रीम कोर्ट में बालाजी की याचिका पर कब सुनवाई होगी?
CJI सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने बालाजी की SLP को शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति दी है, बशर्ते प्रक्रियागत कमियाँ दूर कर ली जाएँ। यदि सर्वोच्च न्यायालय अंतरिम राहत देता है तो उनकी तत्काल गिरफ्तारी रुक सकती है।
सेंथिल बालाजी ने आरोपों पर क्या कहा?
बालाजी ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि एफआईआर अस्पष्ट और सामान्य है, जिसमें उन्हें किसी विशेष टेंडर या लेनदेन से जोड़ने का कोई ठोस उल्लेख नहीं है। उन्होंने इसे करूर भगदड़ विवाद के बाद राजनीतिक प्रेरणा से दर्ज मामला बताया।
TASMAC क्या है और यह मामला क्यों अहम है?
TASMAC (तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन) तमिलनाडु सरकार की वह एजेंसी है जो राज्य में शराब की थोक और खुदरा बिक्री का एकाधिकार रखती है। यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि इसमें एक वरिष्ठ DMK मंत्री पर उसी विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप हैं जिसका वे प्रभारी थे, जो सत्तारूढ़ दल के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील स्थिति पैदा करता है।
राष्ट्र प्रेस
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