10 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मद्रास हाई कोर्ट ने सेंथिल बालाजी को ₹35 करोड़ हॉर्स-ट्रेडिंग मामले में सशर्त अग्रिम जमानत दी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मद्रास हाई कोर्ट ने सेंथिल बालाजी को ₹35 करोड़ हॉर्स-ट्रेडिंग मामले में सशर्त अग्रिम जमानत दी

सारांश

मद्रास उच्च न्यायालय ने पूर्व DMK मंत्री सेंथिल बालाजी और उनके भाई को ₹35 करोड़ की कथित हॉर्स-ट्रेडिंग पेशकश मामले में सशर्त अग्रिम जमानत दी — यह कहते हुए कि FIR में सरकार गिराने की साजिश का कोई आरोप नहीं है और हिरासत में पूछताछ अनावश्यक है।

मुख्य बातें

मद्रास हाई कोर्ट ने 10 जुलाई 2026 को पूर्व DMK मंत्री सेंथिल बालाजी और उनके भाई अशोक कुमार को सशर्त अग्रिम जमानत दी।
इलैयाराजा ने आरोप लगाया था कि अध्यक्ष के विरुद्ध प्रस्ताव में वोट देने के लिए उन्हें ₹35 करोड़ की पेशकश की गई।
अदालत ने माना कि सेंथिल बालाजी को मामले में अभी तक आरोपी नहीं बनाया गया है और FIR में सरकार गिराने की साजिश का उल्लेख नहीं।
दोनों को आदेश मिलने के 15 दिनों के भीतर चेन्नई प्रधान सत्र न्यायालय में उपस्थित होना होगा और ₹25,000 का मुचलका देना होगा।
अगले आदेश तक प्रतिदिन सुबह 10:30 बजे व शाम 5:30 बजे त्रिप्लिकेन पुलिस स्टेशन में हाज़िरी अनिवार्य।

मद्रास उच्च न्यायालय ने 10 जुलाई 2026 को कथित हॉर्स-ट्रेडिंग मामले में पूर्व द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) मंत्री सेंथिल बालाजी और उनके भाई अशोक कुमार को सशर्त अग्रिम जमानत देने का आदेश जारी किया। न्यायमूर्ति जीके इलन्थिरैयन की पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) में वर्तमान सरकार को अस्थिर करने का कोई आरोप नहीं है, इसलिए हिरासत में पूछताछ अनावश्यक है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला कृष्णागिरी जिले के उथंगराई विधानसभा क्षेत्र से तमिलगा वेट्री कषगम (TVK) विधायक एन. इलैयाराजा की शिकायत पर आधारित है। विधायक ने चेन्नई पुलिस आयुक्त के समक्ष आरोप लगाया कि कुछ व्यक्तियों ने उन्हें तमिलनाडु विधानसभा में अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करने के लिए ₹35 करोड़ की पेशकश की थी। शिकायत के आधार पर त्रिप्लिकेन पुलिस ने मामला दर्ज किया।

अदालत की प्रमुख टिप्पणियाँ

न्यायमूर्ति इलन्थिरैयन ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि सेंथिल बालाजी को इस मामले में अभी तक आरोपी नहीं बनाया गया है। अदालत ने माना कि FIR में केवल एक विधायक को नकद प्रस्ताव देकर प्रभावित करने का आरोप है — वर्तमान सरकार को गिराने की किसी व्यापक साजिश का उल्लेख नहीं है। इसी आधार पर कोर्ट ने हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता को नकारते हुए अग्रिम जमानत स्वीकार की।

जमानत की शर्तें

उच्च न्यायालय ने दोनों को आदेश की प्रति प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर चेन्नई प्रधान सत्र न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। उन्हें ₹25,000 का निजी मुचलका और समान राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने होंगे। इसके अतिरिक्त, अगले न्यायिक आदेश तक दोनों को प्रतिदिन सुबह 10:30 बजे और शाम 5:30 बजे त्रिप्लिकेन पुलिस स्टेशन में उपस्थिति दर्ज करानी होगी।

अनुपालन की बाध्यताएँ

अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों आरोपी जाँच के दौरान न तो फरार होंगे, न साक्ष्यों से छेड़छाड़ करेंगे और न ही मामले से जुड़े किसी गवाह को प्रभावित करने का प्रयास करेंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि जमानत की किसी शर्त का उल्लंघन होता है, तो निचली अदालत कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह मामला तमिलनाडु की राजनीति में एक संवेदनशील मोड़ पर सामने आया है, जहाँ विधानसभा अध्यक्ष पद को लेकर पहले से तनाव की स्थिति है। अब जाँच एजेंसी को निर्धारित समयसीमा में आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होगी, और यदि आरोप-पत्र दाखिल होता है तो न्यायिक परीक्षण का अगला चरण शुरू होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ₹35 करोड़ की कथित नकद पेशकश का आरोप स्वयं में गंभीर है। यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु विधानसभा में अध्यक्ष पद को लेकर राजनीतिक तनाव चरम पर है। रोज़ाना दो बार पुलिस स्टेशन में हाज़िरी जैसी कड़ी शर्तें यह संकेत देती हैं कि अदालत ने जाँच की गंभीरता को नज़रअंदाज़ नहीं किया। असली सवाल यह है कि जाँच एजेंसी आरोप-पत्र दाखिल करने में कितना समय लेती है और क्या उसमें सेंथिल बालाजी को आरोपी बनाया जाएगा।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेंथिल बालाजी को किस मामले में अग्रिम जमानत मिली है?
मद्रास हाई कोर्ट ने उन्हें कथित हॉर्स-ट्रेडिंग मामले में सशर्त अग्रिम जमानत दी है, जिसमें TVK विधायक एन. इलैयाराजा ने आरोप लगाया था कि उन्हें तमिलनाडु विधानसभा में अध्यक्ष के विरुद्ध प्रस्ताव के पक्ष में वोट देने के लिए ₹35 करोड़ की पेशकश की गई थी।
मद्रास हाई कोर्ट ने जमानत क्यों दी?
न्यायमूर्ति जीके इलन्थिरैयन ने माना कि FIR में वर्तमान सरकार को गिराने की साजिश का कोई आरोप नहीं है और सेंथिल बालाजी को अभी तक मामले में आरोपी भी नहीं बनाया गया है। इसलिए हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं मानी गई।
जमानत की क्या शर्तें हैं?
दोनों आरोपियों को आदेश की प्रति मिलने के 15 दिनों के भीतर चेन्नई प्रधान सत्र न्यायालय में उपस्थित होकर ₹25,000 का मुचलका और दो जमानतदार देने होंगे। इसके अलावा, अगले आदेश तक प्रतिदिन सुबह 10:30 बजे और शाम 5:30 बजे त्रिप्लिकेन पुलिस स्टेशन में हाज़िरी देनी होगी।
क्या सेंथिल बालाजी इस मामले में आरोपी हैं?
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सेंथिल बालाजी को अभी तक इस मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है। FIR में उनका नाम मुख्य आरोपी के रूप में दर्ज नहीं है।
जमानत शर्तें तोड़ने पर क्या होगा?
मद्रास हाई कोर्ट ने आदेश में कहा है कि यदि जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है, तो निचली अदालत कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी, जिसमें जमानत रद्द करना भी शामिल हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 12 महीने पहले