मद्रास हाई कोर्ट ने सेंथिल बालाजी को ₹35 करोड़ हॉर्स-ट्रेडिंग मामले में सशर्त अग्रिम जमानत दी
सारांश
मुख्य बातें
मद्रास उच्च न्यायालय ने 10 जुलाई 2026 को कथित हॉर्स-ट्रेडिंग मामले में पूर्व द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) मंत्री सेंथिल बालाजी और उनके भाई अशोक कुमार को सशर्त अग्रिम जमानत देने का आदेश जारी किया। न्यायमूर्ति जीके इलन्थिरैयन की पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) में वर्तमान सरकार को अस्थिर करने का कोई आरोप नहीं है, इसलिए हिरासत में पूछताछ अनावश्यक है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला कृष्णागिरी जिले के उथंगराई विधानसभा क्षेत्र से तमिलगा वेट्री कषगम (TVK) विधायक एन. इलैयाराजा की शिकायत पर आधारित है। विधायक ने चेन्नई पुलिस आयुक्त के समक्ष आरोप लगाया कि कुछ व्यक्तियों ने उन्हें तमिलनाडु विधानसभा में अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करने के लिए ₹35 करोड़ की पेशकश की थी। शिकायत के आधार पर त्रिप्लिकेन पुलिस ने मामला दर्ज किया।
अदालत की प्रमुख टिप्पणियाँ
न्यायमूर्ति इलन्थिरैयन ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि सेंथिल बालाजी को इस मामले में अभी तक आरोपी नहीं बनाया गया है। अदालत ने माना कि FIR में केवल एक विधायक को नकद प्रस्ताव देकर प्रभावित करने का आरोप है — वर्तमान सरकार को गिराने की किसी व्यापक साजिश का उल्लेख नहीं है। इसी आधार पर कोर्ट ने हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता को नकारते हुए अग्रिम जमानत स्वीकार की।
जमानत की शर्तें
उच्च न्यायालय ने दोनों को आदेश की प्रति प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर चेन्नई प्रधान सत्र न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। उन्हें ₹25,000 का निजी मुचलका और समान राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने होंगे। इसके अतिरिक्त, अगले न्यायिक आदेश तक दोनों को प्रतिदिन सुबह 10:30 बजे और शाम 5:30 बजे त्रिप्लिकेन पुलिस स्टेशन में उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
अनुपालन की बाध्यताएँ
अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों आरोपी जाँच के दौरान न तो फरार होंगे, न साक्ष्यों से छेड़छाड़ करेंगे और न ही मामले से जुड़े किसी गवाह को प्रभावित करने का प्रयास करेंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि जमानत की किसी शर्त का उल्लंघन होता है, तो निचली अदालत कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह मामला तमिलनाडु की राजनीति में एक संवेदनशील मोड़ पर सामने आया है, जहाँ विधानसभा अध्यक्ष पद को लेकर पहले से तनाव की स्थिति है। अब जाँच एजेंसी को निर्धारित समयसीमा में आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होगी, और यदि आरोप-पत्र दाखिल होता है तो न्यायिक परीक्षण का अगला चरण शुरू होगा।