22 जुलाई 2026
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थूथुकुडी अदालत ने डीएमके विधायक मार्कंडेयन की जमानत याचिका खारिज की, पलायमकोट्टई जेल में रहेंगे

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थूथुकुडी अदालत ने डीएमके विधायक मार्कंडेयन की जमानत याचिका खारिज की, पलायमकोट्टई जेल में रहेंगे

सारांश

थूथुकुडी अदालत ने DMK विधायक जीवी मार्कंडेयन की जमानत याचिका खारिज कर दी। CM सी. जोसेफ विजय के खिलाफ कोविलपट्टी की सभा में कथित मानहानिकारक टिप्पणी के आरोप में गिरफ्तार मार्कंडेयन अब 3 अगस्त तक पलायमकोट्टई केंद्रीय कारागार में रहेंगे।

मुख्य बातें

थूथुकुडी की न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने 22 जुलाई 2026 को DMK विधायक जीवी मार्कंडेयन की जमानत याचिका खारिज की।
मार्कंडेयन पर कोविलपट्टी की एक राजनीतिक सभा में मुख्यमंत्री सी.
जोसेफ विजय के विरुद्ध कथित मानहानिकारक टिप्पणी का आरोप है।
गिरफ्तारी के बाद जिला अपराध शाखा ने करीब 11 घंटे तक पूछताछ की।
न्यायिक मजिस्ट्रेट सुमति ने पुलिस हिरासत का अनुरोध अस्वीकार करते हुए 3 अगस्त तक 15 दिनों की न्यायिक हिरासत का आदेश दिया।
विधायक अब पलायमकोट्टई केंद्रीय कारागार में रहेंगे; जिला अपराध शाखा की जाँच जारी है।

थूथुकुडी की न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने 22 जुलाई 2026 को द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के विधायक जीवी मार्कंडेयन की जमानत याचिका खारिज कर दी। विलाथिकुलम से विधायक मार्कंडेयन को कोविलपट्टी में एक राजनीतिक सभा के दौरान तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के विरुद्ध कथित तौर पर मानहानिकारक और भड़काऊ टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। याचिका खारिज होने के साथ ही वे 3 अगस्त तक पलायमकोट्टई केंद्रीय कारागार में न्यायिक हिरासत में रहेंगे।

मामले की पृष्ठभूमि

थूथुकुडी जिला अपराध शाखा ने एक शिकायत के आधार पर यह मामला दर्ज किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मार्कंडेयन ने कोविलपट्टी में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री के बारे में ऐसी टिप्पणियाँ कीं जो मानहानिकारक थीं और सार्वजनिक व्यवस्था को भंग करने में सक्षम थीं। पुलिस के बयान के अनुसार, इन्हीं आधारों पर आपराधिक मामला दर्ज किया गया।

गिरफ्तारी और पूछताछ

मंगलवार सुबह जिला अपराध शाखा ने मार्कंडेयन को गिरफ्तार कर जिला पुलिस कार्यालय ले जाया, जहाँ उनसे करीब 11 घंटे तक गहन पूछताछ की गई। जाँचकर्ताओं ने भाषण की विषयवस्तु, उसे देने की परिस्थितियों और मामले के अन्य पहलुओं पर विस्तार से जानकारी ली। इसके बाद उन्हें थूथुकुडी न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय संख्या 1 के समक्ष पेश किया गया।

न्यायालय का निर्णय

रिमांड सुनवाई के दौरान पुलिस ने आगे की पूछताछ के लिए हिरासत माँगी और तर्क दिया कि जाँच के लिए यह आवश्यक है। हालाँकि, न्यायिक मजिस्ट्रेट सुमति ने पुलिस हिरासत का अनुरोध अस्वीकार कर दिया और मार्कंडेयन को 3 अगस्त तक 15 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इसके बाद उन्हें पुलिस सुरक्षा में पलायमकोट्टई केंद्रीय कारागार स्थानांतरित कर दिया गया।

जमानत याचिका पर सुनवाई

विधायक ने थूथुकुडी न्यायालय में जमानत याचिका दायर कर जाँच लंबित रहने तक रिहाई की माँग की। बुधवार को अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। अभियोजन पक्ष ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि जाँच अभी महत्वपूर्ण चरण में है और जमानत देने से उस पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि मार्कंडेयन जमानत के हकदार हैं और जाँच में पूर्ण सहयोग करेंगे।

आगे क्या होगा

न्यायिक मजिस्ट्रेट सुमति ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत याचिका खारिज कर दी। अब जिला अपराध शाखा मामले की जाँच जारी रखेगी जबकि मार्कंडेयन न्यायिक हिरासत में रहेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में राजनीतिक भाषणों और मानहानि के मामलों को लेकर कानूनी कार्रवाइयों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और अब उसी दल के विधायक पर मानहानि का मामला उसके अपने मुख्यमंत्री की शिकायत पर दर्ज हुआ है। यह प्रश्न उठता है कि राजनीतिक भाषणों में आलोचना और मानहानि के बीच की कानूनी सीमा कहाँ खींची जाए। जाँच का अगला चरण और उच्च न्यायालय में संभावित अपील यह तय करेगी कि यह मामला महज कानूनी प्रक्रिया है या राजनीतिक संदेश।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीएमके विधायक जीवी मार्कंडेयन को किस आरोप में गिरफ्तार किया गया?
मार्कंडेयन को कोविलपट्टी में एक राजनीतिक सभा के दौरान तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के विरुद्ध कथित तौर पर मानहानिकारक और भड़काऊ टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। थूथुकुडी जिला अपराध शाखा ने इस संबंध में शिकायत के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज किया।
थूथुकुडी अदालत ने जमानत याचिका क्यों खारिज की?
अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि जाँच अभी महत्वपूर्ण चरण में है और जमानत देने से उस पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। न्यायिक मजिस्ट्रेट सुमति ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी।
मार्कंडेयन कब तक न्यायिक हिरासत में रहेंगे?
न्यायालय ने उन्हें 3 अगस्त तक 15 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। वे पलायमकोट्टई केंद्रीय कारागार में बंद हैं और जिला अपराध शाखा की जाँच जारी है।
क्या पुलिस को मार्कंडेयन की हिरासत मिली?
नहीं। रिमांड सुनवाई के दौरान पुलिस ने आगे की पूछताछ के लिए हिरासत माँगी थी, लेकिन न्यायिक मजिस्ट्रेट सुमति ने यह अनुरोध अस्वीकार कर दिया और न्यायिक हिरासत का आदेश दिया।
यह मामला तमिलनाडु की राजनीति के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह मामला इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि सत्तारूढ़ DMK के अपने विधायक पर उसी दल के मुख्यमंत्री के विरुद्ध मानहानि का आरोप है। यह राजनीतिक भाषण और कानूनी सीमाओं के बीच की बहस को फिर से सामने लाता है।
राष्ट्र प्रेस
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