मद्रास हाईकोर्ट ने डीएमके विधायक मार्कंडेयन को जमानत दी, सीएम विजय को धमकी मामले में शर्तें लागू
सारांश
मुख्य बातें
मद्रास उच्च न्यायालय ने सोमवार, 3 अगस्त को द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के विलाथिकुलम विधायक जीवी मार्कंडेयन को नियमित जमानत प्रदान कर दी। मार्कंडेयन को 18 जुलाई को कोविलपट्टी में एक पार्टी बैठक के दौरान कथित तौर पर दिए गए उस भड़काऊ बयान के चलते गिरफ्तार किया गया था, जिसमें उन्होंने कथित रूप से कहा था कि DMK विधायक विधानसभा के भीतर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की 'हड्डियाँ तोड़ देंगे'।
न्यायालय का आदेश और शर्तें
न्यायमूर्ति जीके इलांथिरायन ने विधायक की नियमित जमानत याचिका को कुछ महत्वपूर्ण शर्तों के साथ स्वीकार किया। न्यायालय ने मार्कंडेयन से यह अंडरटेकिंग ली कि वे भविष्य में मुख्यमंत्री के विरुद्ध इस प्रकार के बयान नहीं देंगे। इसके अतिरिक्त, उन्हें थूथुकुडी के क्षेत्राधिकार वाले न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष इस आशय का शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया।
न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि मार्कंडेयन प्रतिदिन दो बार जाँच अधिकारी के समक्ष उपस्थित हों। हालाँकि, 5 अगस्त से प्रारंभ होने वाले तमिलनाडु विधानसभा के बजट सत्र के दिनों में उन्हें इस शर्त से छूट दी गई है, क्योंकि उनकी विधायक के रूप में उपस्थिति आवश्यक होगी।
बचाव पक्ष और अभियोजन के तर्क
विधायक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन ने दलील दी कि मार्कंडेयन के कथित शब्द एक राजनीतिक भाषण का हिस्सा थे और इस आधार पर उनकी गिरफ्तारी तथा निरंतर न्यायिक हिरासत उचित नहीं थी।
वहीं, राज्य के सरकारी अभियोजक आर. जॉन सत्यन ने न्यायालय को बताया कि बजट सत्र शीघ्र ही आरंभ होने वाला है। उन्होंने कहा कि यदि विधायक अपने बयानों पर खेद व्यक्त करें तो जमानत अर्जी पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने न्यायिक दंडाधिकारी की संतुष्टि के लिए शपथपत्र की माँग भी की।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 18 जुलाई को कोविलपट्टी स्थित कृष्णन मंदिर के निकट आयोजित DMK बैठक से जुड़ा है। शिकायतकर्ता एस. बालासुब्रमण्यम की शिकायत पर थूथुकुडी जिला अपराध शाखा ने 19 जुलाई को मामला दर्ज किया।
पुलिस ने मार्कंडेयन के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(3), 352 और 353(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया — ये धाराएँ क्रमशः आपराधिक धमकी, शांति भंग के इरादे से जानबूझकर अपमान करने और सार्वजनिक शरारत भड़काने वाले बयानों से संबंधित हैं।
न्यायिक प्रक्रिया का क्रम
मार्कंडेयन ने पहले 20 जुलाई की अपनी न्यायिक रिमांड को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी और रिहाई की माँग की थी। न्यायमूर्ति इलांथिरायन ने 28 जुलाई को उस याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद, थूथुकुडी के सत्र न्यायालय द्वारा जमानत अर्जी खारिज किए जाने पर विधायक ने उच्च न्यायालय में नियमित जमानत याचिका दाखिल की, जिस पर सोमवार को यह राहत मिली।
आगे क्या होगा
मार्कंडेयन को अब 5 अगस्त से शुरू हो रहे बजट सत्र में विधायक के रूप में भाग लेने की अनुमति होगी। हालाँकि, उन पर लगाई गई शर्तें और शपथपत्र की बाध्यता राजनीतिक दलों के भाषणों की सीमाओं पर एक महत्वपूर्ण न्यायिक संकेत देती हैं। इस मामले की आगामी सुनवाई में न्यायालय का रुख तमिलनाडु की राजनीति में विधायकों के भाषण की स्वतंत्रता और जवाबदेही के बीच संतुलन को रेखांकित करेगा।