3 अगस्त 2026
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मद्रास हाईकोर्ट ने डीएमके विधायक मार्कंडेयन को जमानत दी, सीएम विजय को धमकी मामले में शर्तें लागू

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मद्रास हाईकोर्ट ने डीएमके विधायक मार्कंडेयन को जमानत दी, सीएम विजय को धमकी मामले में शर्तें लागू

सारांश

मद्रास उच्च न्यायालय ने DMK विधायक जीवी मार्कंडेयन को जमानत दी — लेकिन शर्तों के साथ। सीएम विजय को कथित धमकी देने के मामले में गिरफ्तार मार्कंडेयन को अब शपथपत्र देना होगा और दैनिक जाँच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होना होगा।

मुख्य बातें

मद्रास उच्च न्यायालय ने 3 अगस्त को DMK विधायक जीवी मार्कंडेयन को नियमित जमानत प्रदान की।
मार्कंडेयन पर आरोप है कि उन्होंने 18 जुलाई को कोविलपट्टी की पार्टी बैठक में सीएम सी.
जोसेफ विजय को कथित तौर पर धमकी दी थी।
न्यायमूर्ति जीके इलांथिरायन ने जमानत के साथ भविष्य में ऐसे बयान न देने की अंडरटेकिंग और थूथुकुडी के दंडाधिकारी के समक्ष शपथपत्र दाखिल करने की शर्त लगाई।
विधायक को प्रतिदिन दो बार जाँच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होना होगा, 5 अगस्त से शुरू बजट सत्र के दिनों को छोड़कर।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(3) , 352 और 353(2) के तहत मामला दर्ज किया है।

मद्रास उच्च न्यायालय ने सोमवार, 3 अगस्त को द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के विलाथिकुलम विधायक जीवी मार्कंडेयन को नियमित जमानत प्रदान कर दी। मार्कंडेयन को 18 जुलाई को कोविलपट्टी में एक पार्टी बैठक के दौरान कथित तौर पर दिए गए उस भड़काऊ बयान के चलते गिरफ्तार किया गया था, जिसमें उन्होंने कथित रूप से कहा था कि DMK विधायक विधानसभा के भीतर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की 'हड्डियाँ तोड़ देंगे'।

न्यायालय का आदेश और शर्तें

न्यायमूर्ति जीके इलांथिरायन ने विधायक की नियमित जमानत याचिका को कुछ महत्वपूर्ण शर्तों के साथ स्वीकार किया। न्यायालय ने मार्कंडेयन से यह अंडरटेकिंग ली कि वे भविष्य में मुख्यमंत्री के विरुद्ध इस प्रकार के बयान नहीं देंगे। इसके अतिरिक्त, उन्हें थूथुकुडी के क्षेत्राधिकार वाले न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष इस आशय का शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया।

न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि मार्कंडेयन प्रतिदिन दो बार जाँच अधिकारी के समक्ष उपस्थित हों। हालाँकि, 5 अगस्त से प्रारंभ होने वाले तमिलनाडु विधानसभा के बजट सत्र के दिनों में उन्हें इस शर्त से छूट दी गई है, क्योंकि उनकी विधायक के रूप में उपस्थिति आवश्यक होगी।

बचाव पक्ष और अभियोजन के तर्क

विधायक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन ने दलील दी कि मार्कंडेयन के कथित शब्द एक राजनीतिक भाषण का हिस्सा थे और इस आधार पर उनकी गिरफ्तारी तथा निरंतर न्यायिक हिरासत उचित नहीं थी।

वहीं, राज्य के सरकारी अभियोजक आर. जॉन सत्यन ने न्यायालय को बताया कि बजट सत्र शीघ्र ही आरंभ होने वाला है। उन्होंने कहा कि यदि विधायक अपने बयानों पर खेद व्यक्त करें तो जमानत अर्जी पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने न्यायिक दंडाधिकारी की संतुष्टि के लिए शपथपत्र की माँग भी की।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 18 जुलाई को कोविलपट्टी स्थित कृष्णन मंदिर के निकट आयोजित DMK बैठक से जुड़ा है। शिकायतकर्ता एस. बालासुब्रमण्यम की शिकायत पर थूथुकुडी जिला अपराध शाखा ने 19 जुलाई को मामला दर्ज किया।

पुलिस ने मार्कंडेयन के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(3), 352 और 353(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया — ये धाराएँ क्रमशः आपराधिक धमकी, शांति भंग के इरादे से जानबूझकर अपमान करने और सार्वजनिक शरारत भड़काने वाले बयानों से संबंधित हैं।

न्यायिक प्रक्रिया का क्रम

मार्कंडेयन ने पहले 20 जुलाई की अपनी न्यायिक रिमांड को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी और रिहाई की माँग की थी। न्यायमूर्ति इलांथिरायन ने 28 जुलाई को उस याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद, थूथुकुडी के सत्र न्यायालय द्वारा जमानत अर्जी खारिज किए जाने पर विधायक ने उच्च न्यायालय में नियमित जमानत याचिका दाखिल की, जिस पर सोमवार को यह राहत मिली।

आगे क्या होगा

मार्कंडेयन को अब 5 अगस्त से शुरू हो रहे बजट सत्र में विधायक के रूप में भाग लेने की अनुमति होगी। हालाँकि, उन पर लगाई गई शर्तें और शपथपत्र की बाध्यता राजनीतिक दलों के भाषणों की सीमाओं पर एक महत्वपूर्ण न्यायिक संकेत देती हैं। इस मामले की आगामी सुनवाई में न्यायालय का रुख तमिलनाडु की राजनीति में विधायकों के भाषण की स्वतंत्रता और जवाबदेही के बीच संतुलन को रेखांकित करेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

DMK विधायक जीवी मार्कंडेयन को किस आरोप में गिरफ्तार किया गया था?
मार्कंडेयन को 18 जुलाई को कोविलपट्टी में एक DMK बैठक में कथित तौर पर दिए गए उस बयान के कारण गिरफ्तार किया गया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि DMK विधायक विधानसभा के भीतर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की 'हड्डियाँ तोड़ देंगे'। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(3), 352 और 353(2) के तहत मामला दर्ज किया।
मद्रास हाईकोर्ट ने जमानत देते समय क्या शर्तें लगाईं?
न्यायमूर्ति जीके इलांथिरायन ने मार्कंडेयन को जमानत देते हुए तीन प्रमुख शर्तें लगाईं — भविष्य में सीएम के विरुद्ध ऐसे बयान न देने की अंडरटेकिंग, थूथुकुडी के क्षेत्राधिकार वाले दंडाधिकारी के समक्ष शपथपत्र दाखिल करना, और प्रतिदिन दो बार जाँच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होना।
क्या मार्कंडेयन 5 अगस्त से शुरू होने वाले बजट सत्र में भाग ले सकेंगे?
हाँ, न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि तमिलनाडु विधानसभा के बजट सत्र के दिनों में मार्कंडेयन को दैनिक उपस्थिति की शर्त से छूट मिलेगी। वे विधायक के रूप में सत्र में भाग ले सकते हैं।
इस मामले में सत्र न्यायालय ने पहले क्या फैसला दिया था?
थूथुकुडी के सत्र न्यायालय ने मार्कंडेयन की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने मद्रास उच्च न्यायालय का रुख किया। इससे पहले उन्होंने 20 जुलाई की न्यायिक रिमांड को भी उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जिस पर 28 जुलाई को आदेश सुरक्षित रखा गया था।
इस मामले में शिकायत किसने और कब दर्ज कराई?
शिकायतकर्ता एस. बालासुब्रमण्यम ने 18 जुलाई की DMK बैठक में मार्कंडेयन के कथित बयान के आधार पर शिकायत दर्ज कराई। थूथुकुडी जिला अपराध शाखा ने 19 जुलाई को यह मामला पंजीकृत किया।
राष्ट्र प्रेस
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