डीएमके विधायक मार्कांदयन की जमानत याचिका पर मद्रास हाईकोर्ट में सुनवाई, सीएम विजय को धमकी का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
मद्रास उच्च न्यायालय मंगलवार, 29 जुलाई 2025 को विलाथिकुलम से द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के विधायक जी.वी. मार्कांदयन की जमानत याचिका पर सुनवाई करेगा। मार्कांदयन को थूथुकुडी जिले में एक जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को कथित तौर पर धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। थूथुकुडी जिला न्यायालय द्वारा उनकी जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद उन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद 18 जुलाई को कोविलपट्टी में आयोजित एक जनसभा से उपजा, जो हालिया विधानसभा चुनाव के बाद मतदाताओं को धन्यवाद देने के लिए बुलाई गई थी। उस सभा में दिए गए मार्कांदयन के भाषण पर आपत्ति जताते हुए थूथुकुडी जिला अपराध शाखा ने मामला दर्ज किया। पुलिस का आरोप है कि विधायक की टिप्पणियाँ मुख्यमंत्री के लिए धमकी के समान थीं और उनसे सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की आशंका थी।
घटनाक्रम के अनुसार, कथित घटना 18 जुलाई को हुई, शिकायत 19 जुलाई की मध्यरात्रि के आसपास दर्ज कराई गई, 20 जुलाई की सुबह एफआईआर दर्ज हुई और उसी दिन बाद में मार्कांदयन को गिरफ्तार कर लिया गया।
बचाव पक्ष के तर्क
न्यायमूर्ति इलान्थिरैयन के समक्ष सुनवाई के दौरान विधायक के वकील ने तर्क दिया कि यह भाषण मुख्यमंत्री द्वारा कथित तौर पर 'विधानसभा के दरवाजे बंद करने' की टिप्पणी के जवाब में दिया गया था। बचाव पक्ष का कहना है कि यह वैध राजनीतिक आलोचना थी — न आपराधिक धमकी, न हिंसा भड़काने का प्रयास।
याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया कि गिरफ्तारी संवैधानिक सुरक्षा उपायों का उल्लंघन है, क्योंकि पुलिस ने उन्हें गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी नहीं दी। बचाव पक्ष के अनुसार, हिरासत में लेने से पहले न कोई प्रारंभिक जाँच हुई और न ही पूछताछ के लिए कोई नोटिस जारी किया गया।
थूथुकुडी कोर्ट के आदेश को चुनौती
बचाव पक्ष ने थूथुकुडी कोर्ट के न्यायिक रिमांड के आदेश को भी चुनौती दी है। उनका तर्क है कि गिरफ्तारी के समय तय कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, इसलिए यह आदेश कानूनी दृष्टि से त्रुटिपूर्ण है।
आगे क्या होगा
पिछली सुनवाई में बहस पूरी नहीं हो सकी थी, जिसके बाद न्यायमूर्ति इलान्थिरैयन ने मामले को स्थगित कर दिया था। अब मंगलवार को शेष दलीलें सुनी जाएंगी। यह प्रकरण ऐसे समय में सामने आया है जब तमिलनाडु में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है। अदालत का फैसला — चाहे जमानत मिले या याचिका खारिज हो — राज्य की राजनीतिक बहस को नई दिशा दे सकता है।