डीएमके विधायक मार्कंडेयन की जमानत याचिका पर बुधवार को तूतीकोरिन अदालत में सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के विरुद्ध कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ्तार द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के विधायक जी.वी. मार्कंडेयन की जमानत याचिका पर बुधवार, 23 जुलाई 2026 को तूतीकोरिन की न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में सुनवाई निर्धारित है। मार्कंडेयन को तूतीकोरिन जिला अपराध शाखा ने मंगलवार को मानहानि के एक मामले में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उन्हें 15 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
गिरफ्तारी और पूछताछ का घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, विधायक मार्कंडेयन को मंगलवार सुबह हिरासत में लेकर जिला पुलिस कार्यालय लाया गया, जहाँ उनसे करीब 11 घंटे तक लगातार पूछताछ की गई। उन पर कोविलपट्टी में आयोजित एक सार्वजनिक सभा के दौरान मुख्यमंत्री के खिलाफ गलत और भड़काऊ बयान देने का आरोप है।
पूछताछ के बाद उन्हें तूतीकोरिन न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-1 की अदालत में पेश किया गया। जाँच एजेंसी ने न्यायिक मजिस्ट्रेट सुमति के समक्ष आगे की पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत की माँग करते हुए याचिका दायर की, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।
न्यायिक हिरासत और जमानत याचिका
मजिस्ट्रेट ने पुलिस हिरासत की माँग अस्वीकार करते हुए मार्कंडेयन को 15 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसके बाद उन्हें पलायमकोट्टई केंद्रीय कारागार में स्थानांतरित कर दिया गया। रिमांड आदेश के तुरंत बाद विधायक ने अदालत में जमानत याचिका दायर की, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए सुनवाई बुधवार के लिए तय की। अदालत की ऑनलाइन कॉज लिस्ट के अनुसार, दिन के दौरान जमानत याचिका पर बहस होने की संभावना है।
राजनीतिक टकराव की पृष्ठभूमि
यह मामला सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) सरकार और विपक्षी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के बीच जारी राजनीतिक खींचतान के बीच आया है, जिससे यह मामला कानूनी से अधिक राजनीतिक महत्व भी रखता है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में हुआ है जब दोनों दलों के बीच वाकयुद्ध पहले से तेज चल रहा है।
DMK का आरोप, सत्तापक्ष का जवाब
विधायक की गिरफ्तारी के बाद DMK ने सरकार पर विपक्षी नेताओं को आपराधिक मामलों में फँसाकर निशाना बनाने का आरोप लगाया है। आलोचकों का कहना है कि इस गिरफ्तारी का समय और तरीका राजनीति से प्रेरित है। वहीं, सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि कानून अपना काम करेगा और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।
आगे क्या होगा
बुधवार को जमानत याचिका पर अदालत का निर्णय मार्कंडेयन की तत्काल कानूनी स्थिति तय करेगा। इस बीच, पुलिस की जाँच जारी रहेगी और मामले का राजनीतिक असर तमिलनाडु की विपक्षी राजनीति पर भी पड़ सकता है।