एआईएडीएमके छोड़ टीवीके में शामिल हुए पूर्व विधायक मुरुगुमारन, नेतृत्व पर धनबल को तरजीह देने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु में विपक्षी दल अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के पूर्व विधायक और संगठन सचिव एन. मुरुगुमारन ने पार्टी नेतृत्व पर ईमानदार कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर धनवान उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने का गंभीर आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने रविवार, 5 अक्टूबर 2026 को धरापुरम में तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) की सदस्यता ग्रहण कर ली। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब 6 अक्टूबर को होने वाले धरापुरम उपचुनाव के लिए प्रचार अभियान अपने अंतिम चरण में है।
मुरुगुमारन का राजनीतिक सफर
कट्टुमन्नारकोइल विधानसभा क्षेत्र से 2011 और 2016 में एआईएडीएमके के टिकट पर जीत दर्ज कर चुके मुरुगुमारन पार्टी के लंबे समय के निष्ठावान नेता माने जाते थे। पार्टी में शामिल होने से पूर्व उन्होंने टीवीके के महासचिव और ग्रामीण विकास एवं जल संसाधन मंत्री एन. आनंद से मुलाकात की।
टिकट वितरण पर नाराज़गी
मुरुगुमारन ने रविवार सुबह इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्हें उनके पूर्व निर्वाचन क्षेत्र कट्टुमन्नारकोइल से प्रत्याशी न बनाए जाने से वे गहरे आहत हैं। उनका कहना था कि नेतृत्व ने उन्हें उक्त क्षेत्र में व्यापक स्तर पर काम करने के लिए प्रेरित किया, लेकिन चुनाव आते-आते उन्हें आरक्षित तिट्टाकुडी निर्वाचन क्षेत्र से नामांकित कर दिया गया। उन्होंने इस फैसले को 'विश्वासघात' करार दिया।
तिट्टाकुडी में मुरुगुमारन को 42,502 मत मिले, जबकि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के उम्मीदवार सीवी गणेशन 63,106 वोट पाकर विजयी रहे। टीवीके के प्रत्याशी राजशेखर 60,477 मत लेकर दूसरे स्थान पर रहे।
नेतृत्व पर गंभीर आरोप
मुरुगुमारन ने अपने इस्तीफे के बयान में एआईएडीएमके नेतृत्व पर स्पष्ट शब्दों में आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर अब पर्याप्त वित्तीय संसाधन रखने वालों को ही राजनीतिक अवसर मिलते हैं। उन्होंने कहा, 'आम मज़दूर, गरीब पृष्ठभूमि के लोग और करोड़ों रुपए न रखने वाले लोग पार्टी के भीतर अवसर पाने में असमर्थ होते जा रहे हैं।' उनके अनुसार यह प्रवृत्ति एआईएडीएमके को तमिलनाडु की राजनीति में तीसरी शक्ति तक सिमित कर सकती है।
गौरतलब है कि यह कोई पहला मौका नहीं है जब एआईएडीएमके के किसी पूर्व मंत्री या पदाधिकारी ने पार्टी पर इस तरह के आरोप लगाए हों। 2026 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद से एआईएडीएमके के कई पूर्व मंत्री और नेता पार्टी छोड़ चुके हैं, और मुरुगुमारन का इस्तीफा इस कड़ी में नवीनतम है।
टीवीके के लिए रणनीतिक लाभ
मुरुगुमारन का धरापुरम उपचुनाव से ठीक पहले टीवीके में शामिल होना पार्टी के लिए एक रणनीतिक संकेत माना जा रहा है। यह कदम दर्शाता है कि विपक्षी एआईएडीएमके के अनुभवी जनाधार वाले नेता टीवीके को एक उभरती हुई ताकत के रूप में देख रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुरुगुमारन जैसे अनुभवी नेताओं का समर्थन टीवीके को तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य में कहाँ तक ले जाता है।