ढाका में रवींद्रनाथ टैगोर की ग्रैफिटी से छेड़छाड़, पुलिस ने महिला समेत चार को हिरासत में लिया
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में नोबेल विजेता कवि रवींद्रनाथ टैगोर की प्रतिष्ठित दीवार कलाकृति (ग्रैफिटी) के साथ 11 अक्टूबर 2026 को छेड़छाड़ की गई। घटना के बाद ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (डीएमपी) ने एक महिला समेत चार लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। यह घटना शारदीय दुर्गा पूजा से ऐन पहले हुई, जिससे त्योहारी मौसम में सांप्रदायिक सौहार्द को लेकर गंभीर चिंताएँ उठ खड़ी हुई हैं।
घटना का विवरण
टैगोर की यह ग्रैफिटी सेगुनबागिचा इलाके में स्थित बांग्लादेश शिल्पकला अकादमी की बाहरी दीवार पर बनी हुई थी। शनिवार को एक महिला ने ब्रश से उस पर काली स्याही पोत दी। सोशल मीडिया पर वायरल हुए कई वीडियो में यह महिला ग्रैफिटी को काली स्याही से ढकती नज़र आई। मौके पर तैनात शाहबाग थाने के एक पुलिसकर्मी ने तत्काल हस्तक्षेप कर उसे रोका और कुछ देर हंगामे के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर वैन से ले जाया।
पुलिस की पुष्टि और जाँच
डीएमपी के रमना डिवीजन के डिप्टी कमिश्नर शेख जाहिदुल इस्लाम ने शनिवार शाम पुष्टि की कि एक महिला समेत चार लोग हिरासत में हैं। उन्होंने कहा, "उनसे फिलहाल डीबी कार्यालय में पूछताछ की जा रही है। जाँच के हित में अभी उनके नाम और पहचान सार्वजनिक नहीं की जा सकती।" इससे पहले शाहबाग पुलिस ने इस मामले में एएनएम अयास — जो राष्ट्र संवाद फोरम के सदस्य सचिव हैं — को हिरासत में लिया था। एक महिला समेत दो अन्य लोगों को भी उसी सिलसिले में पकड़ा गया।
महिला का विवादास्पद बयान
प्रारंभ में मीडिया से बात करते हुए हिरासत में ली गई महिला ने दावा किया कि टैगोर ने ढाका विश्वविद्यालय की स्थापना का विरोध किया था और कथित तौर पर कहा था, 'गरीबों को शिक्षा की क्या ज़रूरत है?' उसने टैगोर को 'बांग्लादेश विरोधी' बताते हुए ग्रैफिटी को नुकसान पहुँचाने को 'विरोध प्रदर्शन' करार दिया। हालाँकि, बाद में उसने अपना बयान बदल लिया और कहा कि वह बुखार से पीड़ित थी और एक नियमित प्रदर्शन में शामिल होने के बहाने वहाँ गई थी।
दुर्गा पूजा से पहले बढ़ी चिंता
यह घटना शारदीय दुर्गा पूजा से ठीक पहले हुई है, जो बांग्लादेश के हिंदू समुदाय का सबसे बड़ा त्योहार है। गौरतलब है कि बांग्लादेश में हाल के वर्षों में अल्पसंख्यक समुदाय की धार्मिक संपत्तियों और सांस्कृतिक प्रतीकों को लेकर तनाव के कई मामले सामने आए हैं। यह ऐसे समय में हुआ है जब बांग्लादेश में सामाजिक सौहार्द बनाए रखना प्रशासन के लिए संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।
आगे की जाँच
पुलिस की डिटेक्टिव ब्रांच (डीबी) अभी यह निर्धारित नहीं कर पाई है कि यह किसी सुनियोजित उकसावे का हिस्सा था या छिटपुट घटना। घटना के दौरान समूह को नारेबाजी करते हुए भी सुना गया, जो संगठित भागीदारी की आशंका को बल देता है। चारों हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ जारी है और मामले की जाँच आगे बढ़ रही है।