9 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दुर्गा पूजा से पहले बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा पर चिंता, अवामी लीग ने BNP सरकार को घेरा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दुर्गा पूजा से पहले बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा पर चिंता, अवामी लीग ने BNP सरकार को घेरा

सारांश

दुर्गा पूजा से पहले बांग्लादेश के हिंदू परिवार त्योहार की सजावट और नए कपड़ों से दूर हैं — डर का माहौल इतना गहरा है। अवामी लीग का आरोप है कि रंगपुर में पूरे परिवार की हत्या के डेढ़ महीने बाद भी 35 साक्ष्यों की एक भी रिपोर्ट नहीं आई, और BNP सरकार के वादे जमीन पर खोखले साबित हो रहे हैं।

मुख्य बातें

अवामी लीग ने 8 अक्टूबर 2026 को बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर BNP सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
रंगपुर में सेवानिवृत्त हिंदू शिक्षक गणपति चक्रवर्ती और उनके पूरे परिवार की हत्या के डेढ़ महीने बाद भी 35 साक्ष्यों की एक भी रिपोर्ट नहीं आई।
पिछले छह महीनों में अल्पसंख्यक समुदाय के कथित तौर पर 44 लोगों की मौत और सैकड़ों मानवाधिकार उल्लंघन दर्ज।
दुर्गा पूजा से पहले बांग्लादेश के मंदिरों में सजावट नहीं, हिंदू बच्चों ने नए कपड़े तक नहीं खरीदे।
अवामी लीग ने जमात-ए-इस्लामी और BNP दोनों पर जाँच की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए।

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से ठीक पहले अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अवामी लीग ने 8 अक्टूबर 2026 को देशभर में अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हिंसा और प्रशासनिक निष्क्रियता पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बीएनपी (BNP) सरकार को कटघरे में खड़ा किया। पार्टी ने पूछा कि जब एक पूरे हिंदू परिवार की हत्या हो सकती है और डेढ़ महीने बाद भी स्पष्ट जवाब नहीं मिलते, तो अल्पसंख्यकों की जान की क्या कीमत रह जाती है।

मंदिरों में सजावट नहीं, बच्चों ने नए कपड़े तक नहीं खरीदे

अवामी लीग के अनुसार, भय और असुरक्षा के इस माहौल में बांग्लादेश के मंदिरों में दुर्गा पूजा की सजावट तक नहीं हो रही है। पार्टी ने बताया कि हिंदू परिवारों के बच्चों ने त्योहार के लिए नए कपड़े तक नहीं खरीदे हैं। एक बुजुर्ग महिला के हवाले से पार्टी ने कहा, 'भगवान ही जानते हैं कि आगे क्या होने वाला है।' पार्टी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसे माहौल में उत्सव की बात करना लोगों को भरोसा देने की बजाय शर्म की बात है।

रंगपुर हत्याकांड: डेढ़ महीने बाद भी रिपोर्ट नदारद

अवामी लीग ने रंगपुर शहर में अगस्त महीने में हुई एक जघन्य हत्या का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिसमें सेवानिवृत्त हिंदू शिक्षक गणपति चक्रवर्ती और उनके पूरे परिवार की हत्या कर दी गई थी। पार्टी ने कहा कि पुलिस के अनुसार यह मामला अब तक लगभग सुलझ जाना चाहिए था, परंतु डेढ़ महीने बाद भी न तो डीएनए जाँच की रिपोर्ट आई है और न ही घटनास्थल से जुटाए गए 35 साक्ष्यों में से किसी की भी रिपोर्ट सामने आई है।

पीड़ित परिवार के रिश्तेदारों ने भी यह मानने से इनकार किया है कि केवल दो लोग परिवार के चार सदस्यों की एक-एक करके गला घोंटकर हत्या कर सकते थे। इलाके के निवासी पुलिस की जाँच पर भरोसा नहीं जता रहे हैं। जिस घर में हत्याएँ हुईं, वहाँ अब पुलिस तैनात है और वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के बिना किसी को भी अंदर जाने की इजाजत नहीं है।

प्रशासन पर भरोसा नहीं, खामोशी ने उठाए सवाल

अवामी लीग के अनुसार, एक स्थानीय हिंदू गृहिणी ने कहा कि उन्हें प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर पूरा भरोसा नहीं है। वहीं एक स्थानीय निवासी ने बताया कि शुरुआत में इलाके में पुलिस और मीडिया की लगातार मौजूदगी थी, लेकिन अब सब चुप हो गए हैं और यही खामोशी सबसे बड़े सवाल खड़े करती है। जिला प्रशासन का कहना है कि सभी जरूरी सुरक्षा उपाय किए जा चुके हैं, लेकिन आलोचकों का कहना है कि जमीनी स्थिति इससे मेल नहीं खाती।

छह महीनों में 44 मौतें, सैकड़ों कथित उल्लंघन

पिछले सप्ताह अवामी लीग ने दावा किया था कि पिछले छह महीनों में अल्पसंख्यक समुदाय के 44 लोगों की मौत, मंदिरों और घरों पर हमले, सैकड़ों कथित मानवाधिकार उल्लंघन तथा रंगपुर हत्याकांड जैसी घटनाओं ने हिंदुओं के बीच भय को और गहरा कर दिया है। पार्टी ने BNP सरकार और विपक्षी जमात-ए-इस्लामी को निशाने पर लेते हुए जाँच की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।

सरकार की परीक्षा: वादों और ज़मीनी हकीकत का फर्क

अवामी लीग ने कहा, 'प्रधानमंत्री तारिक रहमान की नई सरकार के लिए समानता के वादों की असली परीक्षा यह है कि कमजोर और संवेदनशील नागरिकों के साथ जमीन पर क्या हो रहा है। बांग्लादेश के धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यक 2026 में भी अपनी सुरक्षा को लेकर चिंताओं के साथ प्रवेश कर चुके हैं। सरकार बदलने से उनकी आशंकाएँ खत्म नहीं हुई हैं।' गौरतलब है कि बांग्लादेश में पूर्व अंतरिम सरकार के दौरान भी अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाएँ सामने आती रही थीं, और अवामी लीग का आरोप है कि यह स्थिति मौजूदा BNP कार्यकाल में भी जारी है। आने वाले त्योहारी सीजन में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बांग्लादेश सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सत्ता बदलने से हिंदुओं की असुरक्षा खत्म नहीं हुई — यह तथ्य बताता है कि समस्या किसी एक दल की नहीं, बल्कि राज्य-तंत्र की संरचना में है। अवामी लीग की आलोचना वैध है, लेकिन यह भी याद रहे कि उसके अपने शासनकाल में भी अल्पसंख्यकों पर हमले हुए थे। असली सवाल यह है कि बांग्लादेश में जवाबदेही का कोई स्वतंत्र तंत्र क्यों नहीं बन पाया जो सरकार बदलने के बावजूद काम करता रहे।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले हिंदुओं की सुरक्षा पर क्यों सवाल उठ रहे हैं?
अवामी लीग के अनुसार, रंगपुर में एक हिंदू परिवार की हत्या के डेढ़ महीने बाद भी जाँच अधूरी है और 35 साक्ष्यों की कोई रिपोर्ट नहीं आई है। मंदिरों में सजावट नहीं हो रही और बच्चों ने नए कपड़े तक नहीं खरीदे, जो भय के गहरे माहौल को दर्शाता है।
रंगपुर हत्याकांड क्या है और इसमें क्या हुआ था?
अगस्त 2026 में बांग्लादेश के रंगपुर शहर में सेवानिवृत्त हिंदू शिक्षक गणपति चक्रवर्ती और उनके पूरे परिवार के चार सदस्यों की गला घोंटकर हत्या कर दी गई थी। पीड़ित परिवार के रिश्तेदारों का कहना है कि केवल दो लोग इस तरह की चार हत्याएँ नहीं कर सकते, और पुलिस की जाँच पर स्थानीय लोगों को भरोसा नहीं है।
अवामी लीग ने BNP सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
अवामी लीग ने आरोप लगाया है कि BNP सरकार और जमात-ए-इस्लामी के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही। पार्टी ने कहा कि पिछले छह महीनों में 44 अल्पसंख्यकों की कथित मौत और सैकड़ों मानवाधिकार उल्लंघन के बावजूद प्रशासन की प्रतिक्रिया अपर्याप्त रही है।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं की स्थिति कितनी गंभीर है?
अवामी लीग के दावे के अनुसार, पिछले छह महीनों में 44 अल्पसंख्यकों की मौत, मंदिरों और घरों पर हमले तथा सैकड़ों कथित मानवाधिकार उल्लंघन हुए हैं। दुर्गा पूजा जैसे प्रमुख त्योहार के दौरान भी माहौल इतना भयावह है कि लोग उत्सव मनाने की स्थिति में नहीं हैं।
प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार की इस मामले में क्या जिम्मेदारी है?
अवामी लीग ने कहा है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार के लिए समानता के वादों की असली परीक्षा यही है कि कमजोर नागरिकों के साथ जमीन पर क्या हो रहा है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि सरकार बदलने से अल्पसंख्यकों की आशंकाएँ खत्म नहीं हुई हैं और जिला प्रशासन के सुरक्षा दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 दिन पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले