दुर्गा पूजा से पहले बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा पर चिंता, अवामी लीग ने BNP सरकार को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से ठीक पहले अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अवामी लीग ने 8 अक्टूबर 2026 को देशभर में अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हिंसा और प्रशासनिक निष्क्रियता पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बीएनपी (BNP) सरकार को कटघरे में खड़ा किया। पार्टी ने पूछा कि जब एक पूरे हिंदू परिवार की हत्या हो सकती है और डेढ़ महीने बाद भी स्पष्ट जवाब नहीं मिलते, तो अल्पसंख्यकों की जान की क्या कीमत रह जाती है।
मंदिरों में सजावट नहीं, बच्चों ने नए कपड़े तक नहीं खरीदे
अवामी लीग के अनुसार, भय और असुरक्षा के इस माहौल में बांग्लादेश के मंदिरों में दुर्गा पूजा की सजावट तक नहीं हो रही है। पार्टी ने बताया कि हिंदू परिवारों के बच्चों ने त्योहार के लिए नए कपड़े तक नहीं खरीदे हैं। एक बुजुर्ग महिला के हवाले से पार्टी ने कहा, 'भगवान ही जानते हैं कि आगे क्या होने वाला है।' पार्टी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसे माहौल में उत्सव की बात करना लोगों को भरोसा देने की बजाय शर्म की बात है।
रंगपुर हत्याकांड: डेढ़ महीने बाद भी रिपोर्ट नदारद
अवामी लीग ने रंगपुर शहर में अगस्त महीने में हुई एक जघन्य हत्या का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिसमें सेवानिवृत्त हिंदू शिक्षक गणपति चक्रवर्ती और उनके पूरे परिवार की हत्या कर दी गई थी। पार्टी ने कहा कि पुलिस के अनुसार यह मामला अब तक लगभग सुलझ जाना चाहिए था, परंतु डेढ़ महीने बाद भी न तो डीएनए जाँच की रिपोर्ट आई है और न ही घटनास्थल से जुटाए गए 35 साक्ष्यों में से किसी की भी रिपोर्ट सामने आई है।
पीड़ित परिवार के रिश्तेदारों ने भी यह मानने से इनकार किया है कि केवल दो लोग परिवार के चार सदस्यों की एक-एक करके गला घोंटकर हत्या कर सकते थे। इलाके के निवासी पुलिस की जाँच पर भरोसा नहीं जता रहे हैं। जिस घर में हत्याएँ हुईं, वहाँ अब पुलिस तैनात है और वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के बिना किसी को भी अंदर जाने की इजाजत नहीं है।
प्रशासन पर भरोसा नहीं, खामोशी ने उठाए सवाल
अवामी लीग के अनुसार, एक स्थानीय हिंदू गृहिणी ने कहा कि उन्हें प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर पूरा भरोसा नहीं है। वहीं एक स्थानीय निवासी ने बताया कि शुरुआत में इलाके में पुलिस और मीडिया की लगातार मौजूदगी थी, लेकिन अब सब चुप हो गए हैं और यही खामोशी सबसे बड़े सवाल खड़े करती है। जिला प्रशासन का कहना है कि सभी जरूरी सुरक्षा उपाय किए जा चुके हैं, लेकिन आलोचकों का कहना है कि जमीनी स्थिति इससे मेल नहीं खाती।
छह महीनों में 44 मौतें, सैकड़ों कथित उल्लंघन
पिछले सप्ताह अवामी लीग ने दावा किया था कि पिछले छह महीनों में अल्पसंख्यक समुदाय के 44 लोगों की मौत, मंदिरों और घरों पर हमले, सैकड़ों कथित मानवाधिकार उल्लंघन तथा रंगपुर हत्याकांड जैसी घटनाओं ने हिंदुओं के बीच भय को और गहरा कर दिया है। पार्टी ने BNP सरकार और विपक्षी जमात-ए-इस्लामी को निशाने पर लेते हुए जाँच की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
सरकार की परीक्षा: वादों और ज़मीनी हकीकत का फर्क
अवामी लीग ने कहा, 'प्रधानमंत्री तारिक रहमान की नई सरकार के लिए समानता के वादों की असली परीक्षा यह है कि कमजोर और संवेदनशील नागरिकों के साथ जमीन पर क्या हो रहा है। बांग्लादेश के धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यक 2026 में भी अपनी सुरक्षा को लेकर चिंताओं के साथ प्रवेश कर चुके हैं। सरकार बदलने से उनकी आशंकाएँ खत्म नहीं हुई हैं।' गौरतलब है कि बांग्लादेश में पूर्व अंतरिम सरकार के दौरान भी अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाएँ सामने आती रही थीं, और अवामी लीग का आरोप है कि यह स्थिति मौजूदा BNP कार्यकाल में भी जारी है। आने वाले त्योहारी सीजन में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बांग्लादेश सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।