बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले: 2026 की पहली छमाही में 257 घटनाएँ, 44 मौतें; अवामी लीग ने BNP को ठहराया जिम्मेदार
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय, के विरुद्ध हिंसा की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रहीं। अवामी लीग ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा है कि सत्तारूढ़ दल हिंदू परिवारों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने में बुरी तरह विफल रहा है। इस बीच, अल्पसंख्यक अधिकार संगठन बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में देशभर में सांप्रदायिक हिंसा की कम से कम 257 घटनाएँ दर्ज की गईं, जिनमें 44 लोगों की मौत हुई।
भोला जिले में हिंदू परिवार पर बर्बर हमला
अवामी लीग ने भोला जिले के लालमोहन उपजिला में हुई एक घटना का विशेष रूप से उल्लेख किया। पार्टी के अनुसार, भूमि विवाद में अदालत का फैसला पक्ष में आने के बावजूद हिंदू नागरिक गोपाल कृष्ण दास और उनके परिवार पर दिनदहाड़े हमला किया गया। हमलावर घर में घुसे और गोपाल कृष्ण दास तथा उनकी पत्नी अखी रानी दास की बुरी तरह पिटाई की। परिवार की दो बेटियों के साथ भी मारपीट और उत्पीड़न किया गया, जबकि बुजुर्ग पिता को पानी में डुबोकर प्रताड़ित किया गया।
अवामी लीग ने कहा, 'हमलावरों का मकसद केवल जमीन पर कब्जा करना नहीं था।' पार्टी ने दास के घर में हुई तोड़फोड़ और लूटपाट का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा कितनी प्रभावी है।
अवामी लीग का BNP और जमात पर सीधा आरोप
अवामी लीग ने आरोप लगाया कि जब-जब BNP, जमात-ए-इस्लामी और उनसे जुड़े संगठनों का प्रत्यक्ष या परोक्ष प्रभाव रहा है, तब-तब बांग्लादेश के धार्मिक अल्पसंख्यकों को असुरक्षा और हिंसा का सामना करना पड़ा है। पार्टी ने 2001 के चुनाव के बाद अल्पसंख्यकों पर हुए व्यापक हमलों की याद दिलाई और कहा कि हर बड़े राजनीतिक बदलाव के दौरान हिंदू परिवारों को निशाना बनाया गया।
पार्टी ने कहा, 'जब अदालत का फैसला आने के बाद भी कोई परिवार अपनी पुश्तैनी जमीन पर सुरक्षित नहीं रह सकता और महिलाओं के साथ दिनदहाड़े अत्याचार होता है, तो यह कानून के शासन और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की राज्य की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।'
यूनिटी काउंसिल की रिपोर्ट: आँकड़ों की भयावह तस्वीर
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल ने सोमवार को जारी अपनी रिपोर्ट में 2026 की पहली छमाही के दौरान दर्ज घटनाओं का विस्तृत ब्यौरा दिया। रिपोर्ट के अनुसार:
44 लोगों की मौत से जुड़े 40 मामले; महिलाओं के विरुद्ध हिंसा — दुष्कर्म (सामूहिक दुष्कर्म सहित), अपहरण, जबरन वसूली और यातना के 10 मामले तथा 5 अन्य मामले; अल्पसंख्यकों पर हमले, जान से मारने की धमकियाँ और शारीरिक उत्पीड़न के 42 मामले; पूजा स्थलों पर तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी की 62 घटनाएँ; धार्मिक संस्थानों की भूमि पर कब्जे या कब्जे के प्रयास के 15 मामले; घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर हमले, तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी की 47 घटनाएँ; ईशनिंदा के आरोपों में गिरफ्तारी और उत्पीड़न की 9 घटनाएँ; घरों, जमीन और व्यावसायिक संपत्तियों पर जबरन कब्जे के 21 मामले; तथा सांप्रदायिक हिंसा की अन्य 6 घटनाएँ।
ऐतिहासिक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में राजनीतिक परिवर्तन के बाद अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंताएँ व्यक्त की जाती रही हैं। गौरतलब है कि 2001 के चुनाव के बाद हिंदू समुदाय पर हुए हमले आज भी सामूहिक स्मृति में जीवित हैं, और आलोचकों का कहना है कि तब से लेकर अब तक संस्थागत सुरक्षा तंत्र में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। अवामी लीग ने माँग की है कि BNP सरकार तत्काल दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करे और अल्पसंख्यक परिवारों को न्याय दिलाए। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि BNP सरकार इन आरोपों और रिपोर्ट के निष्कर्षों पर क्या प्रतिक्रिया देती है।