बांग्लादेश में अप्रैल-जून 2026: भीड़ हिंसा और राजनीतिक झड़पों में 74 की मौत, 970 घायल
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में अप्रैल से जून 2026 के बीच भीड़ की हिंसा और राजनीतिक संघर्षों में कुल 74 लोगों की मौत हो गई और 970 से अधिक लोग घायल हुए। ढाका स्थित मानवाधिकार संगठन अधिकार की तिमाही रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में 33 मौतें भीड़ के हमलों में हुईं, जबकि 41 लोगों की जान राजनीतिक हिंसा में गई। यह रिपोर्ट देश में कानून-व्यवस्था और न्याय प्रणाली की बिगड़ती स्थिति की गंभीर तस्वीर पेश करती है।
भीड़ हिंसा: कारण और स्वरूप
अधिकार की रिपोर्ट के अनुसार, भीड़ द्वारा मारे गए अधिकांश लोगों पर चोरी या डकैती का संदेह था। कुछ मामलों में हत्याएं गाँवों में होने वाली अनौपचारिक पंचायतों — जिन्हें स्थानीय भाषा में सलिश कहा जाता है — के दौरान हुईं, जबकि कुछ लोगों को धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में भीड़ ने मार डाला। संगठन ने कहा कि यह स्थिति न्याय प्रणाली पर घटते सार्वजनिक भरोसे को दर्शाती है, जिसके चलते लोग खुद कानून हाथ में लेने पर मजबूर हो रहे हैं।
राजनीतिक हिंसा: बीएनपी की अंदरूनी गुटबाजी
रिपोर्ट में बताया गया कि इस तिमाही में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के भीतर आपसी संघर्ष की 57 घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें चार लोगों की मौत और 400 से अधिक लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई। वहीं, नेशनल सिटिज़न पार्टी (एनसीपी) में आंतरिक संघर्ष की दो घटनाएं सामने आईं, जिनमें 16 लोग घायल हुए।
बीएनपी के भीतर विवाद जबरन वसूली, क्षेत्रीय वर्चस्व, खुदाई की मिट्टी की बिक्री, स्थानीय चुनाव टिकट, पार्टी सम्मेलनों और राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर थे। रिपोर्ट के अनुसार, कई घटनाओं में आग्नेयास्त्रों और अन्य घातक हथियारों का भी इस्तेमाल किया गया।
मानवाधिकार संगठन ने आरोप लगाया कि बीएनपी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं पर जबरन वसूली, जमीन कब्जाने, अपहरण, यौन हिंसा, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी कार्यालयों पर हमले, पुलिस के कामकाज में बाधा डालने तथा राजनीतिक विरोधियों पर हमले जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
महिलाओं के खिलाफ अपराध: चिंताजनक आंकड़े
रिपोर्ट में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई गई है। अप्रैल से जून 2026 के दौरान 255 यौन हिंसा पीड़ितों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया, जिनमें 93 महिलाएं और 161 लड़कियां शामिल थीं। संगठन ने कहा कि डीएनए जांच की सीमित सुविधा, मेडिकल रिपोर्ट में देरी, पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा का अभाव तथा अदालतों में लंबित मामलों की भारी संख्या के कारण पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है।
कथित न्यायेतर हत्याएं और जेलों की बदहाली
रिपोर्ट में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा कथित तौर पर तीन न्यायेतर हत्याओं का उल्लेख किया गया है। इनमें एक व्यक्ति की कथित तौर पर डिटेक्टिव ब्रांच की हिरासत में यातना से मौत, एक व्यक्ति की मादक पदार्थ नियंत्रण विभाग की कार्रवाई के दौरान पिटाई से मौत, और एक मछुआरे की वन विभाग की गश्ती टीम द्वारा कथित तौर पर गोली मारकर हत्या शामिल है।
जेलों की स्थिति भी चिंताजनक बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 17 मई तक बांग्लादेश की 75 जेलों में उनकी कुल क्षमता 43,157 के मुकाबले 85,000 से अधिक कैदी बंद थे। इस दौरान बीमारी के कारण 16 कैदियों की मौत हुई। संगठन ने जेलों में भीड़भाड़, अपर्याप्त भोजन और चिकित्सकों की कमी को गंभीर समस्या करार दिया।
पत्रकारों पर हमले और अधिकार की मांगें
रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में पत्रकारों पर हमलों की कई घटनाएं सामने आईं। 17 पत्रकार घायल हुए, पांच के साथ मारपीट की गई, चार पर सीधे हमले हुए और सात को धमकियां दी गईं।
अंत में, मानवाधिकार संगठन अधिकार ने न्यायेतर हत्याओं, हिरासत में यातना और अन्य मानवाधिकार उल्लंघनों की स्वतंत्र जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब बांग्लादेश में राजनीतिक संक्रमण के बीच संस्थागत कमज़ोरियाँ और अधिक उजागर हो रही हैं।