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बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था चरमराई: सांसद रूमीन फरहाना ने संसद में पेश किए चौंकाने वाले आंकड़े

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बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था चरमराई: सांसद रूमीन फरहाना ने संसद में पेश किए चौंकाने वाले आंकड़े

सारांश

बांग्लादेश की सांसद रूमीन फरहाना ने संसद में टीआईबी के आंकड़े पेश कर बीएनपी सरकार को घेरा — मार्च-अप्रैल में 605 हत्याएं, 196 अपहरण और 3,496 दुर्व्यवहार मामले। एमएसएफ की रिपोर्ट भी बताती है कि मई में भीड़ हिंसा से मौतें 21 से बढ़कर 32 हो गईं।

मुख्य बातें

निर्दलीय सांसद रूमीन फरहाना ने 9 जून को संसद में तारिक रहमान की बीएनपी सरकार को कानून-व्यवस्था पर घेरा।
टीआईबी के आंकड़ों के अनुसार मार्च-अप्रैल में 605 हत्याएं , 196 अपहरण और 2,214 चोरी के मामले दर्ज हुए।
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ 3,496 दुर्व्यवहार मामले , जिनमें 78–102 दुष्कर्म और 49–71 बाल दुष्कर्म शामिल।
एमएसएफ की रिपोर्ट के अनुसार मई 2026 में भीड़ हिंसा से मौतें 21 से बढ़कर 32 हो गईं; 53 अज्ञात शव मिले।
दिसंबर 2025 से मई 2026 तक हर महीने मौतों का आंकड़ा बढ़ता रहा।
संसद में गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद की अनुपस्थिति पर सांसद ने तीखा सवाल उठाया।

बांग्लादेश की निर्दलीय सांसद रूमीन फरहाना ने संसद में तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सरकार को कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति पर घेरा और ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बांग्लादेश (टीआईबी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार के पहले सौ दिनों में हत्या, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में खतरनाक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 9 जून को संसद में दिए अपने भाषण में उन्होंने गृह मंत्री की अनुपस्थिति पर भी तीखी टिप्पणी की।

संसद में पेश किए गए आंकड़े

बांग्लादेशी मीडिया संस्था द डेली स्टार के अनुसार, रूमीन फरहाना ने बताया कि अकेले मार्च और अप्रैल में बांग्लादेश में 605 हत्याएं, 294 लूटपाट, 90 लूट और 196 अपहरण की घटनाएं सामने आईं। इसके अलावा 129 घटनाओं में पुलिस पर हमला हुआ और 2,214 चोरी के मामले दर्ज किए गए।

महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इस अवधि में 3,496 दुर्व्यवहार के मामले रिपोर्ट हुए, जिनमें 78 से 102 दुष्कर्म, 30 से 36 सामूहिक दुष्कर्म और 49 से 71 बच्चों के दुष्कर्म के मामले शामिल हैं। उन्होंने कहा, "ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि सिर्फ तीन महीनों में कानून-व्यवस्था की स्थिति कितनी नाजुक और चिंताजनक हो गई है।"

गृह मंत्री की अनुपस्थिति पर तीखा प्रहार

रूमीन फरहाना ने संसद में गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद की खाली कुर्सी की ओर इशारा करते हुए कहा, "उन्हें आज (सोमवार) मौजूद रहना था, लेकिन उनकी कुर्सी खाली है। मैं क्या कर सकती हूं? मुझे उनकी गैरमौजूदगी में बोलना होगा।" उन्होंने यह भी कहा कि अर्थव्यवस्था और कानून-व्यवस्था किसी सरकार की सफलता या असफलता तय करने के मुख्य पैमाने हैं।

मानवाधिकार संगठन की रिपोर्ट में भी गंभीर चेतावनी

इससे पहले पिछले हफ्ते, ढाका के मानवाधिकार सांस्कृतिक फाउंडेशन (एमएसएफ) ने भी देश में नागरिक सुरक्षा, कानून के राज और मानवाधिकार की खराब स्थिति पर गंभीर चिंता जताई थी। स्थानीय मीडिया के अनुसार, एमएसएफ की ताजा रिपोर्ट में बताया गया कि मई में अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 32 लोग मारे गए, जबकि देशभर से 53 अज्ञात शव मिले।

रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम 69 घटनाओं में 71 लोग गंभीर रूप से घायल हुए — जो अप्रैल के मुकाबले काफी अधिक है, जब 21 मौतें और 49 घायल दर्ज हुए थे।

मौतों का बढ़ता सिलसिला

एमएसएफ के आंकड़ों के अनुसार भीड़ की हिंसा में मौतों का क्रम इस प्रकार रहा: दिसंबर 2025 में 10, जनवरी 2026 में 21, फरवरी में 18, मार्च में 19, अप्रैल में 21 और मई में 32। रिपोर्ट में कहा गया, "मई में भीड़ की हिंसा में मारे गए लोगों की संख्या 21 से बढ़कर 32 हो गई, जो लोगों में कानून अपने हाथ में लेने की आदत में साफ बढ़ोतरी दिखाती है।"

मई में दर्ज 32 मौतों में से 14 चोरी के आरोपों में मारे गए, 4 की मौत झगड़े के बाद हुई, जबकि डकैती और दुष्कर्म या यौन उत्पीड़न के आरोपों में दो-दो लोगों की जान गई। यह आंकड़े बांग्लादेश में सामाजिक न्याय और संस्थागत विफलता की गहरी होती खाई की ओर संकेत करते हैं।

आगे क्या होगा

रूमीन फरहाना द्वारा संसद में उठाए गए इन सवालों के बाद अब सरकार पर जवाबदेही का दबाव बढ़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक गृह मंत्रालय ठोस कदम नहीं उठाता और स्वतंत्र जांच तंत्र स्थापित नहीं होता, तब तक बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति और बिगड़ने की आशंका बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस खाली कुर्सी से है जिसकी ओर उन्होंने इशारा किया — जवाबदेही से बचता गृह मंत्रालय। बांग्लादेश में भीड़ न्याय का बढ़ता चलन — जहां चोरी के आरोप में 14 लोग मार डाले गए — यह संकेत है कि संस्थागत विश्वास टूट रहा है, न केवल अपराध बढ़ रहा है। टीआईबी और एमएसएफ जैसे स्वतंत्र संगठनों के आंकड़े और सरकारी दावों के बीच की खाई ही असली संकट है — और मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस अंतर को नजरअंदाज कर देती है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति कितनी खराब है?
टीआईबी के आंकड़ों के अनुसार, बीएनपी सरकार के पहले सौ दिनों में मार्च-अप्रैल में 605 हत्याएं, 196 अपहरण और 3,496 दुर्व्यवहार मामले दर्ज हुए। एमएसएफ की रिपोर्ट बताती है कि मई 2026 में भीड़ हिंसा से मौतें अप्रैल के 21 से बढ़कर 32 हो गईं।
रूमीन फरहाना कौन हैं और उन्होंने क्या कहा?
रूमीन फरहाना बांग्लादेश की निर्दलीय सांसद हैं जिन्होंने 9 जून को संसद में तारिक रहमान की बीएनपी सरकार को कानून-व्यवस्था के आंकड़ों के आधार पर घेरा। उन्होंने गृह मंत्री की अनुपस्थिति पर भी तीखी टिप्पणी की।
बांग्लादेश में भीड़ हिंसा की स्थिति क्या है?
एमएसएफ की रिपोर्ट के अनुसार मई 2026 में भीड़ हिंसा में 32 लोग मारे गए, जिनमें से 14 चोरी के आरोपियों को भीड़ ने मार डाला। यह दिसंबर 2025 की 10 मौतों से लगातार बढ़ता सिलसिला है।
एमएसएफ (मानवाधिकार सांस्कृतिक फाउंडेशन) ने क्या चेतावनी दी है?
ढाका स्थित एमएसएफ ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा कि मई में 53 अज्ञात शव मिले और 69 घटनाओं में 71 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। संगठन ने नागरिक सुरक्षा, कानून के राज और मानवाधिकार की गंभीर रूप से बिगड़ती स्थिति पर चिंता जताई है।
बांग्लादेश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध की स्थिति क्या है?
द डेली स्टार के अनुसार, मार्च-अप्रैल में 3,496 दुर्व्यवहार मामले रिपोर्ट हुए जिनमें 78 से 102 दुष्कर्म, 30 से 36 सामूहिक दुष्कर्म और 49 से 71 बाल दुष्कर्म के मामले शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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