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बांग्लादेश में महिलाओं के खिलाफ हिंसा में वृद्धि, अवामी लीग ने राजनीतिक इच्छाशक्ति का किया जिक्र

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बांग्लादेश में महिलाओं के खिलाफ हिंसा में वृद्धि, अवामी लीग ने राजनीतिक इच्छाशक्ति का किया जिक्र

सारांश

बांग्लादेश में हाल के सत्ता परिवर्तन के बावजूद महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा के मामलों में वृद्धि जारी है। अवामी लीग ने स्थिति की गंभीरता को लेकर चिंता जताई है। क्या यह केवल कानूनों की कमी है?

मुख्य बातें

महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा में बढ़ोतरी हो रही है।
अवामी लीग ने राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी की ओर इशारा किया है।
कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है।
स्थानीय पंचायतों का न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप चिंता का विषय है।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

ढाका, 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश में हाल ही में सत्ता परिवर्तन हुआ है, लेकिन देश की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। अवामी लीग ने सोमवार को विभिन्न आलोचकों के हवाले से बताया कि कड़े कानून होने के बावजूद स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं दिखाई दे रहा है।

पार्टी के अनुसार, फरवरी 2026 तक के 13 महीनों में बलात्कार के कुल 776 मामले सामने आए हैं, जो महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। ये आंकड़े उन सरकारी आश्वासनों के बावजूद आए हैं, जिनमें महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही गई थी।

आलोचकों ने पूर्व अंतरिम सरकार, जिसका नेतृत्व मुहम्मद यूनुस कर रहे थे, और मौजूदा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी सरकार—दोनों पर इस समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने में विफल रहने का आरोप लगाया है।

अवामी लीग ने बताया कि यूनुस सरकार में शामिल कई सलाहकार पहले गैर-सरकारी संगठनों से जुड़े थे और महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सक्रिय थे। हालांकि, सत्ता में आने के बाद उनके प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके। कानून तो बनाए गए, लेकिन उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक तंत्र कमजोर पड़ गया या निष्क्रिय रहा।

पार्टी ने ‘वन-स्टॉप क्राइसिस सेंटर’ की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। ये केंद्र पहले अवामी लीग सरकार के दौरान महिलाओं की सहायता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे, लेकिन अब इनके प्रभावी ढंग से काम करने में कठिनाइयाँ सामने आ रही हैं।

कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं। जुलाई 2024 के प्रदर्शनों के दौरान पुलिस पर हुए हमलों के बाद जवाबदेही तय न होने को लेकर आलोचना की गई है। आरोप है कि यूनुस प्रशासन ने इस दिशा में न्यायिक कार्रवाई नहीं की, जबकि वर्तमान सरकार ने भी पुलिस का मनोबल बढ़ाने या कानून लागू करने की क्षमता मजबूत करने के लिए सीमित कदम उठाए हैं।

अवामी लीग ने यह भी बताया कि 12 फरवरी के राष्ट्रीय चुनाव से पहले ही सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोगों ने पुलिस और न्यायपालिका में प्रभावशाली पद हासिल कर लिए थे, लेकिन कानून का राज कायम करने में वे प्रभावी साबित नहीं हुए।

पार्टी के अनुसार, देश के कई हिस्सों में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों को औपचारिक न्यायिक प्रक्रिया के बजाय स्थानीय पंचायत या अनौपचारिक मध्यस्थता से निपटाया जा रहा है, जिससे न्यायपालिका और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि कड़े कानूनी प्रावधानों और बढ़ते मामलों के बीच का अंतर इस बात को दर्शाता है कि कानून और उसके क्रियान्वयन में बड़ा अंतर है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस कमी के कारण नर्सिंगदी में एक किशोरी और सीताकुंडा में सात साल की बच्ची से जुड़ी दो दुखद घटनाएं सामने आई हैं।

आलोचकों के अनुसार, यह स्थिति बांग्लादेश में शासन, जवाबदेही और महिलाओं-बच्चों के खिलाफ हिंसा रोकने के लिए आवश्यक राजनीतिक इच्छाशक्ति पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो समाज के सबसे कमजोर वर्गों की सुरक्षा में बाधा डाल रही है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?
महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में वृद्धि के पीछे राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और प्रभावी कानूनों के कमजोर क्रियान्वयन का हाथ है।
अवामी लीग ने इस स्थिति पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
अवामी लीग ने कहा है कि कड़े कानून होने के बावजूद स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हो रहा है और उन्होंने राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी की बात की है।
क्या सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए कोई कदम उठाए हैं?
हालांकि कुछ कानून बनाए गए हैं, लेकिन उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक तंत्र कमजोर पड़ गया है।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानूनों का क्रियान्वयन और राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है।
क्या स्थानीय पंचायतों का न्यायिक प्रक्रिया में स्थान लेना सही है?
स्थानीय पंचायतों का न्यायिक प्रक्रिया में स्थान लेना न्यायपालिका की भूमिका को कमजोर करता है और जवाबदेही में कमी लाता है।
राष्ट्र प्रेस
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