16 अक्टूबर 2026
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बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले मंदिरों पर हमले और मूर्ति-भंजन की 34 घटनाएं, हिंदू संगठनों ने की सुरक्षा की मांग

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बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले मंदिरों पर हमले और मूर्ति-भंजन की 34 घटनाएं, हिंदू संगठनों ने की सुरक्षा की मांग

सारांश

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले मंदिरों पर 34 हमले — और जुलाई-सितंबर 2026 में अल्पसंख्यकों पर 498 कथित घटनाएं। हिंदू संगठनों की माँग: सिर्फ पाँच दिन नहीं, 365 दिन सुरक्षा।

मुख्य बातें

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले मंदिरों पर हमले और मूर्ति-भंजन की 34 घटनाएं दर्ज की गई हैं।
सिलहट, राजबाड़ी, पंचगढ़, टांगाइल, फरीदपुर, सुनामगंज और नाओगांव सहित कई जिले प्रभावित हैं।
बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद और महानगर सर्वजनिन पूजा समिति ने ढाकेश्वरी राष्ट्रीय मंदिर में प्रेस वार्ता कर साल भर सुरक्षा की माँग की।
HRCBM ने जुलाई-सितंबर 2026 के बीच अल्पसंख्यकों पर 498 कथित घटनाओं का ब्योरा जारी किया, जिनमें हत्या, यौन हिंसा और संपत्ति पर हमले शामिल हैं।
रिपोर्टों के अनुसार यह सिलसिला मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के बाद मौजूदा BNP सरकार के कार्यकाल में भी जारी है।

बांग्लादेश में शारदीय दुर्गा पूजा से पहले मंदिरों पर हमले, मूर्तियों को खंडित करने और हिंदू समुदाय के विरुद्ध हिंसा की कुल 34 घटनाएं दर्ज की गई हैं। बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद और महानगर सर्वजनिन पूजा समिति ने 16 अक्टूबर 2026 को यह जानकारी साझा करते हुए अधिकारियों से तत्काल सुरक्षात्मक कदम उठाने की अपील की है। यह घटनाएं सिलहट, राजबाड़ी, पंचगढ़ और टांगाइल सहित कई जिलों में सामने आई हैं।

मुख्य घटनाक्रम

बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद के महासचिव संतोष शर्मा ने गुरुवार को ढाका स्थित ढाकेश्वरी राष्ट्रीय मंदिर परिसर में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, 'इस साल एक उल्लेखनीय बात यह है कि अब तक मूर्तियों को खंडित करने, मंदिरों पर हमले और इस तरह की अन्य घटनाओं के कुल 34 मामले सामने आए हैं।' यह प्रेस वार्ता त्योहार से ठीक पहले आयोजित की गई थी, जो इसकी तात्कालिकता को दर्शाती है।

संगठनों की ओर से जारी बयान के अनुसार, फरीदपुर के एक ऐतिहासिक काली मंदिर में चोरी की घटना हुई, जबकि सुनामगंज में हिंदू समुदाय के लोगों के घरों, दुकानों और मंदिरों पर हमले तथा लूटपाट की सूचना मिली है। इसके अलावा, नाओगांव में हुई एक लूट में कथित तौर पर कुछ लोगों ने खुफिया एजेंसी के अधिकारियों के रूप में अपनी पहचान बताई।

संगठनों की मांगें

दोनों संगठनों ने अधिकारियों से आगे होने वाले हमलों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने और पूरे साल सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। संगठन के नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'पूजा के पाँच दिनों की सुरक्षा पर्याप्त नहीं है। साल के 365 दिन सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।'

नेताओं ने धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को मजबूत करने और सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ सामाजिक प्रतिरोध बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भेदभाव-मुक्त बांग्लादेश के निर्माण के लिए हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के दायरे में लाना अनिवार्य है।

व्यापक पृष्ठभूमि

यह मामला बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों और अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों की बढ़ती घटनाओं के बीच सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, पूर्व अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस के कार्यकाल में शुरू हुआ यह सिलसिला मौजूदा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार के कार्यकाल में भी जारी बताया जा रहा है।

गौरतलब है कि इस सप्ताह की शुरुआत में ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज (HRCBM) ने जुलाई से सितंबर 2026 के बीच देश में धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों को प्रभावित करने वाली 498 कथित घटनाओं का ब्योरा जारी किया था। इनमें हत्या, मारपीट, यौन हिंसा, धार्मिक स्थलों पर हमले और संपत्ति से जुड़े उल्लंघनों के मामले शामिल थे।

HRCBM की अपील

HRCBM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'हर घटना की जांच होनी चाहिए। हर पीड़ित सुरक्षा का हकदार है। दोषियों को दंड से बचने नहीं दिया जाना चाहिए।' संगठन ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

आगे क्या

दोनों हिंदू संगठनों ने उम्मीद जताई है कि दुर्गा पूजा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होगी और सभी समुदाय एकजुट होकर त्योहार मनाएंगे। हालांकि, सुरक्षा की माँग और लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए बांग्लादेशी अधिकारियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है कि वे अल्पसंख्यक समुदायों की रक्षा के लिए ठोस और दीर्घकालिक उपाय करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

यानी औसतन हर दिन पाँच से अधिक। चिंताजनक यह है कि यह सिलसिला सरकार बदलने के बाद भी नहीं थमा, जो बताता है कि समस्या किसी एक राजनीतिक दल की नीति नहीं, बल्कि एक गहरी संस्थागत विफलता है। हिंदू संगठनों की 'साल के 365 दिन सुरक्षा' की माँग दरअसल उस खोखलेपन को उजागर करती है जिसमें त्योहारों पर अस्थायी पुलिस तैनाती को ही 'सुरक्षा' मान लिया जाता है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार निकायों और भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय एजेंडे पर इस मुद्दे का दबाव अब और बढ़ना तय है।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले मंदिरों पर कितने हमले हुए?
बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद के महासचिव संतोष शर्मा के अनुसार, इस साल अब तक मूर्तियों को खंडित करने, मंदिरों पर हमले और हिंसा की अन्य घटनाओं के कुल 34 मामले दर्ज किए गए हैं। ये घटनाएं सिलहट, राजबाड़ी, पंचगढ़ और टांगाइल सहित कई जिलों में हुई हैं।
HRCBM ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर कितनी घटनाओं का ब्योरा दिया?
ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज (HRCBM) ने जुलाई से सितंबर 2026 के बीच अल्पसंख्यकों को प्रभावित करने वाली 498 कथित घटनाओं का ब्योरा जारी किया। इनमें हत्या, मारपीट, यौन हिंसा, धार्मिक स्थलों पर हमले और संपत्ति से जुड़े उल्लंघन शामिल हैं।
बांग्लादेश में हिंदू संगठनों ने क्या मांग की है?
बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद और महानगर सर्वजनिन पूजा समिति ने अधिकारियों से साल के 365 दिन हिंदू समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की है। उन्होंने जोर दिया कि केवल दुर्गा पूजा के पाँच दिनों की सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है और हिंसा के दोषियों को न्याय के दायरे में लाना जरूरी है।
फरीदपुर और सुनामगंज में क्या घटनाएं हुईं?
संगठनों के बयान के अनुसार, फरीदपुर के एक ऐतिहासिक काली मंदिर में चोरी की घटना हुई। सुनामगंज में हिंदू समुदाय के लोगों के घरों, दुकानों और मंदिरों पर हमले तथा लूटपाट की घटनाएं दर्ज की गई हैं।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों की यह स्थिति कब से चली आ रही है?
रिपोर्टों के अनुसार यह सिलसिला पूर्व अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस के कार्यकाल से शुरू हुआ और मौजूदा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार के कार्यकाल में भी जारी है। HRCBM के ताजा आँकड़े इस समस्या की गंभीरता और निरंतरता को रेखांकित करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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