रवि शास्त्री का बड़ा बयान: मोहम्मद शमी को टेस्ट टीम में मौका न मिलना दुखद
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री ने 7 नवंबर 2026 को मोहम्मद शमी को टेस्ट सेटअप से बाहर रखने के चयनकर्ताओं के फैसले पर कड़ी असहमति जताई। शास्त्री ने कहा कि शमी ने बंगाल के लिए घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन कर अपनी फिटनेस और फॉर्म दोनों साबित की है, और उन्हें पिछले 12 महीनों में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी का अवसर दिया जाना चाहिए था।
शास्त्री की निराशा और दलील
सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क पर दूसरे वनडे से पूर्व बोलते हुए शास्त्री ने कहा, 'अगर आप मैच में 10 या 12 ओवर नहीं कर सकते तो जिम में फिट रहने का क्या मतलब है? यहाँ आपके पास एक मेहनती खिलाड़ी है जो आपके लिए गेंदबाज़ी कर रहा है। इसलिए, मैं थोड़ा निराश हूँ कि उन्हें दोबारा मौका नहीं मिला।' पूर्व कोच ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी तेज़ गेंदबाज़ की असली फिटनेस का पैमाना जिम में उसका प्रदर्शन नहीं, बल्कि मैच के दौरान लंबे स्पैल में टिके रहने की क्षमता है।
घरेलू क्रिकेट में शमी का काम का बोझ
शास्त्री ने शमी की फिटनेस को लेकर आई मीडिया रिपोर्टों पर सीधे जवाब देते हुए कहा, 'मैंने उनकी फिटनेस ठीक न होने के बारे में ये सारी प्रेस रिपोर्ट सुनी हैं, लेकिन वह बंगाल के लिए हर मैच खेल रहे थे। वह 15-20 ओवर गेंदबाज़ी कर रहे थे।' उन्होंने सवाल उठाया कि एक खिलाड़ी से फिटनेस साबित करने के लिए इससे बड़े सबूत की आखिर क्या ज़रूरत है।
शास्त्री के अनुसार, शमी का घरेलू काम का बोझ यह प्रमाणित करता है कि वे प्रतिस्पर्धी क्रिकेट की शारीरिक माँगों को भलीभाँति संभाल सकते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कठिन अंतरराष्ट्रीय सत्र में चोटों के बीच एक अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ की उपलब्धता टीम के लिए अमूल्य होती है।
शमी की काबिलियत पर भरोसा
शास्त्री ने शमी की गेंदबाज़ी क्षमता पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा, 'यह दुख की बात है जब देश के लिए इतना अच्छा खेलने वाले को जाना पड़ता है। मुझे पक्का लगा था कि उनमें और 30 या 40 विकेट लेने की काबिलियत थी। उन्हें पिछले 12 महीनों में खेलना चाहिए था और शायद टेस्ट-मैच बॉलर के तौर पर टीम में होना चाहिए था।' यह बयान इस बात का संकेत है कि शास्त्री जैसे अनुभवी दिग्गज भी शमी की अनदेखी को टीम के लिए एक रणनीतिक चूक मानते हैं।
व्यापक संदर्भ: चयन विवाद
गौरतलब है कि मोहम्मद शमी लंबे समय तक चोट से जूझने के बाद घरेलू क्रिकेट में सक्रिय हो चुके हैं। भारत के सबसे सफल टेस्ट तेज़ गेंदबाज़ों में शुमार शमी की वापसी की माँग क्रिकेट जगत में बार-बार उठती रही है। यह पहला मौका नहीं है जब किसी पूर्व दिग्गज ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हों — शास्त्री की टिप्पणी इस बहस को और पुख्ता करती है।
आगे क्या
शास्त्री की इस टिप्पणी के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि चयन समिति आगामी टेस्ट सत्र के लिए शमी की उपलब्धता और फॉर्म को लेकर क्या रुख अपनाती है। विशेषज्ञों की राय में यदि शमी घरेलू क्रिकेट में इसी तरह प्रदर्शन जारी रखते हैं, तो उनकी वापसी की राह और मज़बूत होगी।