7 नवंबर 2026
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मुल्लापेरियार बांध का जलस्तर 123 फीट पर पहुंचा, तमिलनाडु के 5 जिलों के किसानों को राहत

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मुल्लापेरियार बांध का जलस्तर 123 फीट पर पहुंचा, तमिलनाडु के 5 जिलों के किसानों को राहत

सारांश

भारी बारिश के बाद मुल्लापेरियार बांध की आवक तीन गुना बढ़कर 1,782 क्यूसेक हुई और जलस्तर 123 फीट पर पहुंचा। इस साल मानसून की कमज़ोरी से महीनों संकट झेल रहे तमिलनाडु के पाँच जिलों के किसानों के लिए यह अहम राहत है।

मुख्य बातें

मुल्लापेरियार बांध का जलस्तर 7 नवंबर 2026 को 123 फीट पर पहुंचा।
बांध में पानी की आवक 634 क्यूसेक से बढ़कर 1,782 क्यूसेक हो गई।
जलाशय में कुल भंडारण अब 3,163 मिलियन क्यूबिक फीट ।
थेनी, डिंडीगुल, मदुरै, शिवगंगा और रामनाथपुरम — पाँच जिलों के किसानों को राहत।
इस वर्ष पानी छोड़ने में दो महीने से अधिक की देरी हुई; डिस्चार्ज 800 क्यूसेक से घटाकर 400 क्यूसेक करना पड़ा था।
स्थिति अभी भी जलग्रहण क्षेत्रों में केरल की बारिश पर निर्भर।

मुल्लापेरियार बांध का जलस्तर 7 नवंबर 2026 को 123 फीट पर पहुंच गया, जब जलग्रहण क्षेत्रों में रातभर हुई भारी बारिश के बाद बांध में पानी की आवक 634 क्यूसेक से उछलकर 1,782 क्यूसेक हो गई। इससे तमिलनाडु के पाँच दक्षिणी जिलों के उन हज़ारों किसानों को बड़ी राहत मिली है, जो इस साल अपर्याप्त मानसूनी वर्षा के कारण सिंचाई जल की गंभीर किल्लत झेल रहे थे।

मौजूदा जलस्तर और भंडारण स्थिति

अधिकारियों के अनुसार, जलाशय में इस समय 3,163 मिलियन क्यूबिक फीट पानी संग्रहीत है। यह बढ़ोतरी केरल के जलग्रहण क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से जारी लगातार वर्षा का परिणाम है। बेहतर भंडारण से कृषि और पेयजल दोनों आवश्यकताओं की पूर्ति में सुधार की उम्मीद जगी है।

क्यों पड़ी इस राहत की ज़रूरत

मुल्लापेरियार बांध केरल में तमिलनाडु की सीमा के निकट स्थित है और थेनी, डिंडीगुल, मदुरै, शिवगंगा तथा रामनाथपुरम जिलों के लिए जल का प्रमुख स्रोत है। इन जिलों में हज़ारों किसान धान और अन्य फसलों की सिंचाई के लिए बांध से छोड़े गए पानी पर निर्भर रहते हैं।

इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान अपर्याप्त वर्षा ने सामान्य सिंचाई कार्यक्रम को बुरी तरह बाधित किया। पानी मूलतः 1 जून को छोड़ा जाना था, लेकिन जलाशय में पर्याप्त भंडारण न होने के कारण यह 8 अगस्त तक — यानी दो महीने से अधिक — टल गया।

संकट गहराने पर उठाए गए कदम

स्थिति तब और विकट हो गई जब जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश अपेक्षा से काफी कम रही और बांध में आवक लगातार घटती गई। उपलब्ध भंडारण को सुरक्षित रखने के लिए अधिकारियों ने तमिलनाडु को पानी का डिस्चार्ज 800 क्यूसेक से घटाकर 400 क्यूसेक कर दिया, ताकि सिंचाई और पेयजल की न्यूनतम ज़रूरतें पूरी की जा सकें। गौरतलब है कि यह कटौती चल रहे खरीफ कृषि मौसम के बीच हुई, जिससे किसानों की चिंताएँ और बढ़ गई थीं।

आम किसानों पर असर

पाँचों लाभार्थी जिलों के किसान अब आशान्वित हैं कि यदि जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश की रफ्तार बनी रही, तो पर्याप्त जल आपूर्ति बहाल हो सकेगी और खेती में आगे की रुकावट टाली जा सकेगी। यह ऐसे समय में आया है जब धान की फसल के लिए पानी की माँग अपने चरम पर है।

आगे की राह

स्थिति अभी भी जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली बारिश पर निर्भर है। अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे आवक, भंडारण और डिस्चार्ज की प्रक्रिया पर सतत निगरानी रखते हुए कृषि और पेयजल की ज़रूरतों के बीच संतुलन बनाए रखेंगे। यदि मौसम का वर्तमान रुझान जारी रहा, तो जलाशय में भंडारण में और सुधार की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह घटना एक बड़े संरचनात्मक प्रश्न की ओर इशारा करती है — दक्षिण भारत के लाखों किसान अभी भी एकल जलाशयों पर इस कदर निर्भर हैं कि मानसून की थोड़ी सी कमी भी उनके पूरे खेती के मौसम को पटरी से उतार देती है। इस साल दो महीने से अधिक की देरी और डिस्चार्ज में कटौती यह दिखाती है कि जलवायु अनिश्चितता के इस दौर में केवल मानसून-निर्भर जल प्रबंधन पर्याप्त नहीं है। तमिलनाडु और केरल के बीच मुल्लापेरियार को लेकर दशकों पुराना विवाद भी इस भेद्यता को और गहरा करता है।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुल्लापेरियार बांध का जलस्तर अभी कितना है?
7 नवंबर 2026 को मुल्लापेरियार बांध का जलस्तर 123 फीट पर पहुंच गया है। जलाशय में कुल भंडारण 3,163 मिलियन क्यूबिक फीट दर्ज किया गया है।
मुल्लापेरियार बांध से कौन से जिलों को पानी मिलता है?
मुल्लापेरियार बांध तमिलनाडु के थेनी, डिंडीगुल, मदुरै, शिवगंगा और रामनाथपुरम — इन पाँच जिलों के लिए सिंचाई और पेयजल का प्रमुख स्रोत है। इन जिलों में हज़ारों किसान धान व अन्य फसलों की खेती के लिए इसी बांध पर निर्भर हैं।
इस साल पानी छोड़ने में देरी क्यों हुई?
दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान जलग्रहण क्षेत्रों में अपर्याप्त वर्षा के कारण जलाशय में पर्याप्त भंडारण नहीं हो पाया। पानी 1 जून को छोड़ा जाना था, लेकिन यह दो महीने से अधिक विलंब से 8 अगस्त को छोड़ा गया।
बांध की आवक में कितनी वृद्धि हुई?
केरल के जलग्रहण क्षेत्रों में रातभर भारी बारिश के बाद बांध में आवक 634 क्यूसेक से बढ़कर 1,782 क्यूसेक हो गई — यानी लगभग तीन गुना वृद्धि।
क्या किसानों को अब पर्याप्त पानी मिलेगा?
बेहतर भंडारण से किसानों को तात्कालिक राहत मिली है, लेकिन स्थिति अभी भी जलग्रहण क्षेत्रों में आगे होने वाली बारिश पर निर्भर है। अधिकारी आवक और डिस्चार्ज की निगरानी कर कृषि व पेयजल ज़रूरतों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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