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वैगई बांध का जलस्तर 34 फीट पहुंचा, तमिलनाडु के पांच जिलों में पेयजल संकट टला

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वैगई बांध का जलस्तर 34 फीट पहुंचा, तमिलनाडु के पांच जिलों में पेयजल संकट टला

सारांश

पिछले महीने 20 फीट तक गिरा वैगई बांध का जलस्तर अब 34 फीट पर पहुंच गया है — मुल्लापेरियार से 300 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद। पांच जिलों में पेयजल संकट फिलहाल टला, लेकिन सिंचाई का सवाल मानसून की अगली चाल पर टिका है।

मुख्य बातें

वैगई बांध का जलस्तर बढ़कर 34 फीट पर पहुंचा, जो पिछले महीने के 20 फीट के निम्नतम स्तर से 14 फीट अधिक है।
थेनी, डिंडीगुल, मदुरै, शिवगंगा और रामनाथपुरम — पांच जिलों में पेयजल संकट की आशंका फिलहाल टली।
PWD के अनुसार मौजूदा जल भंडारण अगले दो महीनों तक पेयजल आपूर्ति के लिए पर्याप्त।
मुल्लापेरियार बांध के जलग्रहण क्षेत्र में मध्यम वर्षा के बाद 300 क्यूसेक पानी वैगई में छोड़ा गया।
सिंचाई के लिए जल-विमोचन का निर्णय आगे की वर्षा और जलस्तर पर निर्भर; इस वर्ष जून में सामान्य सिंचाई चक्र संभव नहीं हो सका।

तमिलनाडु के दक्षिणी हिस्से में पेयजल और सिंचाई की जीवनरेखा कहे जाने वाले वैगई बांध का जलस्तर पिछले कुछ सप्ताहों में उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 34 फीट पर पहुंच गया है। इससे थेनी, डिंडीगुल, मदुरै, शिवगंगा और रामनाथपुरम — इन पांच जिलों में मंडरा रहे गंभीर पेयजल संकट की आशंका फिलहाल टल गई है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा जल भंडारण अगले दो महीनों तक इन जिलों में निर्बाध पेयजल आपूर्ति के लिए पर्याप्त है।

संकट की पृष्ठभूमि

थेनी जिले के अंडीपट्टी के निकट स्थित 71 फीट ऊंचा वैगई बांध दक्षिणी तमिलनाडु के पांच जिलों की पेयजल और कृषि सिंचाई की प्रमुख आवश्यकता पूरी करता है। इस वर्ष जून में शुरू हुआ दक्षिण-पश्चिम मानसून अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहा, जिससे बांध में जल आवक घट गई और जलस्तर लुढ़ककर महज 20 फीट तक आ गया था। इस स्थिति ने पांचों जिलों में पेयजल की गंभीर किल्लत की आशंका को जन्म दिया था और मौजूदा कृषि सीजन की सिंचाई योजनाओं पर भी अनिश्चितता के बादल छा गए थे।

स्थिति में कैसे आया सुधार

मुल्लापेरियार बांध के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई मध्यम वर्षा के बाद स्थिति बदली। वहां जलप्रवाह बढ़ने पर अधिकारियों ने वैगई बांध में 300 क्यूसेक पानी छोड़ा, जिससे जलस्तर धीरे-धीरे ऊपर चढ़ने लगा। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार बांध अब 34 फीट पर है — पिछले महीने की तुलना में 14 फीट की बढ़त। यह ऐसे समय में राहत की खबर है जब राज्य के कई जलाशय मानसून की सुस्त शुरुआत से जूझ रहे हैं।

सिंचाई पर अभी भी अनिश्चितता

PWD अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान जलस्तर सिंचाई के लिए नियमित जल-विमोचन के लिए पर्याप्त नहीं है। सामान्य वर्षों में जून माह में मदुरै और डिंडीगुल के कुछ क्षेत्रों में पहली सिंचाई के लिए वैगई बांध से पानी छोड़ा जाता है, परंतु इस वर्ष ऐसा संभव नहीं हो सका। अधिकारियों के अनुसार, सिंचाई हेतु जल-विमोचन का निर्णय आने वाले दिनों में जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली वर्षा और बांध में जल आवक की स्थिति पर निर्भर करेगा।

सरकार की प्राथमिकता

फिलहाल सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता पांचों जिलों में पेयजल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना है। यदि जलग्रहण क्षेत्रों में अच्छी बारिश होती है और बांध का जलस्तर और बढ़ता है, तभी सिंचाई के लिए जल छोड़ने पर विचार किया जाएगा। गौरतलब है कि यह क्षेत्र हर वर्ष मानसून की अनिश्चितता से जूझता है और वैगई बांध की जल-स्थिति लाखों किसानों और शहरी उपभोक्ताओं की दिनचर्या को सीधे प्रभावित करती है।

आगे क्या

आने वाले हफ्तों में मानसून की प्रगति और मुल्लापेरियार जलग्रहण क्षेत्र में वर्षा की स्थिति निर्णायक होगी। यदि जलस्तर में पर्याप्त वृद्धि हुई तो किसानों को सिंचाई जल मिलने की उम्मीद बंध सकती है, अन्यथा इस कृषि सीजन में सिंचाई पर दबाव बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह मूल समस्या को नहीं छुपाता — दक्षिण-पश्चिम मानसून की अनिश्चितता पर निर्भर एक क्षेत्र, जहां लाखों लोगों की पेयजल सुरक्षा हर वर्ष बांध के जलस्तर की दया पर होती है। सिंचाई चक्र का इस वर्ष टूटना किसानों के लिए गंभीर संकेत है। दीर्घकालिक समाधान — वैकल्पिक जल स्रोतों का विकास, जलग्रहण क्षेत्र संरक्षण और मांग-प्रबंधन — की बजाय हर साल मानसून और अंतर-बांध हस्तांतरण पर निर्भरता बनी रहती है। यह चक्र टूटना ज़रूरी है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वैगई बांध का वर्तमान जलस्तर कितना है?
आंकड़ों के अनुसार, वैगई बांध का जलस्तर अब 34 फीट पर पहुंच गया है। यह पिछले महीने के 20 फीट के निम्नतम स्तर से 14 फीट की उल्लेखनीय वृद्धि है।
वैगई बांध से किन जिलों को पानी मिलता है?
71 फीट ऊंचा वैगई बांध थेनी, डिंडीगुल, मदुरै, शिवगंगा और रामनाथपुरम — इन पांच जिलों को पेयजल और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराता है। यह दक्षिणी तमिलनाडु के लाखों लोगों की जल-आवश्यकता का प्रमुख स्रोत है।
वैगई बांध का जलस्तर क्यों गिरा था?
इस वर्ष जून में शुरू हुआ दक्षिण-पश्चिम मानसून अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहा, जिससे बांध में जल आवक घट गई और जलस्तर 20 फीट तक गिर गया था। इससे पांचों जिलों में पेयजल संकट की आशंका पैदा हो गई थी।
क्या वैगई बांध से सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाएगा?
PWD अधिकारियों के अनुसार, अभी सिंचाई के लिए पानी छोड़ने की स्थिति नहीं है। यह निर्णय आने वाले दिनों में जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली वर्षा और बांध में जल आवक पर निर्भर करेगा।
जलस्तर में सुधार कैसे आया?
मुल्लापेरियार बांध के जलग्रहण क्षेत्रों में मध्यम वर्षा के बाद अधिकारियों ने वैगई बांध में 300 क्यूसेक पानी छोड़ा, जिससे जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ने लगा और अब 34 फीट पर पहुंच गया है।
राष्ट्र प्रेस
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