इंडिया गठबंधन रैली से दिल्ली व्यापार को ₹11,000 करोड़ का नुकसान, 80% दुकानें रहीं बंद: सीटीआई
सारांश
मुख्य बातें
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने दावा किया है कि 1 नवंबर 2026 को रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया गठबंधन की रैली के कारण दिल्ली के व्यापारिक प्रतिष्ठानों को ₹11,000 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ और राजधानी के प्रमुख बाजारों में करीब 80 प्रतिशत दुकानें बंद रहीं। सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल के अनुसार, रैली से पहले व्यापक प्रचार हुआ था कि करीब 10 लाख लोग इसमें शामिल होंगे, जिसके लिए 15,000 से 20,000 वाहनों के आने का अनुमान था — इसी आशंका ने दिल्ली के बाजारों में भय और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया।
मुख्य घटनाक्रम: बाज़ारों पर असर
गोयल के अनुसार, सामान्य दिनों में दिल्ली के बाजारों में खरीदारी और कारोबार के लिए रोज़ाना 3 से 4 लाख बाहरी ग्राहक आते हैं, लेकिन रैली वाले दिन उनकी तादाद बेहद कम रही। उन्होंने बताया, 'रामलीला मैदान के आसपास के 22 से 25 प्रमुख बाजारों में करीब 3 लाख दुकानें हैं। विभिन्न बाजार संघों से मिली जानकारी के आधार पर सीटीआई का अनुमान है कि शाम तक लगभग 2.5 लाख दुकानें, यानी करीब 80 प्रतिशत प्रतिष्ठान, बंद रहे।' जो दुकानें खुली भी थीं, वहाँ कारोबार लगभग न के बराबर रहा।
आपूर्ति शृंखला पर असर
सीटीआई का दावा है कि रैली के कारण केवल बाजारों में ग्राहकों की संख्या ही प्रभावित नहीं हुई, बल्कि माल ढुलाई और आपूर्ति शृंखला पर भी व्यापक असर पड़ा। गोयल ने बताया कि रामलीला मैदान के 10 किलोमीटर के दायरे में परिवहन गतिविधियाँ बुरी तरह प्रभावित हुईं और माल की लोडिंग-अनलोडिंग लगभग ठप हो गई।
सामान्यतः नरेला, बवाना, ओखला, मयापुरी, मुंडका और उद्योग नगर सहित दिल्ली के 56 औद्योगिक क्षेत्रों से प्रतिदिन करीब 5,000 ट्रक और टेंपो माल लेकर बाजारों में पहुँचते हैं। रैली वाले दिन सप्लाई चेन बाधित होने से धनतेरस और दिवाली के लिए तैयार सामान गोदामों में ही अटका रहा और दुकानों तक नहीं पहुँच सका।
सीटीआई की पूर्व अपील और राजनीतिक पहलू
गोयल ने बताया कि सीटीआई ने रैली से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी को चार बार पत्र लिखकर कार्यक्रम स्थगित करने का आग्रह किया था। इसके अलावा करीब 100 प्रमुख बाजार संगठनों ने भी यही माँग उठाई थी। गोयल ने स्पष्ट किया कि इसका कोई राजनीतिक मकसद नहीं था — 'हम व्यापारी हैं, किसी राजनीतिक दल के एजेंट नहीं। हम केवल दिवाली सीजन में अपनी आजीविका बचाने की अपील कर रहे थे।'
उन्होंने राहुल गांधी की उस अपील का स्वागत किया जिसमें उन्होंने रैली में आए लोगों से दिल्ली के बाजारों में खरीदारी कर व्यापारियों का समर्थन करने को कहा था। हालाँकि गोयल ने कहा कि जब 80 प्रतिशत दुकानें ही बंद थीं, तो रैली में पहुँचे लोग खरीदारी कैसे कर सकते थे — जमीनी हालात अलग थे।
दिवाली सीजन और व्यापारियों की चिंता
व्यापारियों का कहना है कि धनतेरस और दिवाली से पहले का समय साल का सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी सीजन होता है। इस दौरान किसी भी तरह की रुकावट का असर केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे वर्ष की आय पर पड़ता है। गौरतलब है कि त्योहारी सीजन में दिल्ली के बाजार देश के कई हिस्सों को माल की आपूर्ति करते हैं, जिससे यह व्यवधान और अधिक व्यापक हो जाता है।
आगे यह देखना होगा कि सीटीआई और बाजार संगठन इस नुकसान की भरपाई के लिए प्रशासन या सरकार से किसी राहत की माँग करते हैं या नहीं।