1 नवंबर 2026
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इंडिया गठबंधन रैली से दिल्ली व्यापार को ₹11,000 करोड़ का नुकसान, 80% दुकानें रहीं बंद: सीटीआई

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इंडिया गठबंधन रैली से दिल्ली व्यापार को ₹11,000 करोड़ का नुकसान, 80% दुकानें रहीं बंद: सीटीआई

सारांश

दिवाली से ठीक पहले रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया गठबंधन की रैली ने दिल्ली के बाजारों को भारी झटका दिया — सीटीआई के अनुसार ₹11,000 करोड़ का नुकसान, 80% दुकानें बंद और 56 औद्योगिक क्षेत्रों से माल ढुलाई ठप। त्योहारी सीजन की यह चोट व्यापारियों की साल भर की कमाई पर असर डाल सकती है।

मुख्य बातें

सीटीआई के अनुसार 1 नवंबर 2026 को रामलीला मैदान की रैली से दिल्ली व्यापार को ₹11,000 करोड़ का नुकसान हुआ।
रामलीला मैदान के आसपास 22-25 प्रमुख बाजारों की 3 लाख दुकानों में से 2.5 लाख (80%) बंद रहीं।
सामान्य दिनों में 3 से 4 लाख बाहरी ग्राहक दिल्ली बाजारों में आते हैं; रैली वाले दिन संख्या बेहद कम रही।
56 औद्योगिक क्षेत्रों से रोज़ाना 5,000 ट्रक-टेंपो की आपूर्ति ठप; धनतेरस-दिवाली का माल गोदामों में अटका।
सीटीआई ने रैली से पहले राहुल गांधी को चार बार पत्र लिखकर कार्यक्रम स्थगन का आग्रह किया था।
व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि माँग का कोई राजनीतिक मकसद नहीं था — केवल दिवाली सीजन में आजीविका बचाना उद्देश्य था।

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने दावा किया है कि 1 नवंबर 2026 को रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया गठबंधन की रैली के कारण दिल्ली के व्यापारिक प्रतिष्ठानों को ₹11,000 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ और राजधानी के प्रमुख बाजारों में करीब 80 प्रतिशत दुकानें बंद रहीं। सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल के अनुसार, रैली से पहले व्यापक प्रचार हुआ था कि करीब 10 लाख लोग इसमें शामिल होंगे, जिसके लिए 15,000 से 20,000 वाहनों के आने का अनुमान था — इसी आशंका ने दिल्ली के बाजारों में भय और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया।

मुख्य घटनाक्रम: बाज़ारों पर असर

गोयल के अनुसार, सामान्य दिनों में दिल्ली के बाजारों में खरीदारी और कारोबार के लिए रोज़ाना 3 से 4 लाख बाहरी ग्राहक आते हैं, लेकिन रैली वाले दिन उनकी तादाद बेहद कम रही। उन्होंने बताया, 'रामलीला मैदान के आसपास के 22 से 25 प्रमुख बाजारों में करीब 3 लाख दुकानें हैं। विभिन्न बाजार संघों से मिली जानकारी के आधार पर सीटीआई का अनुमान है कि शाम तक लगभग 2.5 लाख दुकानें, यानी करीब 80 प्रतिशत प्रतिष्ठान, बंद रहे।' जो दुकानें खुली भी थीं, वहाँ कारोबार लगभग न के बराबर रहा।

आपूर्ति शृंखला पर असर

सीटीआई का दावा है कि रैली के कारण केवल बाजारों में ग्राहकों की संख्या ही प्रभावित नहीं हुई, बल्कि माल ढुलाई और आपूर्ति शृंखला पर भी व्यापक असर पड़ा। गोयल ने बताया कि रामलीला मैदान के 10 किलोमीटर के दायरे में परिवहन गतिविधियाँ बुरी तरह प्रभावित हुईं और माल की लोडिंग-अनलोडिंग लगभग ठप हो गई।

सामान्यतः नरेला, बवाना, ओखला, मयापुरी, मुंडका और उद्योग नगर सहित दिल्ली के 56 औद्योगिक क्षेत्रों से प्रतिदिन करीब 5,000 ट्रक और टेंपो माल लेकर बाजारों में पहुँचते हैं। रैली वाले दिन सप्लाई चेन बाधित होने से धनतेरस और दिवाली के लिए तैयार सामान गोदामों में ही अटका रहा और दुकानों तक नहीं पहुँच सका।

सीटीआई की पूर्व अपील और राजनीतिक पहलू

गोयल ने बताया कि सीटीआई ने रैली से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी को चार बार पत्र लिखकर कार्यक्रम स्थगित करने का आग्रह किया था। इसके अलावा करीब 100 प्रमुख बाजार संगठनों ने भी यही माँग उठाई थी। गोयल ने स्पष्ट किया कि इसका कोई राजनीतिक मकसद नहीं था — 'हम व्यापारी हैं, किसी राजनीतिक दल के एजेंट नहीं। हम केवल दिवाली सीजन में अपनी आजीविका बचाने की अपील कर रहे थे।'

उन्होंने राहुल गांधी की उस अपील का स्वागत किया जिसमें उन्होंने रैली में आए लोगों से दिल्ली के बाजारों में खरीदारी कर व्यापारियों का समर्थन करने को कहा था। हालाँकि गोयल ने कहा कि जब 80 प्रतिशत दुकानें ही बंद थीं, तो रैली में पहुँचे लोग खरीदारी कैसे कर सकते थे — जमीनी हालात अलग थे।

दिवाली सीजन और व्यापारियों की चिंता

व्यापारियों का कहना है कि धनतेरस और दिवाली से पहले का समय साल का सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी सीजन होता है। इस दौरान किसी भी तरह की रुकावट का असर केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे वर्ष की आय पर पड़ता है। गौरतलब है कि त्योहारी सीजन में दिल्ली के बाजार देश के कई हिस्सों को माल की आपूर्ति करते हैं, जिससे यह व्यवधान और अधिक व्यापक हो जाता है।

आगे यह देखना होगा कि सीटीआई और बाजार संगठन इस नुकसान की भरपाई के लिए प्रशासन या सरकार से किसी राहत की माँग करते हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ का आँकड़ा एक व्यापारिक संगठन का अनुमान है, स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं — इसे उसी परिप्रेक्ष्य में पढ़ा जाना चाहिए। फिर भी, बड़े राजनीतिक आयोजनों और त्योहारी कारोबार के टकराव का यह सवाल नया नहीं है — राजधानी में हर बड़ी रैली के बाद व्यापारी यही शिकायत करते हैं, चाहे वह किसी भी दल की हो। असली मुद्दा यह है कि दिल्ली में सार्वजनिक स्थलों के उपयोग और आर्थिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाने की कोई पारदर्शी व्यवस्था नहीं है। जब तक यह नहीं होगा, हर बड़े आयोजन के बाद इस तरह के दावे-प्रतिदावे का सिलसिला जारी रहेगा।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडिया गठबंधन की रैली से दिल्ली व्यापार को कितना नुकसान हुआ?
सीटीआई के अनुसार 1 नवंबर 2026 को रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया गठबंधन की रैली से दिल्ली के व्यापारिक प्रतिष्ठानों को ₹11,000 करोड़ का नुकसान हुआ। यह अनुमान बाजार संघों से मिली जानकारी पर आधारित है और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है।
रैली के दिन दिल्ली में कितनी दुकानें बंद रहीं?
सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल के अनुसार रामलीला मैदान के आसपास के 22 से 25 प्रमुख बाजारों की करीब 3 लाख दुकानों में से 2.5 लाख यानी लगभग 80 प्रतिशत दुकानें बंद रहीं। जो दुकानें खुली भी थीं, वहाँ कारोबार लगभग न के बराबर रहा।
सीटीआई ने रैली स्थगित करने की माँग क्यों की थी?
सीटीआई ने रैली से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी को चार बार पत्र लिखकर कार्यक्रम स्थगित करने का आग्रह किया था, क्योंकि यह धनतेरस और दिवाली का व्यस्ततम कारोबारी सीजन था। करीब 100 प्रमुख बाजार संगठनों ने भी यही माँग उठाई थी। व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि इसका कोई राजनीतिक मकसद नहीं था।
रैली से दिल्ली की आपूर्ति शृंखला पर क्या असर पड़ा?
रामलीला मैदान के 10 किलोमीटर के दायरे में परिवहन गतिविधियाँ बाधित हो गईं और माल की लोडिंग-अनलोडिंग लगभग ठप रही। दिल्ली के 56 औद्योगिक क्षेत्रों से प्रतिदिन करीब 5,000 ट्रक-टेंपो बाजारों में माल पहुँचाते हैं, लेकिन रैली वाले दिन धनतेरस-दिवाली के लिए तैयार सामान गोदामों में ही अटका रहा।
राहुल गांधी ने व्यापारियों के बारे में क्या कहा था?
राहुल गांधी ने रैली में मौजूद लोगों से दिल्ली के बाजारों में खरीदारी कर व्यापारियों का समर्थन करने की अपील की थी। सीटीआई ने इस अपील का स्वागत किया, लेकिन बृजेश गोयल ने कहा कि जब 80 प्रतिशत दुकानें ही बंद थीं तो रैली में आए लोग खरीदारी कैसे करते — जमीनी हालात अपील से बिल्कुल अलग थे।
राष्ट्र प्रेस
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