1 नवंबर 2026
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ईपीएस ने तमिलनाडु सरकार से अम्मा फार्मेसी पुनः शुरू करने की माँग की, गरीबों को सस्ती दवाएँ देने पर दिया जोर

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ईपीएस ने तमिलनाडु सरकार से अम्मा फार्मेसी पुनः शुरू करने की माँग की, गरीबों को सस्ती दवाएँ देने पर दिया जोर

सारांश

अन्नाद्रमुक महासचिव ईपीएस ने तमिलनाडु सरकार से अम्मा फार्मेसी पुनः शुरू करने की माँग की है। उन्होंने जीवनरक्षक दवाओं पर 30% से अधिक मुनाफे और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का हवाला देते हुए कहा कि गरीब परिवारों पर बढ़ता दवा-खर्च का बोझ सरकारी उदासीनता का नतीजा है।

मुख्य बातें

अन्नाद्रमुक महासचिव ईपीएस पलानीस्वामी ने 1 नवंबर 2026 को तमिलनाडु सरकार से अम्मा फार्मेसी पुनः शुरू करने की माँग की।
अम्मा फार्मेसी की शुरुआत जे.
जयललिता ने 2014 में की थी; DMK सरकार पर इसे 2021 में बंद करने का आरोप।
ऑल इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क के अनुसार, कुछ जीवनरक्षक दवाओं में 30% से अधिक मुनाफा वसूले जाने की चिंताएँ हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने 27 अक्टूबर 2026 को दवाओं की कीमतों पर केंद्र व राज्य सरकारों से स्पष्टीकरण माँगा।
TASMAC के ज़रिए शराब पर कर बढ़ाकर ₹1,200–₹1,600 करोड़ अतिरिक्त राजस्व जुटाने की योजना पर ईपीएस ने सवाल उठाए।

अन्नाद्रमुक महासचिव एवं तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) ने 1 नवंबर 2026 को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को सस्ती स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने की अनदेखी का आरोप लगाया। पलानीस्वामी ने माँग की कि सरकार तत्काल अम्मा फार्मेसी को पुनर्जीवित करे, ताकि जरूरतमंद परिवारों को रियायती दरों पर आवश्यक दवाएँ मिल सकें।

अम्मा फार्मेसी का इतिहास और पृष्ठभूमि

पलानीस्वामी ने याद दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने वर्ष 2014 में सहकारी क्षेत्र के माध्यम से अम्मा फार्मेसी की शुरुआत की थी। इस पहल का मूल उद्देश्य फार्मास्युटिकल कंपनियों द्वारा अत्यधिक मूल्य वसूली की बढ़ती शिकायतों के बीच आम नागरिकों तक किफायती दवाएँ पहुँचाना था।

उनके नेतृत्व वाली अन्नाद्रमुक सरकार ने बाद में पूरे तमिलनाडु में अम्मा फार्मेसी का विस्तार किया, जिससे मरीजों को इलाज के खर्च में उल्लेखनीय राहत मिली और दवाओं तक पहुँच सुगम हुई।

द्रमुक सरकार पर आरोप

पलानीस्वामी ने आरोप लगाया कि 2021 में सत्ता में आई द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार ने इस पहल को कमज़ोर किया। उनके अनुसार, अम्मा फार्मेसी का संचालन बंद कर दिया गया और निजी भागीदारी के साथ 'मुख्यमंत्री फार्मेसी' के नाम से एक वैकल्पिक व्यवस्था लागू की गई। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने इन केंद्रों को भी पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी है।

दवाओं की बढ़ती कीमतें और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

ऑल इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क का हवाला देते हुए पलानीस्वामी ने कहा कि कुछ जीवनरक्षक दवाओं की बिक्री में 30 प्रतिशत से अधिक मुनाफा कमाए जाने को लेकर गंभीर चिंताएँ बनी हुई हैं। उन्होंने 27 अक्टूबर 2026 को दवाओं की कीमतों से जुड़े मामले में सर्वोच्च न्यायालय में हुई सुनवाई का भी उल्लेख किया, जिसमें अदालत ने अस्पतालों में बेची जाने वाली दवाओं की कीमतों पर केंद्र और राज्य सरकारों से स्पष्टीकरण माँगा है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में दवाओं की बढ़ती कीमतें स्वास्थ्य नीति के केंद्र में हैं और न्यायपालिका भी इस मुद्दे पर सक्रिय हो रही है।

शराब राजस्व बनाम स्वास्थ्य प्राथमिकता पर सवाल

पलानीस्वामी ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर गरीबों को सस्ती दवाएँ देने में लापरवाही बरती जा रही है, वहीं दूसरी ओर TASMAC के माध्यम से शराब पर कर बढ़ाकर सालाना ₹1,200 करोड़ से ₹1,600 करोड़ तक अतिरिक्त राजस्व जुटाने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार आम जनता की स्वास्थ्य जरूरतों को उचित प्राथमिकता देगी।

माँग और आगे की दिशा

पलानीस्वामी ने राज्य सरकार से अम्मा फार्मेसी को पूरी तरह पुनः संचालित करने और जरूरतमंद परिवारों तक सस्ती दवाएँ पहुँचाने की औपचारिक माँग की। यह देखना होगा कि मुख्यमंत्री विजय सरकार इस माँग पर क्या रुख अपनाती है — खासकर तब जब सर्वोच्च न्यायालय भी दवाओं की कीमतों पर सरकारों से जवाब माँग रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह तमिलनाडु की स्वास्थ्य नीति की उस दीर्घकालिक विफलता को उजागर करती है जहाँ सरकारें बदलती हैं और जन-कल्याण योजनाएँ राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की भेंट चढ़ जाती हैं। सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप और 30% मार्जिन का आँकड़ा दर्शाता है कि यह समस्या केवल राज्य की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय दवा-मूल्य नियंत्रण व्यवस्था की भी है। मुख्यधारा की कवरेज इसे अन्नाद्रमुक-द्रमुक लड़ाई तक सीमित कर देती है, जबकि असली सवाल यह है कि TASMAC राजस्व को प्राथमिकता देने वाली सरकार जन-स्वास्थ्य को किस श्रेणी में रखती है।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अम्मा फार्मेसी क्या है और इसे क्यों बंद किया गया?
अम्मा फार्मेसी तमिलनाडु में वर्ष 2014 में पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता द्वारा सहकारी क्षेत्र के माध्यम से शुरू की गई एक सरकारी दवा वितरण योजना थी, जिसका उद्देश्य गरीबों को किफायती दरों पर आवश्यक दवाएँ उपलब्ध कराना था। अन्नाद्रमुक के आरोपों के अनुसार, 2021 में DMK सरकार के सत्ता में आने के बाद इसका संचालन बंद कर 'मुख्यमंत्री फार्मेसी' नाम से निजी भागीदारी वाली वैकल्पिक व्यवस्था लागू की गई।
ईपीएस पलानीस्वामी ने तमिलनाडु सरकार से क्या माँग की है?
अन्नाद्रमुक महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार से अम्मा फार्मेसी को पूरी तरह पुनः संचालित करने की माँग की है, ताकि गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को रियायती दरों पर जरूरी दवाएँ उपलब्ध हो सकें।
सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं की कीमतों पर क्या कहा?
27 अक्टूबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने दवाओं की कीमतों से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से अस्पतालों में बेची जाने वाली दवाओं की कीमतों पर स्पष्टीकरण माँगा है।
जीवनरक्षक दवाओं पर कितना मुनाफा कमाया जा रहा है?
ऑल इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क के हवाले से पलानीस्वामी ने कहा कि कुछ जीवनरक्षक दवाओं की बिक्री में 30 प्रतिशत से अधिक मुनाफा कमाए जाने को लेकर चिंताएँ बनी हुई हैं, जो आम मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रहा है।
TASMAC राजस्व और स्वास्थ्य नीति पर ईपीएस ने क्या कहा?
पलानीस्वामी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार एक ओर गरीबों को सस्ती दवाएँ देने में उदासीन है, वहीं दूसरी ओर TASMAC के माध्यम से शराब पर कर बढ़ाकर सालाना ₹1,200 करोड़ से ₹1,600 करोड़ तक अतिरिक्त राजस्व जुटाने की योजना बना रही है।
राष्ट्र प्रेस
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