ईपीएस ने तमिलनाडु सरकार से अम्मा फार्मेसी पुनः शुरू करने की माँग की, गरीबों को सस्ती दवाएँ देने पर दिया जोर
सारांश
मुख्य बातें
अन्नाद्रमुक महासचिव एवं तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) ने 1 नवंबर 2026 को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को सस्ती स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने की अनदेखी का आरोप लगाया। पलानीस्वामी ने माँग की कि सरकार तत्काल अम्मा फार्मेसी को पुनर्जीवित करे, ताकि जरूरतमंद परिवारों को रियायती दरों पर आवश्यक दवाएँ मिल सकें।
अम्मा फार्मेसी का इतिहास और पृष्ठभूमि
पलानीस्वामी ने याद दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता ने वर्ष 2014 में सहकारी क्षेत्र के माध्यम से अम्मा फार्मेसी की शुरुआत की थी। इस पहल का मूल उद्देश्य फार्मास्युटिकल कंपनियों द्वारा अत्यधिक मूल्य वसूली की बढ़ती शिकायतों के बीच आम नागरिकों तक किफायती दवाएँ पहुँचाना था।
उनके नेतृत्व वाली अन्नाद्रमुक सरकार ने बाद में पूरे तमिलनाडु में अम्मा फार्मेसी का विस्तार किया, जिससे मरीजों को इलाज के खर्च में उल्लेखनीय राहत मिली और दवाओं तक पहुँच सुगम हुई।
द्रमुक सरकार पर आरोप
पलानीस्वामी ने आरोप लगाया कि 2021 में सत्ता में आई द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार ने इस पहल को कमज़ोर किया। उनके अनुसार, अम्मा फार्मेसी का संचालन बंद कर दिया गया और निजी भागीदारी के साथ 'मुख्यमंत्री फार्मेसी' के नाम से एक वैकल्पिक व्यवस्था लागू की गई। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने इन केंद्रों को भी पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी है।
दवाओं की बढ़ती कीमतें और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
ऑल इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क का हवाला देते हुए पलानीस्वामी ने कहा कि कुछ जीवनरक्षक दवाओं की बिक्री में 30 प्रतिशत से अधिक मुनाफा कमाए जाने को लेकर गंभीर चिंताएँ बनी हुई हैं। उन्होंने 27 अक्टूबर 2026 को दवाओं की कीमतों से जुड़े मामले में सर्वोच्च न्यायालय में हुई सुनवाई का भी उल्लेख किया, जिसमें अदालत ने अस्पतालों में बेची जाने वाली दवाओं की कीमतों पर केंद्र और राज्य सरकारों से स्पष्टीकरण माँगा है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में दवाओं की बढ़ती कीमतें स्वास्थ्य नीति के केंद्र में हैं और न्यायपालिका भी इस मुद्दे पर सक्रिय हो रही है।
शराब राजस्व बनाम स्वास्थ्य प्राथमिकता पर सवाल
पलानीस्वामी ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर गरीबों को सस्ती दवाएँ देने में लापरवाही बरती जा रही है, वहीं दूसरी ओर TASMAC के माध्यम से शराब पर कर बढ़ाकर सालाना ₹1,200 करोड़ से ₹1,600 करोड़ तक अतिरिक्त राजस्व जुटाने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार आम जनता की स्वास्थ्य जरूरतों को उचित प्राथमिकता देगी।
माँग और आगे की दिशा
पलानीस्वामी ने राज्य सरकार से अम्मा फार्मेसी को पूरी तरह पुनः संचालित करने और जरूरतमंद परिवारों तक सस्ती दवाएँ पहुँचाने की औपचारिक माँग की। यह देखना होगा कि मुख्यमंत्री विजय सरकार इस माँग पर क्या रुख अपनाती है — खासकर तब जब सर्वोच्च न्यायालय भी दवाओं की कीमतों पर सरकारों से जवाब माँग रहा है।