पाकिस्तान की उच्च शिक्षा व्यवस्था संकट में: मुशर्रफ के 2002 के सुधार 25 साल बाद लड़खड़ाए
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान की उच्च शिक्षा व्यवस्था गहरे संकट में है — भारी निवेश और व्यापक सुधारों के बावजूद यह प्रणाली अपने वादे से कोसों दूर नजर आ रही है। पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' की एक विस्तृत इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट के अनुसार, 2002 में तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ द्वारा शुरू किए गए उच्च शिक्षा सुधार अब अपने 25वें वर्ष में लड़खड़ाते हुए प्रवेश कर रहे हैं। यह रिपोर्ट उन चुनौतियों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करती है जो पाकिस्तान के शिक्षा तंत्र को भीतर से खोखला कर रही हैं।
सुधारों की शुरुआत और महत्वाकांक्षी लक्ष्य
जनरल परवेज मुशर्रफ ने 2002 में पाकिस्तान को एक 'ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था' में बदलने के लिए उच्च शिक्षा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सुधारों की नींव रखी थी। इसका उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को 'उत्कृष्टता के केंद्रों' के रूप में विकसित करना था। इसी ढाँचे के तहत उच्च शिक्षा आयोग (HEC) की स्थापना की गई, जो बाद में पाकिस्तान में उच्च शिक्षा नियमन की मुख्य संस्था बनी। इसके साथ ही अमेरिका के साथ एक अहम समझौते के तहत उस समय दुनिया का सबसे बड़ा 'फुलब्राइट छात्रवृत्ति कार्यक्रम' भी शुरू किया गया था।
मौजूदा स्थिति: संख्या बढ़ी, गुणवत्ता घटी
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में अभी लगभग 280 विश्वविद्यालय हैं, लाखों छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और शोध कार्यों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। लेकिन इस विस्तार की असली कीमत अब सामने आ रही है — विश्वविद्यालय लगातार बढ़ते कर्ज, कमज़ोर शैक्षणिक परिणामों और शोध की गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों से जूझ रहे हैं। रिपोर्ट का कहना है कि यह विस्तार अब अपने ही बोझ तले दबता जा रहा है।
खैबर पख्तूनख्वा का वित्तीय संकट
यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर तब और उभरा जब खैबर पख्तूनख्वा के लगभग सभी सरकारी विश्वविद्यालय गंभीर वित्तीय संकट में आ गए। इन संस्थानों ने राहत के लिए लगभग 25 अरब पाकिस्तानी रुपए के विशेष पैकेज की माँग की। यह संकट केवल एक प्रांत की समस्या नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की असफलता का प्रतीक बन चुका है।
विशेषज्ञों ने पहले ही जताई थी चेतावनी
रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है — उच्च शिक्षा व्यवस्था की मूल योजना तैयार करने वाले विशेषज्ञों ने 2002 की मूल 'टास्क फोर्स' रिपोर्ट में ही इन संभावित समस्याओं का स्पष्ट उल्लेख किया था। यही रिपोर्ट बाद में उच्च शिक्षा आयोग (HEC) अध्यादेश और पाकिस्तान के उच्च शिक्षा आयोग की स्थापना का आधार बनी। इस प्रकार कथित तौर पर चेतावनियों के बावजूद इस दिशा में आवश्यक सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए।
आगे की राह: 'टू बिग टु फेल' का जाल
'डॉन' की रिपोर्ट में कहा गया है: 'यह व्यवस्था इतनी बड़ी हो चुकी है कि इसे विफल होने नहीं दिया जा सकता और इसमें सुधार करना भी बेहद मुश्किल हो गया है।' गौरतलब है कि यह रिपोर्ट पाकिस्तान के शिक्षा क्षेत्र पर केंद्रित एक बड़ी इन्वेस्टिगेटिव सीरीज का हिस्सा है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक वित्तपोषण, जवाबदेही और शिक्षा की गुणवत्ता पर ठोस ध्यान नहीं दिया जाता, यह संकट और गहरा होता जाएगा।