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पाकिस्तान में युवाओं की बेरोजगारी: कौशल की कमी और डिग्रियों की मान्यता की चुनौती

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पाकिस्तान में युवाओं की बेरोजगारी: कौशल की कमी और डिग्रियों की मान्यता की चुनौती

सारांश

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था संकट में है, और एक नई रिपोर्ट बताती है कि कौशल की कमी और डिग्री की मान्यता की समस्याएं युवाओं की बेरोजगारी का मुख्य कारण बन रही हैं। जानें कैसे ये मुद्दे पाकिस्तान के विकास को प्रभावित कर रहे हैं।

मुख्य बातें

पाकिस्तान में युवा बेरोजगारी की स्थिति गंभीर है।
कौशल की कमी और डिग्री मान्यता की समस्याएं मुख्य कारण हैं।
शिक्षा पर खर्च बढ़ाने की आवश्यकता है।
पाठ्यक्रम को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित करने की आवश्यकता है।
संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, 21 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है और यह तेजी से हाशिये की ओर बढ़ रही है। जबकि विकास की स्थिति पूरी तरह से खराब है, देश फिर भी कर्ज के बोझ तले किसी तरह अपना सफर जारी रखे हुए है। इस संदर्भ में एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान का जनसांख्यिकीय लाभांश अब जनसांख्यिकीय दुविधा में बदलता जा रहा है।

इसका मुख्य कारण स्किल्स में बढ़ता अंतर है, जिससे आर्थिक ठहराव उत्पन्न हो रहा है। आर्थिक ठहराव के परिणामस्वरूप सामाजिक अशांति भी बढ़ रही है।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान से हर वर्ष लगभग 8 लाख विश्वविद्यालय ग्रेजुएट निकलते हैं, लेकिन जापान और दक्षिण कोरिया जैसे महत्वपूर्ण लेबर मार्केट में इनकी पहुंच सीमित है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि इन देशों की अर्थव्यवस्था में जिस प्रकार के कौशल और प्रतिभा की आवश्यकता होती है, पाकिस्तानी युवा उन आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।

वास्तव में, रिपोर्ट में राष्ट्रीय असेंबली की ओवरसीज पाकिस्तानियों और मानव संसाधनों के विकास पर स्टैंडिंग कमेटी के निष्कर्षों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

इसमें सर्टिफाइड तकनीकी कौशल, भाषा की जानकारी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त योग्यता की कमी के बारे में चेतावनी दी गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है, "ग्रेजुएट्स की संख्या में वृद्धि होने के बावजूद, कई पाकिस्तानी डिग्रियां विदेशों में नौकरी पाने में विफल रहती हैं। योग्यता की मान्यता अभी भी संतोषजनक नहीं है और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रणाली वैश्विक मानकों से पीछे है।"

रिपोर्ट का सुझाव है कि पाकिस्तान के पाठ्यक्रम को उद्योग के साथ परामर्श करके बदला जाना चाहिए और घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय श्रम मांग के अनुसार बनाया जाना चाहिए। जापान और दक्षिण कोरिया में मांगे जाने वाले क्षेत्रों में तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि पाकिस्तान को बढ़ते कौशल गैप को कम करना है, तो उसे छोटे सुधारों से आगे बढ़कर संरचनात्मक सुधार करने होंगे। विश्वविद्यालय अब बाजार की वास्तविकताओं से अलग नहीं रह सकते।

एक अन्य हालिया रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान शिक्षा पर अपनी जीडीपी का केवल 1.9% खर्च करता है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुशंसित 4 से 6% से बहुत कम है। इसके अलावा, लगभग 26.2 मिलियन बच्चे स्कूल से बाहर हैं। पाठ्यक्रम में डिजिटल कौशल, क्रिटिकल थिंकिंग और अप्लाईड लर्निंग के लिए सीमित एक्सपोजर दिया गया है, जिससे कार्यबल तकनीकी बदलाव के लिए तैयार नहीं हो पाता।

रिपोर्ट में सर्वे का हवाला देते हुए कहा गया है कि 64% ग्रेजुएट्स कौशल अंतर के कारण नौकरी पाने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं, जबकि युवाओं में ग्रेजुएट बेरोजगारी लगभग 31% होने का अनुमान है।

इसके अलावा, अनुसंधान फंडिंग बहुत कम है, उच्च शिक्षा उद्योग की आवश्यकताओं से भिन्न है और शिक्षकों की गुणवत्ता कम ट्रेनिंग और सीमित व्यावसायिक विकास से प्रभावित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विशेष रूप से युवा बेरोजगारी के संदर्भ में। कौशल विकास और डिग्री मान्यता की समस्याएं न केवल व्यक्तिगत स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी विकास में बाधा डाल रही हैं। इन मुद्दों का समाधान अविलंब आवश्यक है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान में युवाओं की बेरोजगारी के मुख्य कारण क्या हैं?
मुख्य कारणों में कौशल की कमी और डिग्री की मान्यता का अभाव शामिल हैं।
क्या पाकिस्तान का शैक्षिक बजट अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है?
नहीं, पाकिस्तान शिक्षा पर अपनी जीडीपी का केवल 1.9% खर्च करता है, जो अनुशंसित 4 से 6% से काफी कम है।
क्या पाकिस्तान के ग्रेजुएट्स विदेशों में नौकरी पाने में सफल हो रहे हैं?
बहुत से पाकिस्तानी ग्रेजुएट्स विदेशों में नौकरी पाने में नाकाम रहते हैं, क्योंकि उनकी स्किल्स अंतरराष्ट्रीय मांगों के अनुरूप नहीं हैं।
राष्ट्र प्रेस
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