तेलंगाना मंत्री ने कालेश्वरम बांधों के वैज्ञानिक जीर्णोद्धार की योजना का किया ऐलान
सारांश
Key Takeaways
- वैज्ञानिक तरीके से जीर्णोद्धार होगा।
- प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।
- विशेषज्ञ एजेंसियों की नियुक्ति की गई है।
- सभी परीक्षणों के परिणामों पर नए डिजाइन तैयार किए जाएंगे।
- केंद्रीय समन्वय समिति समन्वय बनाए रखेगी।
हैदराबाद, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। तेलंगाना के सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने शुक्रवार को जानकारी दी कि राज्य सरकार कालेश्वरम परियोजना के अंतर्गत आने वाले तीन बांधों की मरम्मत और जीर्णोद्धार का कार्य वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से करेगी।
उन्होंने शुक्रवार को दिल्ली में नेशनल डैम सेफ्टी अथॉरिटी (एनडीएसए) के अध्यक्ष अनिल जैन से भेंट की और मेदिगाड्डा, अन्नारम और सुंडिला बांधों की मरम्मत एवं जीर्णोद्धार की कार्य योजना पर चर्चा की।
मंत्री ने बताया कि पिछली गलतियों को फिर से न दोहराने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे एहतियाती उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।
आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, एनडीएसए के अध्यक्ष ने विशेषज्ञों की देखरेख में चल रहे व्यापक परीक्षण के तरीकों पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही व्यक्तिगत रूप से बैराजों का दौरा करेंगे।
बैराज जीर्णोद्धार प्रक्रिया के अंतर्गत, सरकार ने विशेषज्ञ एजेंसियों को नियुक्त किया है। डिजाइन और परीक्षण के लिए विशेष एजेंसियों ने अपना कार्य आरंभ कर दिया है।
केंद्रीय जल एवं विद्युत अनुसंधान केंद्र (सीडब्ल्यूपीआरएस) डिजाइन चरण से पूर्व आवश्यक प्रारंभिक परीक्षण और अध्ययन कर रहा है।
बांधों की मरम्मत को सुगम बनाने के लिए, मिट्टी की स्थिति और निर्माण की संरचनात्मक अखंडता का आकलन करने हेतु ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (जीपीआर) स्कैनिंग, ड्रोन सर्वेक्षण, बोरहोल ड्रिलिंग और भू-तकनीकी एवं भूभौतिकीय परीक्षण सहित विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
उत्तम कुमार रेड्डी ने बताया कि विभिन्न संगठनों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एक केंद्रीय समन्वय समिति का गठन किया है। इस समिति में सिंचाई विभाग के अधिकारी, सीडब्ल्यूपीआरएस के प्रतिनिधि, डिजाइन फर्म के प्रतिनिधि और अन्य तकनीकी एजेंसियों के सदस्य शामिल हैं।
समिति को यह सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपा गया है कि परीक्षण शीघ्रता से संपन्न हों, आवश्यक डेटा समय पर उपलब्ध कराया जाए और सभी सहभागी एजेंसियों के साथ प्रभावी समन्वय बनाए रखा जाए।
सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठा रही है कि यह पूरी प्रक्रिया केंद्रीय स्तर पर विशेषज्ञों की देखरेख में तकनीकी मानकों का कड़ाई से पालन करते हुए संपन्न हो। आवश्यकता पड़ने पर इस समिति में एक विशेष तकनीकी विशेषज्ञ दल को शामिल करने की संभावना भी है।
सभी परीक्षणों के परिणाम प्राप्त होने और आंकड़ों के व्यापक विश्लेषण के बाद डिजाइन फर्म मौजूदा संरचनात्मक दोषों की पहचान करेगी और जीर्णोद्धार कार्य के लिए नए डिजाइन तैयार करेगी।