लक्ष्य सेन ने हाइलो ओपन 2026 जीता, जोनाथन क्रिस्टी को 21-17, 21-10 से हराया
सारांश
मुख्य बातें
लक्ष्य सेन ने जर्मनी के सारब्रुकन में आयोजित हाइलो ओपन सुपर 500 बैडमिंटन टूर्नामेंट का मेंस सिंगल्स खिताब जीत लिया। रविवार, 1 नवंबर 2026 को खेले गए फाइनल में भारतीय शटलर ने इंडोनेशिया के जोनाथन क्रिस्टी को 21-17, 21-10 से पराजित किया। इससे पहले विमेंस सिंगल्स में पीवी सिंधु ने खिताब जीतकर भारत के लिए दोहरी सफलता का रास्ता खोला था, और लक्ष्य ने उसे पूरा करते हुए एक यादगार डबल की नींव रखी।
मुकाबले का विवरण
पहले गेम में लक्ष्य ने आक्रामक शुरुआत करते हुए जल्द ही 8-4 की बढ़त बना ली। क्रिस्टी ने स्कोर 9-8 करके वापसी की कोशिश की, लेकिन एक निर्णायक रैली में नेट कॉर्ड का फायदा उठाते हुए लक्ष्य ने पुनः बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद भारतीय खिलाड़ी अपनी लय में आ गए और दमदार स्मैश व सटीक शॉट्स की बदौलत स्कोर 16-10 और फिर 18-12 तक ले गए। क्रिस्टी की सर्विस गलती से लक्ष्य को तीन गेम प्वाइंट्स मिले और जब इंडोनेशियाई खिलाड़ी का शॉट नेट में लगा, तो पहला गेम 21-17 से भारत के नाम हो गया।
दूसरे गेम में एकतरफा प्रदर्शन
दूसरे गेम में लक्ष्य ने 6-3 की शुरुआती बढ़त बनाई और इंटरवल तक 4 अंकों की बढ़त कायम रखी। कोर्ट बदलने के बाद क्रिस्टी ने दबाव बनाने की कोशिश की और स्कोर 16-9 तक पहुँचाया, लेकिन वे लय में वापस नहीं आ सके। इंडोनेशियाई खिलाड़ी के एक गलत 'लाइन कॉल' को वीडियो रिव्यू के ज़रिए पलटा गया, जिससे लक्ष्य को 10 चैंपियनशिप प्वाइंट्स मिले। अंततः क्रिस्टी की नेट फॉल्ट के साथ लक्ष्य ने मैच 21-10 से अपने नाम कर लिया।
लक्ष्य के करियर का संदर्भ
कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 के चैंपियन लक्ष्य सेन क्रिस्टी के खिलाफ पिछले चार में से तीन मुकाबले गँवा चुके थे। हालाँकि, पेरिस ओलंपिक में उन्होंने क्रिस्टी को पराजित किया था, जिससे उनका आत्मविश्वास कायम था। गौरतलब है कि 2025 में लक्ष्य ऑस्ट्रेलियन ओपन जीत चुके हैं और हांगकांग ओपन में उपविजेता रहे हैं। इस साल की शुरुआत में वे ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप में भी उपविजेता रहे थे।
भारत के लिए दोहरी जीत का महत्त्व
एक ही टूर्नामेंट में पीवी सिंधु और लक्ष्य सेन दोनों का खिताब जीतना भारतीय बैडमिंटन के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय शटलर अंतरराष्ट्रीय सर्किट पर निरंतर अपनी मज़बूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। हाइलो ओपन सुपर 500 का खिताब लक्ष्य की बढ़ती परिपक्वता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके आत्मविश्वास का प्रमाण है।
आगे क्या
इस जीत के साथ लक्ष्य के BWF वर्ल्ड टूर रैंकिंग में सुधार की उम्मीद है। भारतीय बैडमिंटन प्रशंसक अब आगामी सीज़न में उनसे और बेहतर प्रदर्शन की अपेक्षा रखेंगे, जहाँ वे शीर्ष वैश्विक शटलरों की सूची में अपनी जगह और मज़बूत कर सकते हैं।