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स्टिंग विवाद: कुमारस्वामी का सोमवार को बड़े खुलासे का ऐलान, बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर पर जमकर बरसे

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स्टिंग विवाद: कुमारस्वामी का सोमवार को बड़े खुलासे का ऐलान, बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर पर जमकर बरसे

सारांश

स्टिंग ऑपरेशन मामले में कुमारस्वामी के दिल्ली आवास पर मोबाइल एक्सचेंज का पुलिस का दावा और कुमारस्वामी का पलटवार — यह केंद्र बनाम राज्य की राजनीतिक जंग का नया मोर्चा है। सोमवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दस्तावेजी सबूतों का वादा इस विवाद को और गहरा कर सकता है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री एच.डी.
कुमारस्वामी ने 1 नवंबर 2026 को बेंगलुरु पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह और कर्नाटक सरकार पर तीखा हमला बोला।
पुलिस आयुक्त का दावा: कुमारस्वामी के दिल्ली आवास पर मोबाइल फोन का आदान-प्रदान हुआ; रितेश पांडे नाम का व्यक्ति वहाँ रुका था।
कुमारस्वामी ने 2 नवंबर, सुबह 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दस्तावेजी सबूत पेश करने का ऐलान किया।
गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि तकनीकी साक्ष्य मिले हैं और किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मामले में कोर्ट से स्टे ऑर्डर प्राप्त किया है।

केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने 1 नवंबर 2026 को बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह और कर्नाटक सरकार पर तीखा प्रहार किया। यह प्रतिक्रिया तब आई जब पुलिस आयुक्त ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन मामले की जांच में कुमारस्वामी के दिल्ली स्थित आवास से एक संदिग्ध कड़ी का उल्लेख किया। कुमारस्वामी ने घोषणा की कि वे सोमवार, 2 नवंबर को सुबह 11 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे और दस्तावेजी सबूतों के साथ 'असली तस्वीर' सार्वजनिक करेंगे।

पुलिस कमिश्नर पर सीधा निशाना

कुमारस्वामी ने बेंगलुरु पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह पर बेबाक हमला करते हुए कहा, 'यह कमिश्नर कौन है? क्या वह पुलिस कमिश्नर है या कोई हेड क्लर्क? वह एक क्लर्क की तरह बर्ताव कर रहा है। अपनी कुर्सी और पद को बचाने के लिए, वह किसी के इशारे पर ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयान दे रहा है।' उन्होंने यह भी कहा कि इस सरकार का प्रशासनिक तंत्र और उसके अधिकारी उन्हें 'इतनी आसानी से न छू सकते हैं और न उनका कुछ बिगाड़ सकते हैं।'

मुख्य घटनाक्रम: मोबाइल एक्सचेंज का आरोप

एक बड़ा मोड़ तब आया जब पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने रविवार को दावा किया कि जांचकर्ताओं को ऐसे साक्ष्य मिले हैं जो बताते हैं कि कथित स्टिंग ऑपरेशन मामले के सिलसिले में कुमारस्वामी के आवास पर एक मोबाइल फोन का आदान-प्रदान हुआ था। पुलिस आयुक्त के अनुसार, रितेश पांडे नाम का एक व्यक्ति कुमारस्वामी के पते पर रुका था और प्रज्वल प्रसाद के कहने पर एक वीडियो अपलोड किया गया था।

गौरतलब है कि कुमारस्वामी ने इससे पहले जांच में अपना नाम आने पर पुलिस कमिश्नर कार्यालय का घेराव किया था और पुलिस महानिदेशक (DGP) के कार्यालय तक मार्च भी निकाला था।

कर्नाटक सरकार की प्रतिक्रिया

राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने कलबुर्गी में मीडिया से बात करते हुए कहा कि तकनीकी सबूत और अहम दस्तावेज सामने आए हैं, और जो भी इसमें संलिप्त पाया जाएगा — चाहे उसका कितना भी प्रभाव या पद क्यों न हो — उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि जांच में यह देखा जा रहा है कि मामला कहां से शुरू हुआ और इसे किसने रचा।

खड़गे ने आरोप लगाया कि कुमारस्वामी और उनके करीबी सहयोगियों के साथ काम करने वाले लोग पूछताछ के लिए सामने नहीं आ रहे हैं और उन्होंने सवाल उठाया कि कुमारस्वामी ने अपने सहयोगियों से जांच में सहयोग करने के लिए क्यों नहीं कहा।

सिद्धारमैया खेमे की स्थिति

पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस मामले में कोर्ट से स्टे ऑर्डर प्राप्त किया है। उनके पुत्र यतींद्र सिद्धारमैया ने आरोप लगाया है कि यह स्टिंग ऑपरेशन उनके पिता को ब्लैकमेल करने और उनकी छवि धूमिल करने की एक सुनियोजित कोशिश थी। इन आरोपों पर कुमारस्वामी ने अपने समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि उन्हें घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

क्या होगा आगे

आईटी और बीटी मंत्री प्रियांक खड़गे के 'अभी तो सिर्फ ट्रेलर आया है' वाले बयान पर पलटवार करते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि उन्हें किसी से फिल्म बनाना सीखने की जरूरत नहीं, क्योंकि वह खुद एक अनुभवी फिल्म प्रोड्यूसर हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, 'मैं सोमवार सुबह 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करूंगा और असली तस्वीर सबके सामने रखूंगा' — साथ ही दस्तावेजी सबूत पेश करने का वादा किया जो कथित रूप से बताएंगे कि जांच की आंच किस-किस तक पहुंचेगी और राज्य सरकार किसे बचा रही है। यह विवाद कर्नाटक की राजनीति में एक नए टकराव का संकेत दे रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अगर नहीं निकले तो उनकी अपनी विश्वसनीयता दांव पर होगी। मुख्यधारा की कवरेज जो अनदेखी कर रही है, वह यह है कि एफआईआर में 'प्रचार अभियान' और उसके सूत्रधारों का उल्लेख जांच को एक मीडिया-राजनीतिक षड्यंत्र की दिशा में ले जाता है — जो 2024 के विधानसभा चुनाव नतीजों की पृष्ठभूमि में और भी अहम हो जाता है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुमारस्वामी से जुड़ा स्टिंग ऑपरेशन विवाद क्या है?
यह पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ एक कथित स्टिंग ऑपरेशन से जुड़ा मामला है, जिसकी जांच के दौरान बेंगलुरु पुलिस आयुक्त ने केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के दिल्ली आवास पर मोबाइल फोन एक्सचेंज और एक संदिग्ध व्यक्ति के ठहरने का दावा किया है। कुमारस्वामी ने इन आरोपों को सियासी दुर्भावना बताते हुए खारिज किया है।
बेंगलुरु पुलिस आयुक्त ने क्या दावा किया?
पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने रविवार को कहा कि जांच में साक्ष्य मिले हैं कि कुमारस्वामी के आवास पर एक मोबाइल फोन का आदान-प्रदान हुआ। उन्होंने बताया कि रितेश पांडे नाम का एक व्यक्ति वहाँ रुका था और प्रज्वल प्रसाद के कहने पर एक वीडियो अपलोड किया गया था।
कुमारस्वामी 2 नवंबर को क्या खुलासा करने वाले हैं?
केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने वादा किया है कि सोमवार, 2 नवंबर को सुबह 11 बजे की प्रेस कॉन्फ्रेंस में वे दस्तावेजी सबूत पेश करेंगे। उनका कहना है कि ये सबूत बताएंगे कि स्टिंग की जांच की आंच किस-किस तक पहुंचेगी, राज्य सरकार किसे बचा रही है और जांच वास्तव में किस दिशा में जा रही है।
कर्नाटक सरकार का इस मामले में क्या रुख है?
गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा है कि जांच में तकनीकी साक्ष्य और महत्वपूर्ण दस्तावेज सामने आए हैं और किसी भी दोषी को नहीं बख्शा जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुमारस्वामी के करीबी सहयोगी पूछताछ से बच रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके परिवार का क्या कहना है?
पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस मामले में कोर्ट से स्टे ऑर्डर प्राप्त किया है। उनके पुत्र यतींद्र सिद्धारमैया ने आरोप लगाया है कि यह स्टिंग ऑपरेशन उनके पिता को ब्लैकमेल करने और उनकी छवि खराब करने के लिए रचा गया था।
राष्ट्र प्रेस
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