15 अक्टूबर 2026
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कुमारस्वामी का बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर कार्यालय के बाहर धरना, कर्नाटक स्टिंग मामले में जांच की माँग

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कुमारस्वामी का बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर कार्यालय के बाहर धरना, कर्नाटक स्टिंग मामले में जांच की माँग

सारांश

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर कार्यालय की सीढ़ियों पर धरना दे दिया — कर्नाटक के कथित स्टिंग ऑपरेशन मामले में जज की निगरानी में जांच की माँग के साथ। राज्य सरकार को खुली चुनौती देते हुए उन्होंने कहा: जांच मुझसे ही शुरू करें।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने 15 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर कार्यालय के बाहर जनता दल (सेक्युलर) नेताओं के साथ धरना दिया।
उन्होंने पुलिस कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह के साथ करीब 30 मिनट की बैठक की।
कुमारस्वामी ने कथित स्टिंग ऑपरेशन की जांच किसी रिटायर्ड या मौजूदा जज की निगरानी में कराने की माँग रखी; सीबीआई जांच की आवश्यकता से इनकार किया।
उन्होंने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और गृह मंत्री प्रियांक खड़गे पर पुलिस और सरकारी तंत्र के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया।
कुमारस्वामी ने कहा वे जरूरत पड़ने पर दो दिन तक धरने पर बैठने और खुद गिरफ्तारी देने को तैयार हैं।

केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में पुलिस कमिश्नर कार्यालय की सीढ़ियों पर धरना देकर कर्नाटक के कथित स्टिंग ऑपरेशन मामले में निष्पक्ष जांच की माँग की। जनता दल (सेक्युलर) के नेताओं के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए कुमारस्वामी ने राज्य सरकार को खुली चुनौती दी कि वे जांच की शुरुआत उन्हीं से करें।

धरने का घटनाक्रम

बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह से करीब 30 मिनट की बैठक के बाद कुमारस्वामी ने कार्यालय की सीढ़ियों पर बैठकर अपना विरोध जारी रखा। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो वे वहाँ दो दिन तक बैठने को तैयार हैं।

धरना स्थल पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, 'आज गृह मंत्री कह रहे हैं कि मेरे और मेरे कार्यकर्ताओं के खिलाफ जांच होगी। वे दावा करते हैं कि उनके पास जानकारी है तो उन्हें जांच करने दें।'

सरकार पर लगाए आरोप

कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार कथित स्टिंग ऑपरेशन में सीधे तौर पर शामिल लोगों को तो वीआईपी जैसा बर्ताव दे रही है, जबकि उन पर और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर शक किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'वे जानते हैं कि यह किसने किया है। वे इसमें सीधे तौर पर शामिल लोगों को वीआईपी जैसा बर्ताव दे रहे हैं, जबकि मुझ पर शक कर रहे हैं।'

उन्होंने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और गृह मंत्री प्रियांक खड़गे से माँग की कि मामले की उचित जांच सुनिश्चित की जाए। अपने तीखे तेवर में उन्होंने कहा, 'अगर आपमें हिम्मत है तो किसी रिटायर्ड जज से जांच करवाएं। मुझे छूने की हिम्मत करके तो देखिए, फिर आंदोलन शुरू हो जाएगा।'

जांच की माँग और शर्तें

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुमारस्वामी ने कथित स्टिंग ऑपरेशन की जांच किसी रिटायर्ड या मौजूदा जज की निगरानी में कराने की माँग रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें सीबीआई जांच की कोई जरूरत नहीं है, बशर्ते कि जांच निष्पक्ष न्यायिक देखरेख में हो।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके कार्यकर्ताओं ने कोई गलत काम किया है तो वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे — और वे खुद बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर के दफ्तर आकर गिरफ्तारी देने को भी तैयार हैं।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह विरोध प्रदर्शन कर्नाटक में कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर गहराते राजनीतिक तनाव की पृष्ठभूमि में हुआ है। कुमारस्वामी लगातार राज्य की कांग्रेस सरकार पर पुलिस और सरकारी तंत्र के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाते आ रहे हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और कर्नाटक राज्य सरकार के बीच पहले से राजनीतिक टकराव का माहौल है।

अपनी आक्रामक भाषा के लिए उन्होंने जनता से माफी भी माँगी, लेकिन साथ ही कहा कि उन्होंने पहले कभी इस स्तर तक गिरकर बात नहीं की — और राज्य के हित दांव पर लगे हैं।

आगे की राह

जनता दल (सेक्युलर) ने अपना विरोध जारी रखने का संकल्प लिया है। मामले की न्यायिक जांच की माँग अब राज्य सरकार के लिए एक राजनीतिक दबाव बिंदु बन चुकी है। आने वाले दिनों में कर्नाटक सरकार की प्रतिक्रिया और संभावित जांच की रूपरेखा पर सबकी नजर रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो संघीय राजनीति के बढ़ते तनाव को उजागर करती है। उल्लेखनीय यह है कि कुमारस्वामी एक तरफ जांच की माँग कर रहे हैं और दूसरी तरफ खुद गिरफ्तारी की चुनौती दे रहे हैं — यह दोधारी रणनीति जनमत को अपने पक्ष में करने की कोशिश है। मुख्यधारा की कवरेज इस बात को नजरअंदाज कर रही है कि स्टिंग ऑपरेशन के मूल आरोपों की सत्यता और जिम्मेदारी अभी तक सार्वजनिक रूप से स्थापित नहीं हुई है। असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार न्यायिक जांच का रास्ता चुनेगी, या यह विवाद केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सिमटकर रह जाएगा।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक स्टिंग ऑपरेशन मामला क्या है?
कर्नाटक में एक कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर राजनीतिक विवाद उठा है, जिसमें जनता दल (सेक्युलर) और राज्य की कांग्रेस सरकार आमने-सामने हैं। केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की माँग करते हुए आरोप लगाया है कि सरकार उन्हें और उनकी पार्टी को निशाना बना रही है।
कुमारस्वामी ने धरना क्यों दिया?
कुमारस्वामी ने राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे के उस बयान के विरोध में धरना दिया, जिसमें उनके और उनके कार्यकर्ताओं के खिलाफ जांच की बात कही गई थी। उनका आरोप है कि सरकार स्टिंग ऑपरेशन में सीधे शामिल लोगों को बचाते हुए उन्हें राजनीतिक कारणों से निशाना बना रही है।
कुमारस्वामी ने जांच के लिए क्या माँग रखी है?
कुमारस्वामी ने कथित स्टिंग ऑपरेशन की जांच किसी रिटायर्ड या मौजूदा जज की निगरानी में कराने की माँग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीबीआई जांच की कोई जरूरत नहीं है, बशर्ते कि जांच न्यायिक निगरानी में हो।
राज्य सरकार की प्रतिक्रिया क्या है?
गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने संकेत दिया है कि कुमारस्वामी और उनके कार्यकर्ताओं के खिलाफ जांच की जाएगी। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की ओर से इस विशेष विरोध प्रदर्शन पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
इस मामले का आगे क्या होगा?
जनता दल (सेक्युलर) ने अपना विरोध जारी रखने का संकल्प लिया है। कुमारस्वामी ने कहा है कि वे जरूरत पड़ने पर दो दिन तक धरने पर बैठ सकते हैं और खुद गिरफ्तारी देने को भी तैयार हैं। मामले में न्यायिक जांच की माँग को लेकर राज्य सरकार का अगला कदम निर्णायक होगा।
राष्ट्र प्रेस
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