स्टिंग ऑपरेशन विवाद: कुमारस्वामी ने DGP कार्यालय तक पदयात्रा की, सिद्धारमैया से पूछा — 'खून नहीं खौलता?'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को सैकड़ों जनता दल (सेक्युलर) कार्यकर्ताओं के साथ बेंगलुरु में पुलिस महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक (DGP-IGP) एमए सलीम के कार्यालय तक पदयात्रा का नेतृत्व किया। इस मार्च का मकसद स्टिंग ऑपरेशन विवाद में कथित तौर पर संलिप्त लोगों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई और गिरफ्तारी की माँग करना था। कुमारस्वामी ने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस कार्य समिति (CWC) सदस्य सिद्धारमैया की इस मामले पर मौन प्रतिक्रिया पर तीखे सवाल उठाए।
मुख्य घटनाक्रम
DGP-IGP कार्यालय के प्रवेश द्वार पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने बैरिकेड लगा दिए। प्रदर्शनकारियों को प्रवेश द्वार से हटाकर एक कोने में ले जाया गया, जहाँ वे 'हमें न्याय चाहिए' के नारे लगाते रहे। कुमारस्वामी के साथ पार्टी के विधायक और पूर्व विधायक भी इस मार्च में शामिल हुए।
DGP सलीम से मुलाकात के बाद कुमारस्वामी ने पत्रकारों को बताया कि सौंपे गए ज्ञापन में विवाद से संबंधित घटनाओं का विस्तृत विवरण दर्ज किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने इस पूरे मामले पर 'आँखें मूंद ली हैं।'
स्टिंग ऑपरेशन पर कुमारस्वामी के सवाल
कुमारस्वामी ने कहा कि स्टिंग ऑपरेशन का मकसद कथित तौर पर सिद्धारमैया की छवि को नुकसान पहुँचाना था। उन्होंने यह भी बताया कि उक्त वीडियो में पूर्व मुख्यमंत्री स्वयं उपस्थित नहीं हैं — इसमें कथित तौर पर दो या तीन अन्य लोगों के बीच बातचीत दिख रही है।
उन्होंने सवाल किया कि वीडियो में दिख रहा मीडियाकर्मी स्टिंग का दावा करता है, लेकिन यह वीडियो सिद्धारमैया के नाम से क्यों प्रचारित किया गया। इसके अलावा उन्होंने वीडियो में दिख रही एक महिला और सिद्धारमैया के बारे में की गई टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई, और पूछा कि महिला से यह क्यों पूछा गया कि उसने सिद्धारमैया के साथ कितने घंटे बिताए।
सिद्धारमैया को सीधा संदेश
कुमारस्वामी ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को सीधे संबोधित करते हुए पूछा, 'क्या यह सब देखकर आपका खून नहीं खौल रहा?' उन्होंने याद दिलाया कि दोनों नेताओं ने अतीत में साथ मिलकर काम किया है और कई प्रमुख मुद्दों पर राजनीतिक मतभेद भी रखे हैं, लेकिन इस विवाद में उनकी प्रतिक्रिया अपेक्षित स्तर से नीचे रही है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह मुद्दा केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी जेडी(एस)-भारतीय जनता पार्टी (BJP) गठबंधन के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ऊँचा है। गौरतलब है कि सिद्धारमैया कर्नाटक के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और CWC सदस्य के रूप में राष्ट्रीय राजनीति में भी सक्रिय हैं। कुमारस्वामी का यह कदम जेडी(एस) की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वे कांग्रेस सरकार को राज्य में कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर घेरने की कोशिश कर रहे हैं।
आगे क्या होगा
DGP कार्यालय को सौंपे गए ज्ञापन के आधार पर पुलिस की प्रतिक्रिया पर अब सभी की नज़र होगी। कुमारस्वामी ने संकेत दिया कि यदि कार्रवाई नहीं होती, तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा। यह विवाद आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति को गर्माए रखने की पूरी संभावना है।