18 अक्टूबर 2026
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स्टिंग ऑपरेशन विवाद: कुमारस्वामी ने DGP कार्यालय तक पदयात्रा की, सिद्धारमैया से पूछा — 'खून नहीं खौलता?'

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स्टिंग ऑपरेशन विवाद: कुमारस्वामी ने DGP कार्यालय तक पदयात्रा की, सिद्धारमैया से पूछा — 'खून नहीं खौलता?'

सारांश

केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने बेंगलुरु में सैकड़ों जेडी(एस) कार्यकर्ताओं के साथ DGP कार्यालय तक पदयात्रा की और स्टिंग ऑपरेशन विवाद में गिरफ्तारी की माँग की। उन्होंने सिद्धारमैया की चुप्पी पर सीधा सवाल दागा — 'क्या खून नहीं खौल रहा?' — और राज्य सरकार पर मामले को दबाने का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने 17 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में DGP-IGP कार्यालय तक पदयात्रा का नेतृत्व किया।
स्टिंग ऑपरेशन विवाद में कथित रूप से संलिप्त लोगों की त्वरित गिरफ्तारी की माँग करते हुए DGP एमए सलीम को ज्ञापन सौंपा गया।
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने इस मामले पर 'आँखें मूंद ली हैं।' उन्होंने कहा कि विवादित वीडियो में सिद्धारमैया स्वयं मौजूद नहीं हैं, फिर भी इसे उनके नाम से प्रचारित किया गया।
पुलिस ने DGP कार्यालय प्रवेश द्वार पर बैरिकेड लगाए; प्रदर्शनकारियों ने 'हमें न्याय चाहिए' के नारे लगाए।

केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को सैकड़ों जनता दल (सेक्युलर) कार्यकर्ताओं के साथ बेंगलुरु में पुलिस महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक (DGP-IGP) एमए सलीम के कार्यालय तक पदयात्रा का नेतृत्व किया। इस मार्च का मकसद स्टिंग ऑपरेशन विवाद में कथित तौर पर संलिप्त लोगों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई और गिरफ्तारी की माँग करना था। कुमारस्वामी ने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस कार्य समिति (CWC) सदस्य सिद्धारमैया की इस मामले पर मौन प्रतिक्रिया पर तीखे सवाल उठाए।

मुख्य घटनाक्रम

DGP-IGP कार्यालय के प्रवेश द्वार पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने बैरिकेड लगा दिए। प्रदर्शनकारियों को प्रवेश द्वार से हटाकर एक कोने में ले जाया गया, जहाँ वे 'हमें न्याय चाहिए' के नारे लगाते रहे। कुमारस्वामी के साथ पार्टी के विधायक और पूर्व विधायक भी इस मार्च में शामिल हुए।

DGP सलीम से मुलाकात के बाद कुमारस्वामी ने पत्रकारों को बताया कि सौंपे गए ज्ञापन में विवाद से संबंधित घटनाओं का विस्तृत विवरण दर्ज किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने इस पूरे मामले पर 'आँखें मूंद ली हैं।'

स्टिंग ऑपरेशन पर कुमारस्वामी के सवाल

कुमारस्वामी ने कहा कि स्टिंग ऑपरेशन का मकसद कथित तौर पर सिद्धारमैया की छवि को नुकसान पहुँचाना था। उन्होंने यह भी बताया कि उक्त वीडियो में पूर्व मुख्यमंत्री स्वयं उपस्थित नहीं हैं — इसमें कथित तौर पर दो या तीन अन्य लोगों के बीच बातचीत दिख रही है।

उन्होंने सवाल किया कि वीडियो में दिख रहा मीडियाकर्मी स्टिंग का दावा करता है, लेकिन यह वीडियो सिद्धारमैया के नाम से क्यों प्रचारित किया गया। इसके अलावा उन्होंने वीडियो में दिख रही एक महिला और सिद्धारमैया के बारे में की गई टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई, और पूछा कि महिला से यह क्यों पूछा गया कि उसने सिद्धारमैया के साथ कितने घंटे बिताए।

सिद्धारमैया को सीधा संदेश

कुमारस्वामी ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को सीधे संबोधित करते हुए पूछा, 'क्या यह सब देखकर आपका खून नहीं खौल रहा?' उन्होंने याद दिलाया कि दोनों नेताओं ने अतीत में साथ मिलकर काम किया है और कई प्रमुख मुद्दों पर राजनीतिक मतभेद भी रखे हैं, लेकिन इस विवाद में उनकी प्रतिक्रिया अपेक्षित स्तर से नीचे रही है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह मुद्दा केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी जेडी(एस)-भारतीय जनता पार्टी (BJP) गठबंधन के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ऊँचा है। गौरतलब है कि सिद्धारमैया कर्नाटक के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और CWC सदस्य के रूप में राष्ट्रीय राजनीति में भी सक्रिय हैं। कुमारस्वामी का यह कदम जेडी(एस) की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वे कांग्रेस सरकार को राज्य में कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर घेरने की कोशिश कर रहे हैं।

आगे क्या होगा

DGP कार्यालय को सौंपे गए ज्ञापन के आधार पर पुलिस की प्रतिक्रिया पर अब सभी की नज़र होगी। कुमारस्वामी ने संकेत दिया कि यदि कार्रवाई नहीं होती, तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा। यह विवाद आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति को गर्माए रखने की पूरी संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि जेडी(एस) की उस सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है जो कांग्रेस सरकार को कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर कटघरे में खड़ा करना चाहती है। दिलचस्प बात यह है कि वे सिद्धारमैया की 'प्रतिक्रियाहीनता' को भी उतनी ही शिद्दत से निशाना बना रहे हैं जितना कि कथित स्टिंग ऑपरेशन को — यह संकेत करता है कि असली राजनीतिक दाँव सिद्धारमैया की साख पर है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब कर्नाटक में कांग्रेस पहले से ही कई मोर्चों पर दबाव में है। सवाल यह है कि DGP कार्यालय को सौंपा गया ज्ञापन ठोस जाँच की दिशा में जाएगा या राजनीतिक दबाव की फाइलों में दब जाएगा।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्टिंग ऑपरेशन विवाद क्या है जिसपर कुमारस्वामी ने पदयात्रा की?
यह एक कथित स्टिंग वीडियो से जुड़ा विवाद है जिसमें कथित तौर पर दो-तीन लोगों के बीच बातचीत दर्ज की गई है और इसे पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नाम से प्रचारित किया गया, जबकि कुमारस्वामी के अनुसार सिद्धारमैया उस वीडियो में मौजूद नहीं हैं। कुमारस्वामी का आरोप है कि इसका उद्देश्य कथित तौर पर सिद्धारमैया की छवि को नुकसान पहुँचाना था।
कुमारस्वामी ने DGP कार्यालय में क्या माँग की?
कुमारस्वामी ने DGP-IGP एमए सलीम को ज्ञापन सौंपकर स्टिंग ऑपरेशन विवाद में कथित रूप से संलिप्त लोगों की त्वरित गिरफ्तारी और कार्रवाई की माँग की। उन्होंने यह भी माँग की कि यह पता लगाया जाए कि वीडियो किन परिस्थितियों में रिकॉर्ड किया गया था।
कुमारस्वामी ने सिद्धारमैया पर क्या आरोप लगाया?
कुमारस्वामी ने सिद्धारमैया की प्रतिक्रिया पर निराशा व्यक्त करते हुए पूछा कि 'क्या यह सब देखकर आपका खून नहीं खौल रहा?' उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल एक व्यक्ति का नहीं है और इसका गंभीरता से जवाब देना आवश्यक है।
क्या राज्य सरकार ने इस विवाद पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
कुमारस्वामी के अनुसार राज्य सरकार ने इस मामले पर 'आँखें मूंद ली हैं।' DGP कार्यालय को सौंपे गए ज्ञापन के बाद पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया का अभी इंतज़ार है।
इस विवाद का कर्नाटक की राजनीति पर क्या असर होगा?
यह घटना कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और जेडी(एस)-BJP गठबंधन के बीच राजनीतिक तनाव को और गहरा कर सकती है। जेडी(एस) इस मुद्दे को राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था विफलता के रूप में प्रस्तुत कर रही है, और यदि पुलिस कार्रवाई नहीं होती तो कुमारस्वामी ने आंदोलन तेज़ करने के संकेत दिए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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