क्या एआईएडीएमके सरकारी कर्मचारियों को 'गुमराह' कर रही है? सीपीआई (एम) ने पुरानी पेंशन योजना पर ईपीएस की आलोचना की

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क्या एआईएडीएमके सरकारी कर्मचारियों को 'गुमराह' कर रही है? सीपीआई (एम) ने पुरानी पेंशन योजना पर ईपीएस की आलोचना की

सारांश

तमिलनाडु में पुरानी पेंशन योजना के मुद्दे पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पी. शनमुगम ने पलानीस्वामी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि एआईएडीएमके सरकारी कर्मचारियों को जानबूझकर गुमराह कर रही है। जानें इस विवाद के पीछे की सच्चाई और राजनीतिक खेल के प्रभाव।

मुख्य बातें

सीपीआई (मार्क्सवादी) ने पलानीस्वामी पर आरोप लगाया कि वह सरकारी कर्मचारियों को गुमराह कर रहे हैं।
एआईएडीएमके ने 2003 में पुरानी पेंशन योजना को समाप्त किया था।
डीएमके ने पेंशन योजना को बहाल करने का वादा किया है।

चेन्नई, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु में पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) पर चर्चा रविवार को और अधिक गर्म हो गई, जब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्य सचिव पी. शनमुगम ने के. पलानीस्वामी (ईपीएस) पर तीखे आरोप लगाते हुए कहा कि वह राजनीतिक लाभ के लिए सरकारी कर्मचारियों को जानबूझकर गुमराह कर रहे हैं।

शनमुगम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में पलानीस्वामी के उस आरोप का उत्तर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि सत्तारूढ़ द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (डीएमके) ने पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने के दावे के साथ सरकारी कर्मचारियों को धोखा दिया है।

सीपीआई (एम) नेता ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ये आरोप बुनियादी तथ्यों की अनदेखी करते हैं और राज्य में पेंशन सुधारों के इतिहास को विकृत करने का प्रयास करते हैं।

उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के नेतृत्व में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) सरकार के दौरान 1 अप्रैल, 2003 से पुरानी पेंशन योजना को पहली बार समाप्त किया गया था।

उन्होंने सवाल किया, "जब एआईएडीएमके ने खुद इस योजना को रद्द कर दिया, तो पलानीस्वामी किस आधार पर डीएमके पर विश्वासघात का आरोप लगा रहे हैं?"

शनमुगम ने कहा कि पलानीस्वामी ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने का प्रयास क्यों नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि एआईएडीएमके ने अभी तक सार्वजनिक घोषणाओं में स्पष्ट वादा नहीं किया है कि यदि वे सत्ता में वापस आते हैं, तो इस योजना को बहाल किया जाएगा।

इस अनिच्छा ने "सरकारी कर्मचारियों के प्रति विपक्ष की प्रतिबद्धता की कमी को उजागर किया।"

डीएमके सरकार द्वारा घोषित निश्चित पेंशन योजना का जिक्र करते हुए शनमुगम ने कहा कि विपक्ष ने इस योजना की कोई ठोस आलोचना नहीं की है।

उन्होंने तर्क किया कि पलानीस्वामी की आपत्तियां मुख्य रूप से कर्मचारियों से 10 प्रतिशत अंशदान की आवश्यकता वाले प्रावधानों तक ही सीमित थीं, जबकि योजना द्वारा प्रदान किए जाने वाले व्यापक सामाजिक सुरक्षा लाभों की अनदेखी की गई थी।

शनमुगम ने पेंशन के मुद्दों पर बोलने के लिए एआईएडीएमके नेता के नैतिक अधिकार पर भी सवाल उठाया, यह बताते हुए कि पार्टी भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन में है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर पुरानी पेंशन योजना को समाप्त कर दिया था।

उन्होंने कहा, "देशभर में ओपीएस को खत्म करने वालों के साथ गठबंधन करने वाली पार्टी को कर्मचारियों को पेंशन अधिकारों पर उपदेश देने की कोई विश्वसनीयता नहीं है।"

शनमुगम ने पलानीस्वामी पर कार्रवाई के बजाय आरोपों पर निर्भर रहने का आरोप लगाया और सरकारी कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे गंभीरता से विचार करें कि तमिलनाडु में पेंशन सुरक्षा को खत्म करने के लिए कौन जिम्मेदार था और कौन इसे फिर से स्थापित करने का प्रयास कर रहा था।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि पुरानी पेंशन योजना पर विवाद केवल एक राजनीतिक खेल है। सभी पक्षों को अपने अपने हितों की रक्षा करनी होती है और ऐसे में सरकारी कर्मचारियों के हित पीछे रह जाते हैं। यह समय है कि सभी पार्टियां मिलकर एक सकारात्मक समाधान की ओर बढ़ें।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या एआईएडीएमके ने पुरानी पेंशन योजना को समाप्त किया?
जी हां, एआईएडीएमके ने 1 अप्रैल, 2003 से पुरानी पेंशन योजना को समाप्त किया था।
सीपीआई (मार्क्सवादी) का क्या कहना है?
सीपीआई (मार्क्सवादी) के नेता पी. शनमुगम ने पलानीस्वामी पर आरोप लगाया है कि वह सरकारी कर्मचारियों को गुमराह कर रहे हैं।
डीएमके की भूमिका क्या है?
डीएमके ने पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने का वादा किया है, लेकिन इस पर विपक्ष ने कोई ठोस आलोचना नहीं की है।
राष्ट्र प्रेस
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