1 नवंबर 2026
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दिल्ली में INDIA गठबंधन रैली के खिलाफ मार्च, व्यापारी और धार्मिक संगठनों ने उठाई दीपावली की दुहाई

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दिल्ली में INDIA गठबंधन रैली के खिलाफ मार्च, व्यापारी और धार्मिक संगठनों ने उठाई दीपावली की दुहाई

सारांश

दीपावली के ठीक पहले INDIA गठबंधन की दिल्ली रैली ने एक नया मोर्चा खोल दिया — व्यापारी, हिंदू और सिख संगठन एकजुट होकर सड़क पर उतरे। तर्क सीधा है: त्योहारी कमाई का मौसम और 1 नवंबर 1984 की दर्दनाक तारीख — दोनों को राजनीतिक रैली से जोड़ना इन संगठनों को मंजूर नहीं।

मुख्य बातें

ग्लोबल वैश्य फेडरेशन , यूनाइटेड हिंदू फ्रंट और दिल्ली सिख समाज समेत कई संगठनों ने 1 नवंबर 2026 को INDIA गठबंधन रैली के विरोध में मार्च निकाला।
जय भगवान गोयल ने कहा कि दीपावली के मौसम में विरोध से व्यापारियों की छह महीने की कमाई की उम्मीदें टूट रही हैं।
प्रदर्शनकारियों ने 1 नवंबर 1984 के सिख-विरोधी दंगों का हवाला देकर इस तारीख पर रैली को संवेदनशील बताया।
एक वक्ता ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर 'विदेशी फंडिंग' पर काम करने का आरोप लगाया — जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
संगठनों ने दीपावली के बाद तक बड़े राजनीतिक प्रदर्शन टालने की माँग की है।

नई दिल्ली, 1 नवंबर 2026 — INDIA गठबंधन की दिल्ली रैली के विरोध में ग्लोबल वैश्य फेडरेशन, यूनाइटेड हिंदू फ्रंट और दिल्ली सिख समाज समेत कई सामाजिक, धार्मिक एवं व्यापारी संगठनों ने शनिवार को संयुक्त प्रतिवाद मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों का मुख्य तर्क था कि दीपावली के त्योहारी मौसम में इस तरह की रैली व्यापारियों और आम नागरिकों के हितों पर सीधी चोट करती है।

मार्च का मुख्य घटनाक्रम

यूनाइटेड हिंदू फ्रंट के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जय भगवान गोयल ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि 'एक महीने से ऊपर समय हो गया है — हमारी दिल्ली को इन राष्ट्र-विरोधियों, सनातन-विरोधियों, व्यापारी-विरोधियों और सिख-विरोधियों ने बंधक बनाकर रखा हुआ है।' उन्होंने माँग की कि यदि विपक्ष को धरना-प्रदर्शन करना है तो वह दीपावली के बाद करे।

गोयल ने कहा, 'यह ऐसा त्योहार है जिसमें हर व्यक्ति कम से कम छह महीने की कमाई की उम्मीद लेकर काम करता है।' उनके अनुसार इस रैली ने व्यापारियों, संत समाज और सिख समाज की भावनाओं की अनदेखी की है।

1 नवंबर और 1984 का संदर्भ

गोयल ने 1 नवंबर 1984 के सिख-विरोधी दंगों का उल्लेख करते हुए यह सवाल उठाया कि इस तारीख पर बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम करना उन दंगों में मारे गए लोगों के 'जख्मों पर नमक डालने' जैसा है। उन्होंने कांग्रेस पर इन घटनाओं की जिम्मेदारी का आरोप लगाया — यह एक राजनीतिक आरोप है जिसे कांग्रेस अस्वीकार करती रही है।

गौरतलब है कि 1984 के दंगों को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों के बीच दशकों से तीखी राजनीतिक बहस चलती रही है। इस संदर्भ में इस तारीख को रैली आयोजित करने का राजनीतिक निहितार्थ दोनों पक्षों के लिए संवेदनशील है।

चुनाव आयोग और EVM विवाद पर प्रतिक्रिया

मार्च में शामिल एक अन्य वक्ता ने कहा कि 'EVM को खराब बताने वाले लोग बैलेट पेपर से हुए चुनावों के नतीजे भी देख चुके हैं।' उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और उनकी पार्टी पर 'विदेशी फंडिंग तथा विदेशी इशारों पर काम करने' का आरोप लगाया — यह एक गंभीर राजनीतिक आरोप है जिसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

वक्ता ने चुनाव आयोग के अधिकारी ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए उनके कार्यों का समर्थन किया और कहा कि उनके विरुद्ध विपक्ष की आलोचना 'एक राष्ट्रभक्त का अपमान' है।

आम जनता और व्यापारियों पर असर

व्यापारी संगठनों का तर्क है कि दीपावली के मौसम में दिल्ली के बाज़ारों में लगातार प्रदर्शनों के कारण ग्राहक कम आ रहे हैं, जिससे छोटे दुकानदारों और फेरीवालों को सीधा नुकसान हो रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली का व्यापारी वर्ग पूरे साल त्योहारी सीजन का इंतजार करता है और अपनी सालाना आमदनी का बड़ा हिस्सा इन्हीं हफ्तों में कमाता है।

आगे की स्थिति

इन संगठनों ने अपना विरोध जारी रखने की चेतावनी दी है जब तक दिल्ली में बड़े राजनीतिक प्रदर्शन स्थगित नहीं होते। INDIA गठबंधन की ओर से इस प्रतिवाद मार्च पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। दोनों पक्षों के बीच यह टकराव दिल्ली की राजनीतिक फिजा को और गर्म कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ व्यापारी वर्ग और धार्मिक संगठन अब एक संगठित काउंटर-नैरेटिव के रूप में उभर रहे हैं। 1 नवंबर 1984 की तारीख का चुनाव दोनों पक्षों के लिए प्रतीकात्मक है और इसे लेकर दोनों तरफ से भावनात्मक दावे हैं जिन्हें तटस्थता से जाँचने की जरूरत है। आरोपों — विशेषकर 'विदेशी फंडिंग' वाले — की पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें महज राजनीतिक बयानबाजी के तौर पर ही देखा जाना चाहिए जब तक साक्ष्य न आएँ। असली सवाल यह है कि क्या दिल्ली का व्यापारी वर्ग वाकई एक स्वतंत्र राजनीतिक शक्ति के रूप में उभर रहा है, या यह विरोध किसी और एजेंडे का मुखौटा है — और इसका जवाब आने वाले हफ्तों की घटनाएँ देंगी।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में INDIA गठबंधन रैली के विरोध में मार्च क्यों निकाला गया?
व्यापारी और धार्मिक संगठनों ने दीपावली के मौसम में INDIA गठबंधन की रैली को व्यापारियों की कमाई और त्योहार की भावनाओं के खिलाफ बताते हुए यह मार्च निकाला। संगठनों का कहना था कि दीपावली के ठीक पहले इस तरह के प्रदर्शन से बाज़ारों की रौनक प्रभावित होती है।
इस मार्च में कौन-से संगठन शामिल हुए?
मार्च में मुख्य रूप से यूनाइटेड हिंदू फ्रंट, ग्लोबल वैश्य फेडरेशन और दिल्ली सिख समाज ने भाग लिया। इसके अलावा कई अन्य सामाजिक, धार्मिक और व्यापारी संगठनों ने भी अपना समर्थन जताया।
जय भगवान गोयल ने रैली के बारे में क्या कहा?
यूनाइटेड हिंदू फ्रंट के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जय भगवान गोयल ने कहा कि दिल्ली को 'राष्ट्र-विरोधियों' ने एक महीने से बंधक बनाया हुआ है और दीपावली के बाद विरोध करने की माँग की। उन्होंने 1 नवंबर 1984 के सिख-विरोधी दंगों का संदर्भ देते हुए इस तारीख पर रैली को संवेदनहीन बताया।
क्या INDIA गठबंधन ने इस विरोध पर कोई प्रतिक्रिया दी?
1 नवंबर 2026 तक INDIA गठबंधन की ओर से इस प्रतिवाद मार्च पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह विवाद दोनों पक्षों के बीच दिल्ली में राजनीतिक तनाव को और गहरा कर सकता है।
व्यापारियों को दीपावली सीजन से इतनी उम्मीद क्यों होती है?
व्यापारी संगठनों के अनुसार दीपावली का मौसम वह समय होता है जब छोटे-बड़े व्यापारी अपनी छह महीने तक की कमाई करते हैं। इस दौरान किसी भी बाधा — चाहे वह राजनीतिक प्रदर्शन हो या यातायात व्यवधान — का सीधा असर उनकी आजीविका पर पड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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