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संबित पात्रा का वार: रामलीला मैदान रैली में 28 हजार कुर्सियाँ, कांग्रेस का 10 लाख भीड़ का दावा झूठा

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संबित पात्रा का वार: रामलीला मैदान रैली में 28 हजार कुर्सियाँ, कांग्रेस का 10 लाख भीड़ का दावा झूठा

सारांश

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने रामलीला मैदान रैली को कांग्रेस के दावों का आईना बताया — 10 लाख की भीड़ बनाम 28 हजार कुर्सियाँ। SIR से लेकर 'मोहब्बत की दुकान' तक, पात्रा ने राहुल गांधी को हर मोर्चे पर घेरा और लोकतंत्र में मेहनत की अपरिहार्यता का पाठ पढ़ाया।

मुख्य बातें

BJP प्रवक्ता संबित पात्रा ने 1 नवंबर 2026 को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इंडिया गठबंधन की रामलीला मैदान रैली पर सवाल उठाए।
कांग्रेस के 10 लाख भीड़ के दावे के विरुद्ध पात्रा ने बताया कि मैदान में केवल 28 हजार कुर्सियाँ लगाई गई थीं, जिनमें से 5 से 7 हजार खाली रहीं।
मैदान का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह खाली था — न कुर्सियाँ, न लोग।
पात्रा ने राहुल गांधी के 2024 लोकसभा चुनाव को अवैध बताने वाले बयान को तर्कों से काटा — मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फरवरी 2025 में कार्यभार संभाला था, चुनाव उससे पहले हो चुके थे।
राहुल गांधी के 'मोहब्बत की दुकान' नारे पर तंज कसते हुए पात्रा ने कहा — 'पीएम का अर्थ पसीना और मेहनत है।'

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने 1 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इंडिया गठबंधन की रामलीला मैदान रैली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने जहाँ 10 लाख लोगों के पहुँचने का दावा किया, वहाँ वास्तव में मैदान में केवल 28 हजार कुर्सियाँ लगाई गई थीं और उनमें से भी 5 से 7 हजार खाली रहीं।

रैली के आँकड़ों पर विवाद

पात्रा ने विस्तार से बताया कि रामलीला मैदान लगभग 10 से 12 एकड़ में फैला हुआ है। उनके अनुसार, मैदान का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा मंच और डी-एरिया ने घेर रखा था, जबकि करीब 40 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह खाली था — वहाँ न कुर्सियाँ लगाई गई थीं और न ही कोई व्यक्ति मौजूद था। उन्होंने कहा कि इन आँकड़ों के आधार पर 10 लाख लोगों का दावा किसी भी तरह सत्यापन-योग्य नहीं है।

एसआईआर विवाद पर BJP का पलटवार

पात्रा ने आगे कहा कि कांग्रेस और कांग्रेस नेता राहुल गांधी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मसले पर भी इसी तरह के भ्रामक दावे पेश कर रहे हैं। उनके अनुसार, कांग्रेस का आरोप है कि मतदाताओं के नाम काटे गए, लेकिन पार्टी को पहले अपने दावों और जमीनी हकीकत के बीच के फर्क का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि रैली की भीड़ संबंधी दावा और SIR संबंधी आरोप — दोनों एक ही पैटर्न का हिस्सा हैं।

राहुल गांधी के 2024 चुनाव वाले बयान पर सवाल

भाजपा प्रवक्ता ने राहुल गांधी के उस बयान पर भी प्रश्न उठाया, जिसमें उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव को अवैध बताते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की माँग की थी। पात्रा ने बताया कि ज्ञानेश कुमार ने फरवरी 2025 में मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यभार संभाला था, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव उससे पहले हो चुके थे। उन्होंने तर्क दिया कि यदि राहुल गांधी के अनुसार वे चुनाव अवैध थे, तो उसी चुनाव के आधार पर मिला उनका नेता प्रतिपक्ष का पद भी अवैध ठहरता है। पात्रा ने यह भी पूछा कि यदि चुनाव में वास्तव में गड़बड़ी थी, तो अब तक अदालत में याचिका क्यों नहीं दाखिल की गई।

'मोहब्बत की दुकान' और नेतृत्व पर तंज

पात्रा ने राहुल गांधी के चर्चित 'मोहब्बत की दुकान' नारे पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता राहुल गांधी को यह दुकान खोलने का लाइसेंस कब मिलेगा, क्योंकि एक ओर वे मोहब्बत की बात करते हैं और दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ, उनके अनुसार, अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा, 'पीएम का अर्थ सिर्फ प्रधानमंत्री नहीं होता — पी से पसीना और एम से मेहनत।' उन्होंने यह भी कहा कि ट्रिक फोटोग्राफी से न कोई नेता बनता है और न प्रधानमंत्री।

लोकतंत्र और परिवारवादी राजनीति पर BJP का हमला

पात्रा ने कांग्रेस पर परिवारवादी राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा, 'यह हिंदुस्तान हिंदुस्तानियों का है — यहाँ चायवाला भी प्रधानमंत्री बन सकता है।' उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की ताकत यही है कि आम पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति भी सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुँच सकता है। यह विवाद दिल्ली में विधानसभा चुनाव की संभावित पृष्ठभूमि में दोनों पक्षों के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव का संकेत देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कांग्रेस की आख्यान-निर्माण की रणनीति पर है — और यह तब आया है जब दिल्ली में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ रही है। गौरतलब है कि 10 लाख बनाम 28 हजार का अंतर कोई मामूली आँकड़ेबाजी नहीं, यह विपक्ष की जनाधार क्षमता पर सीधा प्रश्नचिह्न है। दूसरी ओर, पात्रा का SIR पर पलटवार इस तथ्य को नजरअंदाज करता है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया पर विपक्ष की चिंताएँ केवल कांग्रेस तक सीमित नहीं हैं। रैली के आँकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि के अभाव में, यह बहस जमीनी हकीकत से ज़्यादा राजनीतिक धारणाओं की जंग बनती दिख रही है।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संबित पात्रा ने रामलीला मैदान रैली पर क्या आरोप लगाए?
पात्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने रामलीला मैदान रैली में 10 लाख लोगों के पहुँचने का दावा किया, जबकि मैदान में केवल 28 हजार कुर्सियाँ लगाई गई थीं और उनमें से 5 से 7 हजार खाली रहीं। उन्होंने यह भी बताया कि मैदान का 40 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह खाली था।
SIR विवाद पर BJP का क्या कहना है?
पात्रा ने कहा कि कांग्रेस विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मतदाताओं के नाम काटे जाने के भ्रामक दावे कर रही है। उनके अनुसार, पार्टी को पहले अपने दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर का जवाब देना चाहिए।
पात्रा ने राहुल गांधी के 2024 चुनाव वाले बयान पर क्या कहा?
पात्रा ने बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फरवरी 2025 में कार्यभार संभाला, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव उससे पहले हो चुके थे। इसलिए उन्हें उन चुनावों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। पात्रा ने यह भी कहा कि यदि चुनाव अवैध था, तो राहुल गांधी का नेता प्रतिपक्ष पद भी अवैध होगा।
'मोहब्बत की दुकान' पर पात्रा ने क्या कहा?
पात्रा ने कहा कि उन्हें नहीं पता राहुल गांधी को 'मोहब्बत की दुकान' खोलने का लाइसेंस कब मिलेगा, क्योंकि एक ओर वे मोहब्बत की बात करते हैं और दूसरी ओर प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं।
पात्रा ने प्रधानमंत्री पद और मेहनत के बारे में क्या कहा?
पात्रा ने कहा कि 'पीएम का अर्थ सिर्फ प्रधानमंत्री नहीं — पी से पसीना और एम से मेहनत।' उन्होंने कहा कि ट्रिक फोटोग्राफी से न कोई नेता बनता है और न प्रधानमंत्री; और लोकतंत्र में आम पृष्ठभूमि के व्यक्ति भी सर्वोच्च पद तक पहुँच सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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