अफगानिस्तान के गोर प्रांत में 8 हेरोइन लैब नष्ट, 17 तस्कर गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
अफगानिस्तान के पश्चिमी गोर प्रांत में सुरक्षा बलों ने हेरोइन निर्माण की आठ गुप्त प्रयोगशालाएँ ध्वस्त कर दी हैं और 17 संदिग्ध मादक पदार्थ तस्करों को हिरासत में लिया है। प्रांतीय पुलिस प्रवक्ता मौलवी अब्दुल रहमान बदरी के अनुसार, 1 नवंबर 2026 को दी गई जानकारी में बताया गया कि यह कार्रवाई अफगानिस्तान में चलाए जा रहे व्यापक मादक पदार्थ-विरोधी अभियान का हिस्सा है।
छापेमारी का विवरण
पुलिस प्रवक्ता बदरी ने बताया कि खुफिया जानकारी और सूत्र-आधारित सूचना के आधार पर मादक पदार्थ-विरोधी इकाइयों ने चहारसदा जिले के बाहरी इलाकों में विशेष छापेमारी की। इस अभियान में अवैध लैब परिसरों को नष्ट किया गया और हेरोइन निर्माण में उपयोग होने वाले बड़ी मात्रा में रसायन एवं नशीले पदार्थ बरामद किए गए। गिरफ्तार 17 संदिग्धों को न्यायिक अधिकारियों के सुपुर्द कर दिया गया है और उनके मामलों की विधिक फाइलें भी भेज दी गई हैं।
हालिया अभियानों की श्रृंखला
यह कार्रवाई अकेली नहीं है — पिछले कुछ हफ्तों में अफगानिस्तान के कई प्रांतों में इसी तरह के अभियान चलाए गए हैं। 18 अक्टूबर 2026 को पश्चिमी फराह प्रांत में पुलिस ने करीब एक टन अवैध मादक पदार्थ जलाकर नष्ट किए। प्रांतीय पुलिस प्रवक्ता कलीमुल्लाह नांग्याल ने बताया कि इनमें 955 किलोग्राम अफीम-आधारित नशीले पदार्थ, चरस और 36 किलोग्राम मेथामफेटामाइन शामिल थे, जो अलग-अलग कार्रवाइयों में जब्त हुए थे। उस दौरान एक संदिग्ध तस्कर को भी गिरफ्तार किया गया।
16 अक्टूबर 2026 को हेलमंद प्रांत के सूचना और संस्कृति निदेशालय ने बताया कि मादक पदार्थ-विरोधी पुलिस ने 136 किलोग्राम अफीम-आधारित नशीले पदार्थ जब्त किए और तीन संदिग्ध तस्करों को हिरासत में लिया। यह बरामदगी 15 अक्टूबर को सांगिन जिले में दो वाहनों से हुई।
161 टन का महा-विनाश
इन कार्रवाइयों से भी पहले, 13 अक्टूबर 2026 को पश्चिमी हेरात प्रांत में पुलिस ने एक साल तक चले मादक पदार्थ-विरोधी अभियान के दौरान जब्त 161 टन विभिन्न प्रकार के अवैध नशीले पदार्थों को जलाकर नष्ट किया। यह अफगानिस्तान में हालिया वर्षों की सबसे बड़ी एकल विनाश-कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।
व्यापक संदर्भ और महत्त्व
गौरतलब है कि अफगानिस्तान दशकों से विश्व में अफीम उत्पादन का प्रमुख केंद्र रहा है। वर्तमान सत्ता द्वारा मादक पदार्थों पर प्रतिबंध की घोषणा के बावजूद, जमीनी स्तर पर नशीले पदार्थों का निर्माण और तस्करी जारी है — जो इन अभियानों की निरंतरता से स्पष्ट होता है। आलोचकों का कहना है कि जब तक सामाजिक-आर्थिक विकल्प नहीं मिलते, किसान और तस्कर नेटवर्क मादक पदार्थ व्यापार की ओर आकर्षित होते रहेंगे। आने वाले हफ्तों में इस अभियान की गति और परिणाम यह तय करेंगे कि सरकार की नशा-मुक्ति नीति कितनी प्रभावी सिद्ध होती है।