अफगानिस्तान के फराह प्रांत में पुलिस ने एक टन अवैध नशीले पदार्थ जलाए, तस्कर गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
अफगानिस्तान के पश्चिमी प्रांत फराह में पुलिस ने रविवार, 19 अक्टूबर 2026 को लगभग एक टन अवैध नशीले पदार्थों को सार्वजनिक रूप से जलाकर नष्ट कर दिया। प्रांतीय पुलिस प्रवक्ता कलीमुल्लाह नांग्याल ने सोमवार को इसकी पुष्टि की। यह कार्रवाई अफगान सरकार के उस व्यापक मादक पदार्थ-विरोधी अभियान का हिस्सा है, जो हाल के महीनों में और तेज हो गया है।
बरामदगी और नष्ट की गई सामग्री
अधिकारियों के अनुसार, हाल ही में चलाए गए कई अभियानों के दौरान पुलिस ने 955 किलोग्राम अफीम और उससे जुड़े नशीले पदार्थ, हशीश (चरस) तथा 36 किलोग्राम मेथामफेटामाइन बरामद की थी। इन सभी को रविवार को सार्वजनिक रूप से जलाकर नष्ट किया गया। इस कार्रवाई में पुलिस ने एक संदिग्ध ड्रग तस्कर को भी गिरफ्तार किया है, जिसे शुरुआती जांच पूरी होने के बाद न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत के हवाले किया जाएगा।
हेलमंद और हेरात में भी कार्रवाई
इससे पहले 16 अक्टूबर को अफगानिस्तान के दक्षिणी प्रांत हेलमंद के सूचना एवं संस्कृति निदेशालय ने बताया था कि मादक पदार्थ विरोधी पुलिस ने 136 किलोग्राम अफीम और संबंधित नशीले पदार्थ जब्त किए और तीन संदिग्ध तस्करों को गिरफ्तार किया। यह खेप 15 अक्टूबर को सांगिन जिले में दो वाहनों से बरामद की गई थी।
13 अक्टूबर को पश्चिमी प्रांत हेरात में पुलिस ने एक साल तक चले मादक पदार्थ-विरोधी अभियान के दौरान बरामद किए गए 161 टन विभिन्न अवैध नशीले पदार्थों को जला दिया। हेरात के पुलिस प्रवक्ता सईद मसूद हुसैनी के अनुसार, ये पदार्थ हेरात शहर और प्रांत के विभिन्न जिलों में चलाए गए अभियानों के दौरान बरामद हुए थे।
ड्रग-प्रोसेसिंग लैब भी ध्वस्त
इसी व्यापक अभियान के तहत पुलिस ने पड़ोसी गोर प्रांत में दस ड्रग-प्रोसेसिंग लैब भी नष्ट कीं। इसके अलावा हेरोइन निर्माण में इस्तेमाल होने वाली बड़ी मात्रा में कच्ची सामग्री भी बरामद की गई। हुसैनी ने स्पष्ट किया कि पुलिस किसी को भी अफगानिस्तान में अवैध ड्रग्स की तस्करी, खेती या उत्पादन की अनुमति नहीं देगी।
अफगान सरकार का नशामुक्ति का लक्ष्य
अफगान सरकार ने ड्रग्स की तस्करी, उत्पादन और अफीम की खेती पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है। गौरतलब है कि अफगानिस्तान दशकों से अफीम उत्पादन के लिए वैश्विक स्तर पर जाना जाता रहा है। सरकार का कहना है कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक अफगानिस्तान पूरी तरह नशामुक्त नहीं हो जाता। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय अफगानिस्तान से मादक पदार्थों की तस्करी पर कड़ी नज़र रखे हुए है।