राहुल गांधी की 1 नवंबर रैली पर दिल्ली व्यापारियों का विरोध, दीपावली से पहले टालने की अपील
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के प्रमुख बाज़ारों के कारोबारियों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को अपील की कि 1 नवंबर को आयोजित होने वाली इंडी गठबंधन की रैली को दीपावली त्योहार के मद्देनज़र टाला जाए। व्यापारियों का कहना है कि इस रैली के कारण त्योहारी कारोबार पर सीधा असर पड़ रहा है और ग्राहकों की आवाजाही थम गई है।
व्यापारियों की नाराज़गी और मुख्य माँग
सदर बाज़ार बारी मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने कहा कि व्यापारियों में इस समय भारी रोष व्याप्त है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, राहुल गांधी को बस अपनी रैली थोड़ी आगे खिसका देनी चाहिए — इसमें उन्हें कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
पम्मा ने राहुल गांधी के चर्चित 'मोहब्बत की दुकान' वाले नारे का हवाला देते हुए तीखा सवाल किया: 'वे कहते हैं कि मैं मोहब्बत की दुकान चला रहा हूँ, लेकिन इस मोहब्बत की दुकान के चक्कर में हमारी दुकान क्यों बर्बाद हो रही है? आप हमारी दुकानें क्यों उजाड़ रहे हैं?'
कारोबार पर असर और आर्थिक नुकसान
पम्मा के अनुसार रैली की घोषणा के बाद से सदर बाज़ार क्षेत्र में कारोबार लगभग ठप हो गया है। लोग अपनी यात्राएँ और खरीदारी योजनाएँ रद्द कर रहे हैं। गौरतलब है कि दीपावली से पहले के ये दिन व्यापारियों के लिए सालभर का सबसे व्यस्त और लाभदायक मौसम होता है, जिसके लिए वे महीनों पहले से स्टॉक इकट्ठा करते हैं।
पम्मा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि राहुल गांधी व्यापारियों का दर्द नहीं समझते, तो वे आगामी चुनावों में कांग्रेस का पूर्ण बहिष्कार करने से नहीं हिचकेंगे। उन्होंने कहा, 'हम हर जगह राहुल गांधी का विरोध करेंगे।'
चाँदनी चौक के व्यापारियों का संयमित संदेश
चाँदनी चौक ट्रेडर्स काउंसिल के कोषाध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने अपेक्षाकृत संयमित लेकिन दृढ़ लहजे में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राहुल गांधी और उनकी पार्टी व्यापारी संगठनों के पत्रों पर गंभीरता से विचार करेगी। अग्रवाल ने कहा, 'हम यह नहीं कह रहे कि कार्यक्रम या विरोध-प्रदर्शन नहीं होने चाहिए — लोकतंत्र में यह अधिकार ज़रूरी है। लेकिन त्योहारी सीजन को देखते हुए इसे कुछ समय के लिए टाला ज़रूर जा सकता है।'
ऐतिहासिक संदर्भ: राजनीतिक रैलियाँ और बाज़ार
यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली के पारंपरिक व्यापारिक इलाके — सदर बाज़ार, चाँदनी चौक, करोल बाग — राजनीतिक रैलियों और जुलूसों के कारण आर्थिक नुकसान की शिकायत करते आए हैं। यह Nवीं ऐसी घटना नहीं है जब किसी बड़े राजनीतिक आयोजन से त्योहारी कारोबार प्रभावित हुआ हो। व्यापारी संगठनों ने इस बार औपचारिक पत्र लिखकर और सार्वजनिक बयान देकर अपनी नाराज़गी दर्ज कराई है — जो एक असाधारण कदम माना जा रहा है।
आगे की राह
अब सबकी निगाह कांग्रेस के उस फैसले पर है कि वह 1 नवंबर की रैली को यथावत रखती है या व्यापारियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उसे पुनर्निर्धारित करती है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार दिल्ली के व्यापारी वर्ग की नाराज़गी को नज़रअंदाज़ करना कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से महँगा पड़ सकता है, विशेषकर तब जब दिल्ली में चुनावी समीकरण पहले से ही जटिल हैं।