30 अक्टूबर 2026
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राहुल गांधी की 1 नवंबर रैली पर दिल्ली व्यापारियों का विरोध, दीपावली से पहले टालने की अपील

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राहुल गांधी की 1 नवंबर रैली पर दिल्ली व्यापारियों का विरोध, दीपावली से पहले टालने की अपील

सारांश

दीपावली से ठीक पहले दिल्ली के प्रमुख बाज़ारों के व्यापारियों ने राहुल गांधी को कड़े शब्दों में चेताया — 'मोहब्बत की दुकान' के चक्कर में हमारी असली दुकानें मत उजाड़ो। 1 नवंबर की रैली टालने की माँग के साथ कांग्रेस-बहिष्कार की चेतावनी भी आई।

मुख्य बातें

सदर बाज़ार बारी मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन और चाँदनी चौक ट्रेडर्स काउंसिल ने 30 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी की 1 नवंबर रैली टालने की माँग की।
व्यापारियों का कहना है कि रैली की वजह से दीपावली के त्योहारी सीजन में कारोबार लगभग ठप हो गया है और ग्राहकों ने यात्राएँ रद्द कर दी हैं।
एसोसिएशन अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने चेतावनी दी कि माँग न मानी गई तो व्यापारी आगामी चुनावों में कांग्रेस का बहिष्कार करेंगे।
राजीव अग्रवाल (कोषाध्यक्ष, चाँदनी चौक ट्रेडर्स काउंसिल) ने कहा कि रैली करने के लोकतांत्रिक अधिकार को स्वीकार करते हैं, पर त्योहारी सीजन में टालना उचित होगा।
कारोबारियों ने इंडी गठबंधन को औपचारिक पत्र भेजकर कार्यक्रम पुनर्निर्धारित करने का आग्रह किया है।

नई दिल्ली के प्रमुख बाज़ारों के कारोबारियों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को अपील की कि 1 नवंबर को आयोजित होने वाली इंडी गठबंधन की रैली को दीपावली त्योहार के मद्देनज़र टाला जाए। व्यापारियों का कहना है कि इस रैली के कारण त्योहारी कारोबार पर सीधा असर पड़ रहा है और ग्राहकों की आवाजाही थम गई है।

व्यापारियों की नाराज़गी और मुख्य माँग

सदर बाज़ार बारी मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने कहा कि व्यापारियों में इस समय भारी रोष व्याप्त है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, राहुल गांधी को बस अपनी रैली थोड़ी आगे खिसका देनी चाहिए — इसमें उन्हें कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

पम्मा ने राहुल गांधी के चर्चित 'मोहब्बत की दुकान' वाले नारे का हवाला देते हुए तीखा सवाल किया: 'वे कहते हैं कि मैं मोहब्बत की दुकान चला रहा हूँ, लेकिन इस मोहब्बत की दुकान के चक्कर में हमारी दुकान क्यों बर्बाद हो रही है? आप हमारी दुकानें क्यों उजाड़ रहे हैं?'

कारोबार पर असर और आर्थिक नुकसान

पम्मा के अनुसार रैली की घोषणा के बाद से सदर बाज़ार क्षेत्र में कारोबार लगभग ठप हो गया है। लोग अपनी यात्राएँ और खरीदारी योजनाएँ रद्द कर रहे हैं। गौरतलब है कि दीपावली से पहले के ये दिन व्यापारियों के लिए सालभर का सबसे व्यस्त और लाभदायक मौसम होता है, जिसके लिए वे महीनों पहले से स्टॉक इकट्ठा करते हैं।

पम्मा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि राहुल गांधी व्यापारियों का दर्द नहीं समझते, तो वे आगामी चुनावों में कांग्रेस का पूर्ण बहिष्कार करने से नहीं हिचकेंगे। उन्होंने कहा, 'हम हर जगह राहुल गांधी का विरोध करेंगे।'

चाँदनी चौक के व्यापारियों का संयमित संदेश

चाँदनी चौक ट्रेडर्स काउंसिल के कोषाध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने अपेक्षाकृत संयमित लेकिन दृढ़ लहजे में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राहुल गांधी और उनकी पार्टी व्यापारी संगठनों के पत्रों पर गंभीरता से विचार करेगी। अग्रवाल ने कहा, 'हम यह नहीं कह रहे कि कार्यक्रम या विरोध-प्रदर्शन नहीं होने चाहिए — लोकतंत्र में यह अधिकार ज़रूरी है। लेकिन त्योहारी सीजन को देखते हुए इसे कुछ समय के लिए टाला ज़रूर जा सकता है।'

ऐतिहासिक संदर्भ: राजनीतिक रैलियाँ और बाज़ार

यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली के पारंपरिक व्यापारिक इलाके — सदर बाज़ार, चाँदनी चौक, करोल बाग — राजनीतिक रैलियों और जुलूसों के कारण आर्थिक नुकसान की शिकायत करते आए हैं। यह Nवीं ऐसी घटना नहीं है जब किसी बड़े राजनीतिक आयोजन से त्योहारी कारोबार प्रभावित हुआ हो। व्यापारी संगठनों ने इस बार औपचारिक पत्र लिखकर और सार्वजनिक बयान देकर अपनी नाराज़गी दर्ज कराई है — जो एक असाधारण कदम माना जा रहा है।

आगे की राह

अब सबकी निगाह कांग्रेस के उस फैसले पर है कि वह 1 नवंबर की रैली को यथावत रखती है या व्यापारियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उसे पुनर्निर्धारित करती है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार दिल्ली के व्यापारी वर्ग की नाराज़गी को नज़रअंदाज़ करना कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से महँगा पड़ सकता है, विशेषकर तब जब दिल्ली में चुनावी समीकरण पहले से ही जटिल हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिन्हें कांग्रेस अपना स्वाभाविक समर्थन आधार मानती रही है। यह संयोग नहीं है — दिल्ली के परंपरागत बाज़ारों के व्यापारी वर्ग ने पहले AAP और BJP के बीच झूलते हुए कांग्रेस को बार-बार निराश किया है। इस बार औपचारिक पत्र और कांग्रेस-बहिष्कार की सार्वजनिक चेतावनी एक संकेत है कि व्यापारी वर्ग अब केवल रस्मी विरोध नहीं, बल्कि राजनीतिक जवाबदेही माँग रहा है। यदि कांग्रेस रैली नहीं टालती, तो यह एक आसान जीत गँवाने जैसा होगा; और यदि टालती है, तो विपक्ष की गोलबंदी कमज़ोर दिखने का जोखिम।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली व्यापारी राहुल गांधी की 1 नवंबर रैली का विरोध क्यों कर रहे हैं?
व्यापारियों का कहना है कि दीपावली से ठीक पहले यह रैली त्योहारी कारोबार को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। सदर बाज़ार और चाँदनी चौक जैसे इलाकों में ग्राहकों की आवाजाही रुक गई है और लोग अपनी खरीदारी योजनाएँ रद्द कर रहे हैं।
व्यापारियों ने कांग्रेस को क्या चेतावनी दी है?
सदर बाज़ार बारी मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने कहा कि यदि राहुल गांधी व्यापारियों का दर्द नहीं समझते, तो वे आगामी चुनावों में कांग्रेस का पूर्ण बहिष्कार करेंगे और हर जगह राहुल गांधी का विरोध करेंगे।
चाँदनी चौक ट्रेडर्स काउंसिल का क्या कहना है?
चाँदनी चौक ट्रेडर्स काउंसिल के कोषाध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने कहा कि वे लोकतांत्रिक अधिकारों का विरोध नहीं करते, लेकिन त्योहारी सीजन को देखते हुए रैली को कुछ समय के लिए टाला जाना चाहिए। उन्हें उम्मीद है कि कांग्रेस व्यापारियों के पत्रों पर विचार करेगी।
इंडी गठबंधन की यह रैली कब और कहाँ होने वाली है?
इंडी गठबंधन की ओर से यह रैली 1 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होनी है। दिल्ली के व्यापारी संगठनों ने इसे दीपावली के त्योहारी सीजन के बीच बताते हुए टालने का आग्रह किया है।
'मोहब्बत की दुकान' बनाम व्यापारियों की दुकानदारी — विवाद की जड़ क्या है?
राहुल गांधी अपनी राजनीति को 'मोहब्बत की दुकान' कहते हैं। व्यापारियों ने इसी नारे का उपयोग करते हुए व्यंग्यात्मक ढंग से कहा कि इस 'मोहब्बत की दुकान' के चलते उनकी असली दुकानें बर्बाद हो रही हैं। यह विवाद दर्शाता है कि राजनीतिक बयानबाज़ी और ज़मीनी आर्थिक हकीकत के बीच टकराव किस तरह उभर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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