दिवाली से पहले राहुल गांधी की रैली पर व्यापारियों का विरोध, 1 नवंबर का प्रदर्शन टालने की अपील
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली के प्रमुख व्यापारिक संगठनों ने 28 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से 1 नवंबर को प्रस्तावित विपक्षी गठबंधन की रैली और विरोध प्रदर्शन को दिवाली के बाद तक टालने की माँग की है। व्यापारियों का कहना है कि दिवाली और भाई दूज के बीच होने वाला यह आयोजन बाज़ारों में ग्राहकों की आवाजाही, ट्रैफिक व्यवस्था और कारोबार पर सीधा और गंभीर असर डालेगा।
व्यापारियों की मुख्य आपत्तियाँ
व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत गर्ग ने कहा कि जिस मुद्दे को लेकर रैली का आयोजन किया जा रहा है, वह पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय के विचाराधीन है और अगली सुनवाई 17 नवंबर को निर्धारित है। उन्होंने तर्क दिया कि न्यायालय में मामला लंबित रहते इस तरह की रैली का कोई व्यावहारिक औचित्य नहीं है।
गर्ग ने कहा, 'अगर राहुल गांधी एक समझदार व्यक्ति हैं और सही मायने में समझदारी वाली राजनीति करना चाहते हैं या कुछ अच्छा करना चाहते हैं, तो उनके लिए यही बेहतर होगा कि वे इस विरोध प्रदर्शन को वापस ले लें।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस प्रकार के आयोजन लोगों को भ्रमित करने और दबाव की राजनीति का हिस्सा हैं।
रामलीला मैदान की रणनीतिक स्थिति से खतरा
चांदनी चौक व्यापार समिति के अध्यक्ष संजय भार्गव ने बताया कि समस्या केवल रैली के उस एक दिन की नहीं है — बल्कि उससे पहले और बाद में लागू होने वाली सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक प्रतिबंध और बैरिकेडिंग पूरे इलाके के कारोबार को बाधित करती है। उन्होंने कहा, 'रामलीला मैदान नई दिल्ली और पुरानी दिल्ली के बीच स्थित है और यहाँ बड़ी भीड़ जुटने की स्थिति में दोनों इलाकों में भारी ट्रैफिक जाम लग सकता है।'
भार्गव के अनुसार, इसका सीधा असर चांदनी चौक, सदर बाज़ार और आसपास के थोक व खुदरा बाज़ारों पर पड़ना तय है — जो त्योहारी सीजन में अपने सर्वाधिक कारोबार के दिन देखते हैं।
व्यापारियों के लिए करोड़ों का नुकसान
कारोबारी पूरनचंद जोशी ने कहा कि बाज़ारों के आसपास होने वाले किसी भी प्रदर्शन का नुकसान सबसे पहले व्यापारियों को उठाना पड़ता है। ऐसे आयोजनों के कारण ग्राहकों की संख्या घट जाती है और कारोबार में करोड़ों रुपए की हानि होती है।
एक अन्य कारोबारी अजय कुमार मित्तल ने बताया कि दुकानदार महीनों पहले से स्टॉक तैयार करते हैं, सप्लाई चेन व्यवस्थित करते हैं और ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए विज्ञापन सहित कई स्तरों पर निवेश करते हैं। मित्तल ने कहा, 'यदि ऐसे समय में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन और रैलियाँ होती हैं तो केवल नुकसान नहीं होता, बल्कि पूरा कारोबार प्रभावित हो जाता है।'
व्यापारियों की माँग और आगे की राह
व्यापारियों ने एकस्वर से यह स्पष्ट किया है कि वे राजनीतिक दलों की गतिविधियों का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि उनकी माँग है कि ये आयोजन त्योहारी सीजन समाप्त होने के बाद रखे जाएँ। यह ऐसे समय में आया है जब व्यापारी वर्ग पहले से ही कई महीनों के कमज़ोर कारोबार के बाद दिवाली सीजन से उबरने की उम्मीद लगाए बैठा है। गौरतलब है कि रामलीला मैदान पर होने वाले किसी भी बड़े जनसमागम का असर पुरानी दिल्ली के व्यापारिक केंद्रों पर हमेशा से महसूस किया जाता रहा है।