28 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पीएम विकसित ग्राम स्वराज योजना को कैबिनेट की मंजूरी; ₹7,395 करोड़ से 2.55 लाख पंचायतों का होगा कायाकल्प

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पीएम विकसित ग्राम स्वराज योजना को कैबिनेट की मंजूरी; ₹7,395 करोड़ से 2.55 लाख पंचायतों का होगा कायाकल्प

सारांश

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹7,395 करोड़ की पीएम विकसित ग्राम स्वराज योजना को मंजूरी दी, जो 2026-31 के बीच 2.55 लाख पंचायतों को डिजिटल, प्रशिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने का दावा करती है। 17 भाषाओं में काम करने वाला एआई प्लेटफॉर्म 'पंचम' और अनिवार्य ऑनलाइन ऑडिट इस योजना की नई पहचान हैं।

मुख्य बातें

28 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना (पीएम वीजीएसवाई) को मंजूरी दी।
योजना का कुल बजट ₹7,395.55 करोड़ ; केंद्र का हिस्सा ₹4,869.48 करोड़ , राज्यों का ₹2,526.07 करोड़ ।
देशभर की 2.55 लाख से अधिक पंचायतों और 32 लाख निर्वाचित प्रतिनिधियों व पंचायत कर्मियों को सीधा लाभ।
हर साल 2.55 लाख ग्राम पंचायत विकास योजनाएँ (GPDP) ईग्रामस्वराज पोर्टल पर तैयार की जाएंगी।
पंचम एआई प्लेटफॉर्म 17 भारतीय भाषाओं में योजनाओं की जानकारी देगा।
योजना 2026-27 से 2030-31 तक लागू; संविधान के भाग-IX से बाहर के क्षेत्रों में पारंपरिक निकायों को भी शामिल किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना (पीएम वीजीएसवाई) को हरी झंडी दे दी — एक केंद्र प्रायोजित योजना जिसका कुल बजट ₹7,395.55 करोड़ है और जो 2026-27 से 2030-31 तक लागू की जाएगी। इस योजना का मकसद देश की 2.55 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को स्थानीय विकास और सुशासन की धुरी बनाना है।

योजना का वित्तीय ढाँचा

सरकारी बयान के अनुसार, ₹7,395.55 करोड़ की इस योजना में केंद्र सरकार का हिस्सा ₹4,869.48 करोड़ और राज्यों का हिस्सा ₹2,526.07 करोड़ होगा। यह लागत-साझेदारी मॉडल राज्यों को भी पंचायती सशक्तिकरण में वित्तीय भागीदार बनाता है, जो योजना की दीर्घकालिक टिकाऊपन के लिए अहम है।

किसे और कितना होगा फायदा

योजना का प्रत्यक्ष लाभ 2.55 लाख से अधिक पंचायतों और पारंपरिक स्थानीय निकायों से जुड़े करीब 32 लाख निर्वाचित प्रतिनिधियों, पंचायत कर्मियों एवं अन्य हितधारकों को मिलेगा। जागरूकता कार्यक्रमों के ज़रिये हर बार कम से कम 1 करोड़ नागरिकों तक पहुँच बनाने का लक्ष्य भी रखा गया है। प्रशिक्षण में विकास योजना निर्माण, संसाधन प्रबंधन, नागरिक संवाद और स्थानीय सतत विकास लक्ष्यों (SDG) की प्राप्ति पर जोर होगा।

डिजिटल ढाँचा और 'पंचम' एआई प्लेटफॉर्म

योजना के तहत ईग्रामस्वराज पोर्टल पर हर वर्ष 2.55 लाख समग्र ग्राम पंचायत विकास योजनाएँ (GPDP) तैयार की जाएंगी। एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सरकारी योजनाओं, लाभार्थियों, सामुदायिक परिसंपत्तियों और संसाधनों की जानकारी केंद्रित होगी, जिससे पंचायतें विकास की कमियाँ चिह्नित कर सकें। इसके अतिरिक्त, पंचम नामक एआई-सक्षम बहुभाषी संचार प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा, जो 17 भारतीय भाषाओं में सरकारी योजनाओं की जानकारी सरल रूप में देगा।

पारदर्शिता और ऑडिट व्यवस्था

हर साल 2.55 लाख ऑनलाइन ऑडिट योजनाएँ तैयार की जाएंगी और ऑडिटऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से समयबद्ध ऑडिट सुनिश्चित होंगे। सरकार का कहना है कि इससे वित्तीय पारदर्शिता बढ़ेगी और पंचायतें अधिक जवाबदेह बनेंगी। गौरतलब है कि योजना के तहत कोई स्थायी पद सृजित नहीं किए जाएंगे — ज़रूरत अनुसार राज्य, ज़िला और ब्लॉक स्तर पर संविदा आधारित मानव संसाधन नियुक्त किए जा सकेंगे।

क्या होगा आगे

यह योजना देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी, उन क्षेत्रों को भी समाहित करते हुए जहाँ संविधान के भाग-IX के तहत पंचायत व्यवस्था लागू नहीं है और पारंपरिक स्थानीय निकाय कार्यरत हैं। 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय विजन को ज़मीनी स्तर से जोड़ने की यह कोशिश पंचायती राज व्यवस्था को केवल प्रशासनिक ढाँचे से आगे, विकास के वास्तविक केंद्र के रूप में स्थापित करने का दावा करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

395 करोड़ की यह योजना पंचायती राज को 'सशक्त' करने की उस लंबी कड़ी में अगली कड़ी है जो 73वें संविधान संशोधन के बाद से चली आ रही है — लेकिन ज़मीनी पंचायतें आज भी वित्तीय स्वायत्तता और प्रशिक्षित जनशक्ति के लिए संघर्ष करती हैं। 'पंचम' एआई और ऑनलाइन ऑडिट जैसे डिजिटल उपकरण नवाचारी हैं, किंतु उनकी सफलता ग्रामीण इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता की वास्तविकता पर निर्भर करेगी। संविदा आधारित मानव संसाधन मॉडल लागत-कुशल दिखता है, परंतु इससे योजना के दीर्घकालिक क्रियान्वयन की निरंतरता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। असली परीक्षण यह होगी कि 2030-31 तक कितनी पंचायतें वास्तव में स्वयं की GPDP बना और उसे लागू कर पाती हैं — सिर्फ पोर्टल पर अपलोड करने से नहीं।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना (पीएम वीजीएसवाई) क्या है?
पीएम वीजीएसवाई एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसे 28 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी। इसका उद्देश्य देश की 2.55 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को डिजिटल, प्रशिक्षित और आत्मनिर्भर बनाकर स्थानीय विकास का केंद्र बनाना है। योजना 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगी।
इस योजना में कितना पैसा खर्च होगा और किसका कितना हिस्सा है?
योजना का कुल बजट ₹7,395.55 करोड़ है। इसमें केंद्र सरकार ₹4,869.48 करोड़ और राज्य सरकारें मिलकर ₹2,526.07 करोड़ का योगदान करेंगी। यह लागत-साझेदारी मॉडल राज्यों को भी इस पहल में वित्तीय भागीदार बनाता है।
पीएम वीजीएसवाई से किसे फायदा होगा?
योजना का सीधा लाभ देशभर की 2.55 लाख से अधिक पंचायतों और पारंपरिक स्थानीय निकायों से जुड़े लगभग 32 लाख निर्वाचित प्रतिनिधियों व पंचायत कर्मियों को मिलेगा। इसके अलावा जागरूकता कार्यक्रमों के ज़रिये हर बार कम से कम 1 करोड़ नागरिकों तक पहुँच बनाने का लक्ष्य है।
'पंचम' प्लेटफॉर्म क्या है और यह कैसे काम करेगा?
'पंचम' एक एआई-सक्षम बहुभाषी संचार प्लेटफॉर्म है जो 17 भारतीय भाषाओं में काम करेगा। यह पंचायतों और नागरिकों को सरल भाषा में सरकारी योजनाओं और राष्ट्रीय पहलों की जानकारी देगा, जिससे ग्रामीण स्तर तक सूचना की पहुँच आसान होगी।
क्या यह योजना उन क्षेत्रों में भी लागू होगी जहाँ पंचायत व्यवस्था नहीं है?
हाँ, पीएम वीजीएसवाई देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी। उन क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया जाएगा जहाँ संविधान के भाग-IX के तहत पंचायत व्यवस्था लागू नहीं है और पारंपरिक स्थानीय निकाय काम करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 दिन पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले