केदारनाथ धाम में बीकेटीसी कर्मचारियों की रैली, 25 साल से अल्प वेतन पर काम का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के कर्मचारियों ने बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को केदारनाथ धाम में कड़ाके की ठंड के बीच बाबा केदारनाथ मंदिर के सामने रैली निकालकर शासन-प्रशासन के विरुद्ध अपनी नाराज़गी खुलकर जताई। कर्मचारियों का कहना है कि 20 से 25 वर्षों की निरंतर सेवा के बावजूद उन्हें न उचित वेतन मिला और न नियमितीकरण का लाभ।
मुख्य घटनाक्रम
कई दिनों से जारी आंदोलन को और धार देते हुए बीकेटीसी कर्मचारियों ने 28 अक्टूबर को मंदिर के सामने रैली निकाली और अपनी माँगें दोहराईं। कर्मचारियों ने पहले बोर्ड को नोटिस दिया था, परंतु कोई सुनवाई न होने पर उन्हें बाबा केदार के समक्ष याचना का मार्ग अपनाना पड़ा। यह आंदोलन ऐसे समय में तेज हुआ है जब केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि निकट है और तीर्थ-सत्र अपने अंतिम चरण में है।
कर्मचारियों की माँगें
कर्मचारी आशुतोष शुक्ला ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2024 में कर्मचारियों के लिए वन टाइम सेटलमेंट की घोषणा की थी, किंतु दो वर्ष बीत जाने के बाद भी इस पर अमल नहीं हुआ। शुक्ला ने मुख्यमंत्री और मंदिर समिति के अध्यक्ष से अनुरोध किया कि माँगें जल्द से जल्द पूरी की जाएँ। इसके अलावा कर्मचारियों ने समान कार्य-समान वेतन के सिद्धांत को लागू करने की भी माँग उठाई।
तीर्थ पुरोहित समाज का समर्थन
केदारनाथ धाम के वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित उमेश चन्द्र पोस्ती ने कर्मचारियों के आंदोलन को खुला समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि कई कर्मचारी निर्धारित 8 से 12 घंटे की बजाय 20 घंटे तक काम करते हैं, फिर भी उन्हें उनकी मेहनत के अनुरूप वेतन नहीं मिलता। पोस्ती ने कहा कि पूरा तीर्थ पुरोहित समाज कर्मचारियों के साथ खड़ा है और शासन-प्रशासन को इस मामले में जल्द निर्णय लेना चाहिए ताकि धाम की व्यवस्थाएँ सुचारु बनी रहें।
आम जनता और तीर्थयात्रियों पर असर
गौरतलब है कि बीकेटीसी के कर्मचारी मंदिर परिसर की दैनंदिन व्यवस्था, पूजा-पाठ की सुविधाएँ और तीर्थयात्रियों की सेवाएँ संचालित करते हैं। यदि आंदोलन लंबा खिंचा तो केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं की सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, विशेषकर कपाट बंद होने से पहले आने वाले अंतिम तीर्थयात्रियों को असुविधा हो सकती है।
क्या होगा आगे
कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी माँगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। अब सभी की नज़रें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यालय और बीकेटीसी प्रशासन पर टिकी हैं कि वे कब और क्या कदम उठाते हैं।