ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 145वीं बोर्ड बैठक: 533 किसानों को 64.7% अतिरिक्त मुआवजा, सात बड़े प्रस्तावों को हरी झंडी
सारांश
मुख्य बातें
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 145वीं बोर्ड बैठक में 28 अक्टूबर 2026 को किसानों, औद्योगिक क्षेत्रों, युवाओं और शहरी बुनियादी ढाँचे से जुड़े सात महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सबसे बड़ा निर्णय वर्ष 2002 से 2013 के बीच भूमि अधिग्रहण या क्रय से प्रभावित 533 किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा देने का रहा, जो लंबे समय से इस राहत के इंतजार में थे। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में भूमि मुआवजे को लेकर किसानों का असंतोष वर्षों से बना हुआ था।
किसानों के लिए प्रमुख निर्णय
बोर्ड ने आपसी सहमति से जमीन देने वाले किसानों को भूमि अधिग्रहण के समान सुविधाएँ देने का रास्ता साफ किया है। ₹5,725 रुपए प्रति वर्गमीटर की दर से भूमि देने का विकल्प चुनने वाले भू-स्वामियों को 6 प्रतिशत आबादी भूखंड का लाभ मिलेगा, जबकि ₹6,415 रुपए प्रति वर्गमीटर की दर चुनने वालों को यह लाभ नहीं मिलेगा। प्राधिकरण ने ये दोनों विकल्प 27 अगस्त 2026 की बोर्ड बैठक में निर्धारित किए थे, और अब उसके बाद होने वाली भूमि खरीद प्रक्रिया में यह व्यवस्था लागू होगी।
गौरतलब है कि 2002 से 2013 के बीच भूमि अधिग्रहण या क्रय से प्रभावित जिन 533 किसानों को अब तक 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर का लाभ नहीं मिला था, उन्हें अब यह राहत मिलने की उम्मीद है। प्राधिकरण ने पहले इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा था; शासन की सहमति मिलने के बाद बोर्ड ने भी इसे स्वीकृति दे दी। इससे ग्रेटर नोएडा के प्रभावित किसान भी नोएडा और यमुना प्राधिकरण की तर्ज पर अतिरिक्त प्रतिकर पाने के हकदार हो सकेंगे।
आबादी भूखंड पात्रता और लीज बैक में बदलाव
किसानों की माँग को ध्यान में रखते हुए प्राधिकरण ने आबादी भूखंड आवंटन की पात्रता के नियमों में संशोधन किया है। संशोधित व्यवस्था के तहत किसान के परिवार में पितामह, पितामही, पिता, माता, पति या पत्नी के साथ-साथ सास-ससुर को भी पात्रता के दायरे में शामिल किया जाएगा। यह बदलाव उन मामलों में राहत देगा जहाँ किसान ने भूमि अर्जन की कार्रवाई से पहले जमीन पुत्रवधू के नाम हस्तांतरित कर दी थी और पुरानी नीति के कारण वे लाभ से वंचित रह जाती थीं।
लीज बैक के मामलों में आ रही कानूनी और वित्तीय अड़चनों को दूर करने के लिए बोर्ड ने जमा की जाने वाली प्रतिकर राशि पर ब्याज माफी के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके लिए ग्रामीण आबादी स्थल प्रबंधन एवं विनियमितीकरण विनियमावली में संशोधन कर प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। वर्तमान व्यवस्था में निर्धारित समय पर भुगतान न करने पर किसानों पर ब्याज का भार पड़ता था और एक वर्ष में भुगतान न होने पर पट्टा निरस्त भी हो सकता था।
लिंक रोड से विस्थापित किसानों का पुनर्वास
गाजियाबाद में न्यू हॉलैंड ट्रैक्टर फैक्ट्री से एनएच-24 (वर्तमान एनएच-9) तक लिंक रोड निर्माण से प्रभावित किसानों के पुनर्वास का रास्ता भी खुला है। बोर्ड ने ग्राम चिपियाना खुर्द उर्फ तिगरी में उपलब्ध 5.48 एकड़ भूमि पर पात्र किसानों के भूखंडों की लीज डीड कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। लीज डीड पर होने वाला खर्च स्वयं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण वहन करेगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद गठित समिति ने 17 जून 2026 की बैठक में पात्र किसानों के दस्तावेज सत्यापन के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ाने की संस्तुति की थी।
युवाओं के लिए कौशल केंद्र और औद्योगिक सुविधाएँ
ग्रेटर नोएडा में युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र की स्थापना की जाएगी। सेक्टर ईकोटेक-1 स्थित औद्योगिक भूखंड संख्या-01 में 32,880 वर्गमीटर यानी करीब 8 एकड़ जमीन इसके लिए चिह्नित कर आरक्षित करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। भूमि का निःशुल्क आवंटन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग की सहमति के बाद किया जाएगा। इस केंद्र में तकनीकी और गैर-तकनीकी युवाओं को उद्योग एवं सेवा क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण के साथ भाषा प्रशिक्षण, प्लेसमेंट सेल और हॉस्टल सुविधाएँ भी विकसित की जाएंगी।
औद्योगिक क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए ग्राम कासना में पुलिस थाना स्थापित करने हेतु सेक्टर ईकोटेक-1 एक्सटेंशन में 3,957 वर्गमीटर जमीन निःशुल्क आवंटित करने के प्रस्ताव को बोर्ड की मंजूरी मिली। अपर पुलिस आयुक्त, मुख्यालय, गौतमबुद्ध नगर की ओर से यह माँग की गई थी और पुलिस विभाग ने 31 जुलाई 2025 को लीज डीड के लिए सहमति दी थी।
बिजली उपकेंद्र का उच्चीकरण: ₹226 करोड़ की परियोजना
औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ती बिजली माँग को पूरा करने के लिए ईकोटेक-10 स्थित मौजूदा 132/33 केवी जीआईएस विद्युत उपकेंद्र को 220/33 केवी जीआईएस उपकेंद्र में उच्चीकृत किया जाएगा। इस परियोजना पर निर्माण और भूमि लागत सहित करीब ₹226 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। उच्चीकरण के लिए 8,945 वर्गमीटर जमीन उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड को निःशुल्क उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है, जिससे ईकोटेक-10, ईकोटेक-11, घंघोला, मायचा और आसपास के क्षेत्रों की भविष्य की बिजली जरूरतें पूरी हो सकेंगी। इन फैसलों के क्रियान्वयन पर आने वाले महीनों में नजर रहेगी, क्योंकि कई प्रस्तावों को अभी शासन की अंतिम स्वीकृति की प्रतीक्षा है।