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नोएडा: तीनों प्राधिकरणों के बाहर किसानों का धरना तीसरे दिन भी जारी, 10% भूखंड व 64.7% मुआवजे की मांग

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नोएडा: तीनों प्राधिकरणों के बाहर किसानों का धरना तीसरे दिन भी जारी, 10% भूखंड व 64.7% मुआवजे की मांग

सारांश

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के बाहर किसानों का धरना तीसरे दिन भी नहीं टूटा। 10% विकसित भूखंड, 64.7% अतिरिक्त मुआवजा, 12 वर्षों से ठहरा सर्किल रेट और बच्चों के लिए रोज़गार — ये मांगें अब तक अनसुनी हैं। प्राधिकरणों की चुप्पी आंदोलन को और धार दे रही है।

मुख्य बातें

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के बाहर किसानों का धरना 16 सितंबर 2026 को लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा।
किसान 10 प्रतिशत विकसित भूखंड देने की माँग कर रहे हैं, जो भूमि अधिग्रहण के एवज में दिया जाए।
64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे की बढ़ी हुई दर पर भुगतान की माँग भी प्रदर्शन का अहम हिस्सा है।
पिछले करीब 12 वर्षों से सर्किल रेट में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई — किसानों की यह शिकायत भी केंद्र में है।
आबादी निस्तारण, लीज बैक के लंबित मामले और बच्चों के लिए स्थानीय रोज़गार भी प्रमुख माँगें हैं।
तीनों प्राधिकरणों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

नोएडा में 16 सितंबर 2026 को किसानों का धरना प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। नोएडा प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और यमुना प्राधिकरण के बाहर किसानों ने तंबू खड़े कर अपना डेरा जमा लिया है। किसानों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।

मुख्य मांगें क्या हैं

प्रदर्शनकारी किसानों की सबसे बड़ी मांग यह है कि भूमि अधिग्रहण के एवज में उन्हें 10 प्रतिशत विकसित भूखंड दिया जाए। किसानों का कहना है कि विकास परियोजनाओं के लिए उनकी ज़मीन अधिग्रहित की गई, लेकिन उसके बदले मिलने वाले लाभ और पुनर्वास से जुड़े कई मामले आज तक अनसुलझे हैं।

इसके अलावा किसानों ने 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे की बढ़ी हुई दर पर भुगतान की माँग भी रखी है। उनका तर्क है कि भूमि अधिग्रहण के समय तय की गई दर और वर्तमान बाज़ार मूल्य के बीच भारी अंतर आ चुका है, इसलिए प्रभावित किसानों को उचित प्रतिफल मिलना चाहिए।

सर्किल रेट और लंबित मामलों का मुद्दा

किसानों ने बताया कि पिछले करीब 12 वर्षों से सर्किल रेट में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि इस अवधि में ज़मीन का बाज़ार मूल्य काफ़ी बदल चुका है। उनकी माँग है कि भूमि अधिग्रहण के मामलों में मौजूदा और उचित बाज़ार दर को ध्यान में रखकर मुआवजा तय किया जाए।

इसके साथ ही आबादी के निस्तारण और लीज बैक से जुड़े बड़ी संख्या में लंबित मामलों का तत्काल समाधान करने की भी माँग की गई है। किसानों का आरोप है कि इन मामलों में देरी के चलते उन्हें लंबे समय से परेशानियाँ उठानी पड़ रही हैं।

रोज़गार की माँग

किसानों ने अपने बच्चों के लिए स्थानीय स्तर पर रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराने की माँग भी प्रमुखता से उठाई है। उनका कहना है कि जिन किसान परिवारों की ज़मीन विकास परियोजनाओं में गई है, उनकी आजीविका और भविष्य की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी भी प्राधिकरणों की है।

गौरतलब है कि यह आंदोलन एक दिन की घटना नहीं है — भूमि अधिग्रहण से जुड़ी शिकायतें नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में वर्षों से उठती रही हैं, और पहले भी किसानों ने कई बार धरना-प्रदर्शन किए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढाँचे और रियल एस्टेट परियोजनाएँ विस्तार पा रही हैं।

प्राधिकरणों की प्रतिक्रिया

अब तक तीनों में से किसी भी प्राधिकरण की ओर से किसानों की माँगों पर कोई आधिकारिक वक्तव्य सामने नहीं आया है। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र वार्ता नहीं हुई तो आंदोलन का दायरा और बढ़ाया जाएगा।

आगे क्या

प्रदर्शनकारी किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी माँगों का स्थायी समाधान होने तक धरना जारी रहेगा। तीनों प्राधिकरणों के बाहर तंबू डाले बैठे किसानों की संख्या और दृढ़ता को देखते हुए, अब सब की नज़रें इस पर टिकी हैं कि प्राधिकरण कब और किस रूप में वार्ता की पहल करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन क्रियान्वयन आज भी अधूरा है। 12 साल से सर्किल रेट न बढ़ना यह दर्शाता है कि प्राधिकरण तंत्र ज़मीनी हकीकत से कितना दूर है। जब तक इन माँगों का स्थायी और पारदर्शी निपटारा नहीं होता, ये धरने एक चक्र बने रहेंगे — और हर बार थोड़ी देर बाद बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो जाएंगे।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा में किसान किन मांगों को लेकर धरने पर हैं?
किसान मुख्य रूप से भूमि अधिग्रहण के बदले 10 प्रतिशत विकसित भूखंड, 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा, सर्किल रेट में बढ़ोतरी, आबादी निस्तारण व लीज बैक के लंबित मामलों के समाधान और अपने बच्चों के लिए स्थानीय रोज़गार की माँग कर रहे हैं। ये माँगें नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण तीनों से जुड़ी हैं।
यह धरना कितने दिनों से चल रहा है?
16 सितंबर 2026 को यह धरना लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। किसानों ने तीनों प्राधिकरणों के बाहर तंबू लगाकर डेरा डाल दिया है और माँगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है।
सर्किल रेट को लेकर किसानों की क्या शिकायत है?
किसानों के अनुसार पिछले करीब 12 वर्षों से सर्किल रेट में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि इस दौरान ज़मीन का बाज़ार मूल्य काफ़ी बढ़ चुका है। उनकी माँग है कि भूमि अधिग्रहण में मुआवजा वर्तमान और उचित बाज़ार दर के आधार पर तय किया जाए।
प्राधिकरणों ने किसानों की माँगों पर क्या कहा?
अब तक नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण में से किसी ने भी किसानों की माँगों पर कोई आधिकारिक वक्तव्य नहीं दिया है। प्राधिकरणों की चुप्पी के कारण किसानों का धरना जारी है।
10 प्रतिशत विकसित भूखंड की माँग क्या है?
किसानों की माँग है कि जिनकी ज़मीन विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की गई, उन्हें उसके एवज में 10 प्रतिशत विकसित भूखंड दिया जाए। यह माँग लंबे समय से उठाई जा रही है और इसे किसानों के पुनर्वास के लिए ज़रूरी बताया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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