राकेश टिकैत का तीनों प्राधिकरणों पर हल्ला बोल, नोएडा-ग्रेटर नोएडा में किसान महापंचायत का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
किसान नेता चौधरी राकेश टिकैत के नेतृत्व में 14 सितंबर 2026 को नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना विकास प्राधिकरण क्षेत्र के किसानों ने तीनों प्राधिकरणों के बाहर किसान महापंचायत करने का निर्णय लिया। टिकैत सोमवार को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के बाहर पहुँचे, जहाँ बड़ी संख्या में किसान अपनी लंबित माँगों को लेकर एकत्रित हुए। करीब दो वर्षों से केवल आश्वासनों पर निर्भर रहने से नाराज़ किसानों ने अब एकजुट होकर मोर्चा खोलने की ठान ली है।
मुख्य माँगें और मुद्दे
किसान महापंचायत में मुख्य रूप से आबादी निस्तारण, 10 प्रतिशत प्लॉट, शिफ्टिंग और लीज बैक से जुड़ी समस्याएँ उठाई जा रही हैं। किसानों का आरोप है कि विकास प्राधिकरणों द्वारा भूमि अधिग्रहण के बाद पुनर्वास और आबादी से जुड़े अनेक मामलों का समाधान अब तक नहीं हुआ है। बार-बार बैठकों और आश्वासनों के बावजूद स्थायी हल न मिलने से किसानों का धैर्य चुक गया है।
राकेश टिकैत की चेतावनी
राकेश टिकैत ने अधिकारियों पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले करीब दो वर्षों से किसानों को लगातार आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं बदला। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'इस बार किसानों के भ्रम को तोड़ा जाएगा और उनकी माँगों को लेकर मजबूती से आवाज़ उठाई जाएगी।' टिकैत ने यह भी साफ किया कि किसान केवल ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि नोएडा अथॉरिटी और यमुना अथॉरिटी के अधिकारियों के सामने भी अपनी माँगें रखेंगे।
राजनीतिक संदर्भ और 2027 चुनाव
राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने के सवाल पर टिकैत ने कहा कि पार्टी जहाँ से चाहे उतनी सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि 'चुनाव के दौरान सरकार के लोग बेईमानी करेंगे और पुलिस, ED तथा अन्य ताकतों का इस्तेमाल किया जा सकता है।' यह टिप्पणी किसान आंदोलन को चुनावी राजनीति से जोड़ती है, जो इसे एक व्यापक सामाजिक-राजनीतिक संदर्भ देती है।
प्रशासनिक तैयारी और सुरक्षा
किसान महापंचायत को देखते हुए प्राधिकरण और प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में पहले भी किसानों और प्राधिकरणों के बीच भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर तनाव रहा है। किसानों ने स्पष्ट किया है कि माँगों का समाधान होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
आगे का रास्ता
गौरतलब है कि तीनों क्षेत्रों के किसानों की समस्याएँ काफी हद तक समान हैं — भूमि अधिग्रहण के बाद उचित मुआवजा और पुनर्वास। टिकैत के अनुसार, इन समस्याओं के समाधान के लिए किसानों को एकजुट होकर आवाज़ उठानी होगी। आने वाले दिनों में नोएडा और यमुना प्राधिकरण के बाहर भी महापंचायत की योजना है, जिससे यह प्रदर्शन व्यापक रूप ले सकता है।