गौतम बुद्ध नगर में किसान महापंचायत: राकेश टिकैत बोले — तीनों प्राधिकरणों के बाहर डटे रहेंगे किसान
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने 15 सितंबर 2026 को गौतम बुद्ध नगर में आयोजित किसान महापंचायत के बाद स्पष्ट किया कि जब तक किसानों की सभी लंबित मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक धरना जारी रहेगा। हजारों किसान, महिलाएं और युवा जिले के सैकड़ों गांवों से एकत्रित होकर इस महापंचायत में शामिल हुए और प्रशासन एवं सरकार के खिलाफ आवाज़ बुलंद की।
महापंचायत और पैदल मार्च
सोमवार को आयोजित किसान महापंचायत के बाद बड़ी संख्या में किसान पैदल मार्च करते हुए यमुना प्राधिकरण कार्यालय के सामने पहुँचे। किसानों के अनुसार, पुलिस प्रशासन द्वारा उन्हें आगे बढ़ने से रोका गया और आंदोलन पर सख्ती बरती गई, जिसके विरोध में किसान सड़क पर ही बैठ गए। इसके बाद माहौल काफी गरम रहा और किसानों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाज़ी की।
राकेश टिकैत ने महापंचायत को संबोधित करते हुए कहा, 'जब तक किसानों की मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक धरना जारी रहेगा।' उन्होंने आरोप लगाया कि प्राधिकरणों द्वारा बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद किसानों के साथ वादाखिलाफी की गई है, जिससे उनमें नाराज़गी लगातार बढ़ रही है।
किसानों की प्रमुख मांगें
महापंचायत में किसानों ने एक सुर में अपनी माँगें प्रशासन के सामने रखीं। किसानों की माँग है कि 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवज़ा, 10 प्रतिशत किसान कोटा के प्लॉट और आबादी के लंबित मामलों का निस्तारण तत्काल किया जाए। इसके साथ ही क्षेत्र में खाद की कथित कालाबाज़ारी पर रोक, नहरों में पर्याप्त पानी की उपलब्धता और बढ़ी हुई बिजली दरों को वापस लेने की माँग भी प्रमुखता से उठाई गई।
किसानों ने जमीनों के कथित गलत तरीके से किए गए अधिग्रहण को लेकर प्रशासन से अपनी नीति स्पष्ट करने की माँग की। उनका कहना है कि जिन किसानों की जमीनें अधिग्रहण की प्रक्रिया में गई हैं, उन्हें नियमानुसार अधिकार और उचित लाभ मिलना चाहिए।
जेवर एयरपोर्ट और भूमिहीन किसानों का मुद्दा
जेवर एयरपोर्ट में क्षेत्र के युवाओं को रोज़गार उपलब्ध कराने की माँग भी महापंचायत में प्रमुखता से उठाई गई। इसके अलावा, भूमिहीन किसानों के लिए 120 वर्ग मीटर के प्लॉट उपलब्ध कराने की माँग भी रखी गई। किसानों का तर्क है कि विकास परियोजनाओं के कारण जिनकी जमीन चली गई, उनके पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
आंदोलन का दायरा और आगे की रणनीति
भारतीय किसान यूनियन के अनुसार, किसान अपनी मांगों को लेकर नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण — तीनों प्राधिकरणों के बाहर डटे हुए हैं। टिकैत ने प्रशासन से अपील की कि किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द निर्णय लिया जाए।
किसान नेताओं ने संकेत दिया है कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भूमि अधिग्रहण और मुआवज़े को लेकर किसान असंतोष लंबे अरसे से सुलग रहा है।