बद्रीनाथ धाम में कथित चोरी: भैरव सेना ने दोषी कर्मचारी के निलंबन की मांग की, 23 जुलाई से आंदोलन की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
भैरव सेना के संस्थापक अध्यक्ष संदीप खत्री ने 4 जुलाई को श्री बद्रीनाथ धाम में कथित चोरी की घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए दोषी कर्मचारी के तत्काल निलंबन और विभागीय कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने इस घटना की तुलना अयोध्या के श्रीराम मंदिर में सामने आए कथित घटनाक्रम से करते हुए कहा कि इससे लाखों श्रद्धालुओं की आस्था को गहरी ठेस पहुँची है।
मामले का घटनाक्रम
खत्री के अनुसार, उन्हें सूचना मिली कि श्री बद्रीनाथ धाम में कार्यरत एक कार्मिक को चोरी करते हुए पकड़ा गया। इस सूचना के बाद भैरव सेना की कोर कमेटी की आपात बैठक बुलाई गई, जिसमें मामले पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के निर्णय के आधार पर संगठन ने बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोहन सिंह रांगड़ को एक औपचारिक पत्र भेजा।
इस पत्र में दो स्पष्ट माँगें रखी गई हैं — पहली, आरोपी कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए; और दूसरी, संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध विभागीय एवं प्रशासनिक स्तर पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
धार्मिक व्यवस्थाओं पर गहरी चिंता
खत्री ने उत्तराखंड में धार्मिक प्रशासन की दिशा पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि जब से देवभूमि उत्तराखंड में धर्मस्व विभाग को समाप्त कर पर्यटन को प्राथमिकता दी गई है, तब से तीर्थाटन की मूल भावना कमज़ोर हुई है और श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ की घटनाएँ बढ़ी हैं।
उन्होंने कहा कि जब कोई श्रद्धालु किसी धाम में दान या चढ़ावा अर्पित करता है, तो उसकी भावना होती है कि वह धन मंदिर के जीर्णोद्धार, धार्मिक गतिविधियों और व्यवस्थाओं के सुधार में लगाया जाएगा। ऐसे में यदि उन्हीं व्यवस्थाओं को संचालित करने वाले व्यक्ति उसका दुरुपयोग करें, तो यह श्रद्धा के साथ सीधा विश्वासघात है।
मुख्यमंत्री धामी से हस्तक्षेप की अपील
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सीधे हस्तक्षेप की माँग करते हुए खत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री देशभर में हिंदुत्ववादी नेता की छवि के साथ उभरे हैं, इसलिए उनसे अपेक्षा है कि वे इस मामले का शीघ्र संज्ञान लें। उन्होंने यह भी माँग की कि यदि किसी अधिकारी की लापरवाही भी सामने आती है, तो उनके विरुद्ध भी कार्रवाई हो, ताकि सनातन धर्म के अनुयायियों में जो रोष है, उसका उचित समाधान निकल सके।
23 जुलाई से आंदोलन की चेतावनी
खत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी कि भैरव सेना इस प्रकार की घटनाओं को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं करेगी। यदि भविष्य में भी ऐसी घटनाएँ होती रहीं, तो संगठन बड़े आंदोलन का मार्ग अपनाएगा। उन्होंने बताया कि इसकी रूपरेखा तैयार कर ली गई है और 23 जुलाई से आंदोलनात्मक कार्रवाई शुरू करने की योजना है। यह मामला उत्तराखंड के धार्मिक प्रशासन और तीर्थस्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़े सवाल के रूप में उभर रहा है।